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Shree Mukh
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Shree Mukh
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27 days ago
#🛕महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं🚩 ।। ॐ नमः शिवाय ।। ।। महाशिवरात्रि विशेष ।। ।। बिल्वाष्टक स्तोत्र (बिल्व पत्र स्तुति) — हिंदी अर्थ सहित ।। (1) त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्। त्रिजन्म पापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: तीन दल वाला बिल्वपत्र तीन गुणों (सत्व, रज, तम) का प्रतीक है, शिव के तीन नेत्र और त्रिशूल का भी संकेत देता है। इसे शिव को अर्पित करने से तीन जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। (2) त्रिशाखैर्बिल्वपत्रैश्च अच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः। शिवपूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: तीन शाखाओं वाला, बिना कटे-फटे, कोमल और पवित्र बिल्वपत्र मैं शिव पूजा में अर्पित करता हूँ — यह शिव को समर्पित है। (3) अखण्ड बिल्वपत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे। शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यः एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: अखंड बिल्वपत्र से नंदीश्वर सहित शिव की पूजा करने से मनुष्य सभी पापों से शुद्ध हो जाता है। (4) शालिग्रामशिलामेकां विप्राणां जातु कल्पयेत्। सोमयज्ञ महापुण्यं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: एक बिल्वपत्र चढ़ाने का पुण्य शालिग्राम दान और सोमयज्ञ जैसे महान यज्ञों के बराबर माना गया है। (5) दन्तिकोटिसहस्राणि वाजपेयशतानि च। कोटिकन्या महादानं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: हजारों हाथियों के दान, सैकड़ों वाजपेय यज्ञ और करोड़ कन्यादान के समान फल एक बिल्वपत्र अर्पित करने से मिलता है। (6) पार्वत्याः स्वेदसंभूतं महादेवस्य च प्रियम्। बिल्ववृक्षं नमस्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: बिल्व वृक्ष माता पार्वती के तप और स्वेद से उत्पन्न माना गया है और महादेव को अत्यंत प्रिय है; मैं इसे शिव को अर्पित करता हूँ। (7) दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्। अघोरपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: बिल्व वृक्ष के दर्शन और स्पर्श से पाप नष्ट होते हैं, अतः मैं यह बिल्वपत्र शिव को समर्पित करता हूँ। (8) मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे। अग्रतः शिवरूपाय एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: बिल्व वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में शिव का वास माना गया है; इसलिए मैं यह बिल्वपत्र शिव को अर्पित करता हूँ। फलश्रुति बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ। सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोकं स गच्छति॥ अर्थ: जो व्यक्ति शिव के समीप बैठकर इस बिल्वाष्टक का पाठ करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त होता है।
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