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संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य हुमैं👁️👁️🙏❤️
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संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य हुमैं👁️👁️🙏❤️
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देश-विदेश के 13 सतलोक आश्रमों में मनाया जा रहा है संत गरीबदास जी महाराज का बोध दिवस भारत की पावन संत परंपरा में संत गरीबदास जी महाराज का नाम अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वे एक ऐसे तत्वदर्शी संत थे जिन्होंने मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य, सृष्टि रचना के रहस्य और परम सत्य का ज्ञान जन-जन तक पहुँचाया। उनका जीवन त्याग, तपस्या, सत्य और आध्यात्मिक जागरण का अद्भुत उदाहरण है। जब किसी महान आत्मा को तत्वदर्शी सतगुरु की शरण प्राप्त होती है, वही क्षण उसके जीवन का वास्तविक पुनर्जन्म बन जाता है। ऐसा ही दिव्य अवसर संत गरीबदास जी महाराज के जीवन में भी आया, जब उन्हें परमेश्वर कबीर साहेब से ज्ञान उपदेश प्राप्त हुआ। वही पावन दिवस “बोध दिवस” के रूप में मनाया जाता है। वर्तमान वर्ष में यह पावन तिथि 28 फ़रवरी को पड़ रही है, जिस दिन संत गरीबदास जी महाराज को सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान का बोध हुआ और उन्होंने मानव कल्याण के लिए तत्वज्ञान का प्रचार प्रारंभ किया। जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि संत गरीबदास जी महाराज का जन्म सन 1717 में हरियाणा राज्य के जिला झज्जर के गाँव छुड़ानी में जाटों के प्रसिद्ध धनखड़ परिवार में हुआ। आपके पिता श्री बलराम जी तथा माता श्रीमती रानी देवी जी धर्मपरायण और संस्कारी दंपति थे। उनके नाना श्री शिवलाल जी के पास लगभग 2500 बीघा (बड़ा बीघा) भूमि थी। वर्तमान माप के अनुसार यह लगभग 1400 एकड़ के बराबर भूमि बनती है। श्री शिवलाल जी का कोई पुत्र नहीं था, इसलिए उन्होंने अपने दामाद श्री बलराम जी से अनुरोध किया कि वे छुड़ानी में ही निवास करें। परिवार की सहमति से श्री बलराम जी ने वहीं रहना स्वीकार किया। लगभग 12 वर्ष बाद उसी पावन भूमि पर संत गरीबदास जी महाराज का जन्म हुआ। बचपन से ही वे सरल, दयालु और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। वे अन्य ग्वाल बालों के साथ गौ चराने जाया करते थे। परमेश्वर कबीर साहेब से दिव्य भेंट जब संत गरीबदास जी लगभग 10 वर्ष के थे, तब कबलाना गाँव की सीमा से सटे नला खेत में जांडी के पेड़ के नीचे अन्य ग्वालों के साथ भोजन कर रहे थे। उसी समय परमेश्वर कबीर साहेब जी जिंदा महात्मा के रूप में वहाँ प्रकट हुए। कबीर परमेश्वर ने पहले सृष्टि रचना का ज्ञान सुनाया। तत्पश्चात जब संत गरीबदास जी ने सतलोक देखने की इच्छा व्यक्त की, तब कबीर साहेब उन्हें सतलोक लेकर गए। वहाँ उन्होंने देखा कि जो जिंदा महात्मा के रूप में पृथ्वी पर विराजमान हैं, वही सतलोक में असंख्य ब्रह्मांडों के स्वामी के रूप में विराजमान हैं। संत गरीबदास जी महाराज के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक मोड़ वह था जब उन्हें परमेश्वर कबीर साहेब से नाम दीक्षा प्राप्त हुई। दिव्य स्वरूप में प्रकट होकर कबीर साहेब ने संत गरीबदास जी को सतनाम और सारनाम का उपदेश दिया। यह नामदीक्षा केवल मंत्र प्रदान करना नहीं था, बल्कि सृष्टि रचना, परमधाम सतलोक तथा पूर्ण परमात्मा की पहचान का पूर्ण तत्वज्ञान प्रदान करना था। यही दिव्य दीक्षा उनके बोध का आधार बनी और उसी के उपलक्ष्य में बोध दिवस मनाया जाता है। इस दिव्य अनुभव के पश्चात संत गरीबदास जी महाराज ने जो ज्ञान प्राप्त किया, उसे