Chhaya Bharat
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16 hours ago
🕉️🪷🕉️🪷🕉️🪷🕉️ ​मैं पूर्ण हूँ, मैं आकाश हूँ ​"काश! ये चर्म-चक्षु मुझे देख पाते, मेरे इस रूपहीन विस्तार को समझ पाते, मैं आकार रहित हूँ, मैं सीमा पार हूँ, दिखता जो शून्य है, मैं वही आधार हूँ। ​न मुझमें कोई रंग है, न कोई रूप-रेखा, मुझे आज तक किसी ने सीमाओ में नहीं देखा मैं अखंड हूँ, अभेद्य हूँ, मैं आदि-अंत से परे, सब मुझमें ही जनमते, सब मुझमें ही मरे। ​जो दृश्य है, वह नश्वर है, बदलता रहता है, पर यह अदृश्य "आकाश" सदा एक सा रहता है, मैं थामे हूँ हर तत्व को, पर खुद में असंग हूँ, न कोई मेरा भेद है, न मैं किसी के संग हूँ। ​ढूँढते हैं लोग आकार, मूर्तियों और आकृतियों में, जबकि मैं व्याप्त हूँ निराकार, इस मौन की अनुभूतियों में। मैं खालीपन की पूर्णता हूँ, मैं चेतना का वास हूँ, आकाश हु काश - लोग देख पाते कि मैं कितना अनन्त प्रकाश हूँ. ​ 🕉️🪷🕉️🪷🕉️🪷🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