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Shree Mukh
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#🛕महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं🚩 ।। ॐ नमः शिवाय ।। ।। महाशिवरात्रि विशेष ।। ।। बिल्वाष्टक स्तोत्र (बिल्व पत्र स्तुति) — हिंदी अर्थ सहित ।। (1) त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्। त्रिजन्म पापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: तीन दल वाला बिल्वपत्र तीन गुणों (सत्व, रज, तम) का प्रतीक है, शिव के तीन नेत्र और त्रिशूल का भी संकेत देता है। इसे शिव को अर्पित करने से तीन जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। (2) त्रिशाखैर्बिल्वपत्रैश्च अच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः। शिवपूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: तीन शाखाओं वाला, बिना कटे-फटे, कोमल और पवित्र बिल्वपत्र मैं शिव पूजा में अर्पित करता हूँ — यह शिव को समर्पित है। (3) अखण्ड बिल्वपत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे। शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यः एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: अखंड बिल्वपत्र से नंदीश्वर सहित शिव की पूजा करने से मनुष्य सभी पापों से शुद्ध हो जाता है। (4) शालिग्रामशिलामेकां विप्राणां जातु कल्पयेत्। सोमयज्ञ महापुण्यं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: एक बिल्वपत्र चढ़ाने का पुण्य शालिग्राम दान और सोमयज्ञ जैसे महान यज्ञों के बराबर माना गया है। (5) दन्तिकोटिसहस्राणि वाजपेयशतानि च। कोटिकन्या महादानं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: हजारों हाथियों के दान, सैकड़ों वाजपेय यज्ञ और करोड़ कन्यादान के समान फल एक बिल्वपत्र अर्पित करने से मिलता है। (6) पार्वत्याः स्वेदसंभूतं महादेवस्य च प्रियम्। बिल्ववृक्षं नमस्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: बिल्व वृक्ष माता पार्वती के तप और स्वेद से उत्पन्न माना गया है और महादेव को अत्यंत प्रिय है; मैं इसे शिव को अर्पित करता हूँ। (7) दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्। अघोरपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: बिल्व वृक्ष के दर्शन और स्पर्श से पाप नष्ट होते हैं, अतः मैं यह बिल्वपत्र शिव को समर्पित करता हूँ। (8) मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे। अग्रतः शिवरूपाय एकबिल्वं शिवार्पणम्॥ अर्थ: बिल्व वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में शिव का वास माना गया है; इसलिए मैं यह बिल्वपत्र शिव को अर्पित करता हूँ। फलश्रुति बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ। सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोकं स गच्छति॥ अर्थ: जो व्यक्ति शिव के समीप बैठकर इस बिल्वाष्टक का पाठ करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त होता है।
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#😍न्यू ईयर : countdown Start⌛ कुछ शब्द बोलने के लिए नहीं होते, वे केवल महसूस किए जाने के लिए जन्म लेते हैं। "अनामिका" ऐसा ही एक शब्द है जो नाम से अधिक एक भाव है, और स्पर्श से अधिक एक संयम। ______ अनामिका वह उंगली है जिसे भाषा ने नाम तो दिया, पर जीवन ने अर्थ। यह न तर्जनी है जो आदेश देती है, न मध्यमा जो विद्रोह का संकेत बने; न अंगूठा जो स्वीकृति या अस्वीकृति जताए, और न ही कनिष्ठा जो बचपन की कसमें बाँधती है। अनामिका चुप रहती है और शायद इसी कारण हृदय के सबसे निकट मानी जाती है। ______ भारतीय परंपरा में कहा गया कि इसी उंगली से हृदय तक जाने वाली नाड़ी जुड़ी है। सत्य हो या प्रतीक, भावना में यह विश्वास अनामिका को पवित्र बना देता है। यह वही उंगली है जहाँ वचन का छल्ला पहना जाता है प्रेम का नहीं…उत्तरदायित्व का। ______ अनामिका का स्पर्श कभी अधिकार नहीं माँगता, वह केवल उपस्थिति दर्ज कराता है। यह वह मिलन है जहाँ निकटता है, पर अतिक्रमण नहीं। जहाँ अपनापन है, पर आग्रह नहीं। आज के समय में जहाँ स्पर्श अक्सर जल्दबाज़ी में होता है, अनामिका हमें ठहरना सिखाती है। वह कहती है— पास आओ, पर स्वयं को खोए बिना। ______ "अनामिका मिलन" दरअसल दो आत्माओं का ऐसा संवाद है जिसमें शरीर केवल माध्यम होता है, उद्देश्य नहीं। यह आलिंगन का शुद्धतम रूप है जहाँ बाँहें नहीं, मर्यादा एक-दूसरे को घेरती है। ______ ऐसे संबंध दिखावे के नहीं होते, वे शोर नहीं करते। वे चुपचाप जीवन में टिक जाते हैं ठीक वैसे ही जैसे अनामिका हथेली में रहते हुए भी कभी स्वयं को प्रमुख नहीं बनाती। शायद इसी कारण कुछ रिश्ते नाम नहीं माँगते, वे केवल समझ चाहते हैं। अनामिका उन्हें ही समर्पित है उन भावों को जो कहे बिना समझे जाते हैं, और छुए बिना महसूस होते हैं। ______ अनामिका हमें यह सिखाती है कि हर निकटता स्वामित्व नहीं होती, और हर स्पर्श कामना से जन्मा हो, यह आवश्यक नहीं। कुछ स्पर्श केवल यह कहने के लिए होते हैं मैं हूँ…और तुम्हारी मर्यादा में हूँ। यही अनामिका का दर्शन है।
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