लिपिबद्ध करवाया। यही ज्ञान आज अमर ग्रंथ सतग्रंथ साहेब के रूप में हमारे सामने है। अमर ग्रंथ सतग्रंथ साहेब की रचना जब बालक गरीबदास जी अपने शरीर में पुनः प्रविष्ट हुए, तब वे ऊपर सतलोक की ओर दृष्टि लगाकर स्वयं परमात्मा से प्राप्त अमृत ज्ञान को दोहों, चौपाइयों और शब्दों के रूप में उच्चारित करने लगे। बालक को जीवित देखकर लोग अत्यंत प्रसन्न हुए, लेकिन जब उन्होंने उसे इस प्रकार दिव्य वचन बोलते देखा तो ग्रामवासियों ने उसे किसी जादू-टोने के प्रभाव में समझ लिया। घर लाकर अनेक उपचार किए गए, परंतु उसकी स्थिति में कोई परिवर्तन न हुआ। अंततः अज्ञानवश ग्रामीणों ने बालक गरीबदास जी को पागल तक मान लिया। कुछ समय पश्चात, लगभग तीन वर्ष बाद, संत गोपालदास नामक संत उस गाँव में आए, जो दादू दास जी के पंथ से दीक्षित थे। वे वैश्य परिवार से संबंध रखते थे और शिक्षित भी थे। गाँव वालों के आग्रह पर उन्होंने बालक गरीबदास जी से संवाद किया। बातचीत के दौरान 62 वर्षीय गोपालदास जी समझ गए कि यह असाधारण बालक किसी दिव्य सत्ता से साक्षात्कार कर लौटा है। दादूपंथी संत गोपाल दास जी वाणियां सुनकर गरीबदास जी महाराज के पीछे हो लिए। उन्हें समझ आ गया था कि गरीबदास जी परम शक्ति से मिलकर आए हैं क्योंकि इसी प्रकार दादू जी को भी कबीर साहेब मिले थे। गरीबदास जी ने गोपाल दास जी के माध्यम से ग्रंथ साहिब के रूप में लिपिबद्ध करवाया गया। गरीबदास जी के बेरी के बाग में एक जांडी के वृक्ष के नीचे बैठकर छः माह में लिखवाया गया और इस प्रकार हस्तलिखित ग्रंथ श्री ग्रंथ साहिब (अमरबोध, अमरग्रन्थ )की रचना हुई।अमर ग्रंथ सतग्रंथ साहेब में 24000 वाणियां हैं जोकि किसी भी अन्य ग्रंथ की तुलना में सर्वाधिक हैं। यह ग्रंथ केवल आध्यात्मिक ज्ञान का संग्रह ही नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक पहलू का मार्गदर्शन करने वाला दिव्य साहित्य है। इसमें सृष्टि रचना, भक्ति मार्ग, इतिहास की घटनाएँ, रामायण, महाभारत, पुराणों का सार और जीवन का परम उद्देश्य विस्तार से वर्णित है। संत गरीबदास जी की अमृतवाणी आत्मा को जागृत करने वाली है— गरीब, अजब नगर में ले गए, हमको सतगुरु आन । झिलके बिम्ब अगाध गति, सुते चादर तान ।। गरीब, शब्द स्वरूपी उतरे, सतगुरु सत कबीर । दास गरीब दयाल है, डिगे बँधावै धीर ।। गरीब, अलल पंख अनुराग है, सुन मण्डल रह थीर । दास गरीब उधारिया , सतगुरु मिले कबीर ।। गरीब, प्रपटन वह लोक है, जहाँ अदली सतगुरु सार । भक्ति हेत से उतरे, पाया हम दीदार ।। गरीब, ऐसा सतगुरु हम मिलया, है जिंदा जगदीश । सुन्न विदेशी मिल गया छात्र मुकुट है शीश ।। गरीब, जम जौरा जासे डरें, धर्मराय धरै धीर । ऐसा सतगुरु एक है, अदली असल कबीर ।। गरीब, माया का रस पीय कर, हो गए डामा डोल । ऐसा सतगुरु हम मिलया, ज्ञान योग दिया खोल ।। गरीब, जम जौरा जासे डरें, मिटें कर्म के लेख । अदली असल कबीर है, कुल के सतगुरु एक।। इन वाणियों में स्पष्ट रूप से परम तत्व का बोध और सच्चे सतगुरु की पहचान कराई गई है। समाज सुधार में योगदान संत गरीबदास जी महाराज केवल आध्यात्मिक संत ही नहीं, बल्कि महान समाज सुधारक भी थे। उस समय समाज में अनेक कुरीतियाँ व्याप्त थीं। उन्होंने — ✔ जाटों के विभिन्न गोत्रों के बीच होने वाले झगड़ों को समाप्त कराया। ✔ लूटपाट की प्रथा का अंत कराया। ✔ नशामुक्त समाज का संदेश दिया। ✔ हुक्का, तंबाकू, चिलम जैसी बुराइयों से होने वाली आध्यात्मिक और शारीरिक हानियों के प्रति जागरूक किया। ✔ सच्ची भक्ति का मार्ग बताया। उन्होंने बताया कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे परमात्मा की भक्ति में लगाना ही इसका वास्तविक उद्देश्य है। सतलोक गमन 61 वर्ष की