सुशील मेहता
582 views
4 days ago
महेश नवमी हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को “महेश नवमी” का उत्सव मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार माहेश्वरी समाज की वंशोत्पत्ति युधिष्ठिर संवत 9 के ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को हुई थी, तबसे माहेश्वरी समाज हर वर्ष की ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को “महेश नवमी” के नाम से माहेश्वरी वंशोत्पत्ति दिन के रूप में मनाता है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान महेश (Tripurari) और माता पार्वती जी की आराधना को समर्पित है। मान्यता के अनुसार इस दिन (ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि) से ही Maheshwari-Samaj की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए खासतौर से माहेश्वरी समाज द्वारा यह पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। महेश नवमी के दिन व्रत और भगवान शिव की पूजा करने का भी विधान है। माना जाता है कि ज्येष्ठ महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से हर तरह के पाप दूर हो जाते हैं। महेश नवमी का यह पर्व Lord Shiv And Parvati के प्रति पूर्ण भक्ति और आस्था प्रकट करता है। महेश नवमी पर्व खासतौर से माहेश्वरी समाज द्वारा मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार माहेश्वरी समाज के पूर्वजों को किसी कारण से ऋषियों ने श्राप दे दिया था। इसके बाद Mahadev ने उन्हें इसी दिन श्राप से मुक्त किया व अपना नाम भी दिया। यह भी प्रचलित है कि भगवान शंकर की आज्ञा से ही इस समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य या व्यापारिक कार्य को अपनाया। #शुभ कामनाएँ 🙏