❣️𝑲𝒖𝒎𝒂𝒓💞 𝑹𝒂𝒖𝒏𝒂𝒌💞 𝑲𝒂𝒔𝒉𝒚𝒂𝒑❣️
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7 days ago
#✋भगवान भैरव🌸 क्या आप जानते हैं कि श्रीराम के अवतार श्रीकृष्ण की मृत्यु का कारण विदुषी तारा का एक श्राप था? पंचकन्याओं में से एक, महासती तारा के जीवन के रहस्य जानने के लिए पढ़ें यह लेख। 🙏✨ पञ्चसती श्रृंखला का यह तीसरा लेख है। मंदोदरी और अहिल्या के बाद, आज हम वानरराज बाली की पत्नी तारा के विषय में जानेंगे। उत्पत्ति और विवाह का अद्भुत प्रसंग 🌊 तारा के जन्म की सर्वाधिक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, वे समुद्र मंथन के समय अन्य अप्सराओं के साथ प्रकट हुई थीं। उस मंथन में देवताओं की सहायता कर रहे वानरराज बाली और वानर वैद्य सुषेण, दोनों उनके रूप पर मोहित हो गए। सुषेण तारा के वाम (बाएं) भाग में और बाली दक्षिण (दाहिने) भाग में खड़े हो गए। तब भगवान विष्णु ने घोषित किया कि कन्या के वाम भाग में खड़ा व्यक्ति पिता और दक्षिण भाग वाला पति होता है। इस प्रकार सुषेण उनके पिता घोषित हुए और बाली उनका पति बना। तारा और बाली के पुत्र का नाम अंगद था। रामायण में विदुषी तारा की भूमिका 📖 तारा अत्यंत विदुषी और बुद्धिमान स्त्री थीं। रामायण में इनके जीवन से जुड़े तीन प्रमुख प्रसंग मिलते हैं: बाली को चेतावनी: जब सुग्रीव ने युद्ध के लिए ललकारा, तो तारा ने अपनी बुद्धिमत्ता से बाली को रोकने का प्रयास किया और बताया कि सुग्रीव की सहायता श्रीराम कर रहे हैं। धर्म का पालन: बाली के वध के पश्चात अत्यधिक शोक में होते हुए भी, तारा ने हनुमान जी द्वारा दिए गए अंगद के राज्याभिषेक के प्रस्ताव को ठुकरा दिया, क्योंकि सुग्रीव जीवित थे। ऐसी दारुण परिस्थिति में भी यह धर्मयुक्त आचरण तारा ही कर सकती थीं। लक्ष्मण जी का क्रोध शांत करना: जब राज्य पाकर सुग्रीव अपना वचन भूल गए, तो किष्किंधा में क्रोधित लक्ष्मण को शांत करने का साहस किसी में नहीं था। तब तारा ने ही अपने कोमल वचनों से महर्षि विश्वामित्र का उदाहरण देते हुए लक्ष्मण जी का क्रोध शांत किया था। श्रीराम को श्राप ⚡ अध्यात्म रामायण के अनुसार, पति की मृत्यु से शोकाकुल तारा ने श्रीराम को श्राप दिया था कि अगले जन्म में बाली ही उनकी मृत्यु का कारण बनेगा। इसी श्राप के प्रभाव से जब श्रीहरि ने श्रीकृष्ण अवतार लिया, तो बाली ने बहेलिये के रूप में जन्म लिया, जिसके बाण से श्रीकृष्ण ने निर्वाण प्राप्त किया। सुग्रीव से विवाह 🤝 बाली की मृत्यु के पश्चात, अपने पुत्र अंगद के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु तारा किष्किंधा की राजमाता और सुग्रीव की पत्नी बनीं। महाभारत के अरण्य पर्व और रामायण, दोनों में यह वर्णित है कि बाली के मारे जाने के बाद किष्किंधा और तारा, दोनों सुग्रीव को प्राप्त हुए। अन्य पंचकन्याओं के समान तारा भी अक्षतयौवना थीं, अर्थात प्रतिदिन वह अपना कौमार्य प्राप्त कर लेती थीं। पुराणों के अनुसार, इन पाँचों सतियों का प्रतिदिन स्मरण करने से मनुष्य के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। अगले लेखों में हम अन्य दो सतियों - कुंती एवं द्रौपदी के विषय में जानेंगे। हमारे पेज से जुड़े रहें! 🙏 . ॥ सियापति रामचंद्र की जय ॥ ॥ पवनसुत हनुमान की जय ॥ 🙏👇 . 🚩 !! जय जय श्री राम !!🚩 ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌷शुभ रविवार #🪔अधिक भानु सप्तमी🙏📿 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/