sn vyas
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9 days ago
#जय श्री कृष्ण जब शिकारी ने प्रेम के जाल में बांध लिया स्वयं श्री कृष्ण को : घने जंगल में एक संत गुफा में ध्यानमग्न बैठे थे। तभी एक शिकारी वहां पहुंचा। बचपन में मां से मिले संस्कारों के कारण उसने संत को प्रणाम किया और भोजन लाने की बात कही। कुछ देर बाद वह एक बड़ा हिरण पकड़कर लाया, लेकिन संत ने हंसते हुए कहा, हम साधारण हिरण नहीं खाते, हम तो एक दुर्लभ हिरण का भोग लगाते हैं। शिकारी ने उत्सुक होकर उसका रूप पूछा। संत ने श्री कृष्ण का वर्णन किया। सिर पर मोर मुकुट, कानों में कुंडल, पीतांबर, गले में वैजयंती माला और अधरों पर बांसुरी। शिकारी ने प्रण किया कि जब तक वह उस अद्भुत हिरण को पकड़ नहीं लेगा, तब तक भोजन नहीं करेगा। वह जंगल-जंगल भटकता रहा। दिन बीतते गए, शरीर कमजोर होता गया, लेकिन उसके मन में केवल उसी रूप का चिंतन चलता रहा। धीरे-धीरे शिकार की भावना मिट गई और भगवान का स्मरण बस गया। उधर श्री कृष्ण ने उसका सच्चा भाव देखा और प्रकट हो गए। शिकारी ने उन्हें वही अद्भुत हिरण समझकर अपने जाल में बांध लिया और संत के पास ले आया। संत ने जब देखा कि शिकारी स्वयं श्री कृष्ण को पकड़ लाया है, तो वे भाव-विभोर हो गए। उन्होंने कहा, जिसे बड़े-बड़े योगी भी नहीं बांध पाते, उसे तूने प्रेम और विश्वास से पा लिया। शिकारी रो पड़ा। तब भगवान श्री कृष्ण मुस्कुराकर बोले, तू मुझे पकड़ने नहीं आया था, मैं तुझे पकड़ने आया था। इस कहानी से ये शिक्षा मिलती है कि भगवान तक पहुंचने के लिए ज्ञान या विद्वता नहीं, सच्चा प्रेम और निष्कपट भाव चाहिए। जहां प्रेम होता है, वहां स्वयं श्यामसुंदर चले आते हैं। 🙏 जय श्री कृष्ण 🙏