आयु में सन 1778 में संत गरीबदास जी महाराज ने सतलोक गमन किया। गाँव छुड़ानी में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहाँ आज भी छतरी साहेब बनी हुई है। इसके पश्चात वे सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) में अपने भक्त भूमड़ के यहाँ भी भी प्रकट हुए और वहाँ 35 वर्ष तक रहे। वहाँ भी आपकी स्मृति में छतरी बनी हुई है। आज के समय में प्रासंगिकता आज जब समाज नशा, भ्रष्टाचार, दहेज प्रथा और नैतिक पतन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तब संत गरीबदास जी की शिक्षाएँ अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनके द्वारा बताई सच्ची भक्ति, सदाचार और मानव धर्म का संदेश आज भी समाज को दिशा दे रहा है। उनकी वाणी मानवता को जोड़ने, आत्मा को जागृत करने और परम सत्य की ओर अग्रसर करने का कार्य कर रही है। बोध दिवस का भव्य आयोजन संत गरीबदास जी महाराज के ज्ञान बोध दिवस के अवसर पर 26 से 28 फ़रवरी 2026 तक विभिन्न सतलोक आश्रमों में अखंड पाठ प्रकाश एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। सतलोक आश्रम धनाना धाम, हरियाणा सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र, हरियाणा सतलोक आश्रम भिवानी, हरियाणा सतलोक आश्रम सोजत, राजस्थान सतलोक आश्रम शामली, उत्तर प्रदेश सतलोक आश्रम खमाणों, पंजाब सतलोक आश्रम धुरी, पंजाब सतलोक आश्रम मुंडका, दिल्ली सतलोक आश्रम बैतूल, मध्य प्रदेश सतलोक आश्रम इंदौर, मध्य प्रदेश सतलोक आश्रम महोली, सीतापुर, उत्तर प्रदेश सतलोक आश्रम धवलपुरी, महाराष्ट्र सतलोक आश्रम जनकपुर, नेपाल इस अवसर पर क्या कार्यक्रम होंगे? सभी सतलोक आश्रमों में बोध दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में अमर ग्रंथ सतग्रंथ साहेब का अखंड पाठ प्रकाश, तत्वज्ञान पर आधारित विशेष सत्संग प्रवचन तथा विशाल निःशुल्क भंडारे का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क नामदीक्षा की व्यवस्था रहती है। साथ ही रक्तदान शिविर, दहेज-मुक्त एवं आडंबर-रहित आदर्श विवाह जैसे सामाजिक सुधार कार्यक्रम तथा नशामुक्ति अभियान भी चलाए जाते हैं। यह आयोजन आध्यात्मिक जागृति, समानता और मानव सेवा का संदेश देता है। हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और नेपाल सहित अनेक स्थानों पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में इन कार्यक्रमों में सम्मिलित होंगे। अखंड पाठ का सीधा प्रसारण YouTube चैनल “Sant Rampal Ji Maharaj” एवं Facebook पेज “Spiritual Leader Sant Rampal Ji Maharaj” पर देखा जा सकता है। सभी भाइयों-बहनों से विनम्र निवेदन है कि अपने परिवार सहित पधारें और इस पावन अवसर पर आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ उठाएँ। #💓 मोहब्बत दिल से
संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य हुमैं👁️👁️🙏❤️
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#GodMorningThursday सीख उसी को दीजिए कबीर सीख वाकुं दीजिए, जाकुं सीख सुहाय। सीख दई थी वानरा, बैय्या का घर जाय। एक समय सर्दी में हुई वर्षा से एक वानर उसी वृक्ष पर ठिठुर रहा था जिस पर एक बैय्या पक्षी ने अपना घौंसला बनाया था जिसमें वर्षा का जल प्रवेश नहीं होता था... -बंदीछोड़ सतग #💓 मोहब्बत दिल से
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#निमंत्रणसंसारको_सम्मानकेसाथ जगत के तारणहार संत रामपाल जी महाराज के पावन सानिध्य में संत गरीबदास जी महाराज का बोध दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है तिथियाँ: 26, 27 और 28 फरवरी 2026 विशेष कार्यक्रम दहेज मुक्त विवाह (रमैणी), विशाल भंडारा, रक्तदान शिविर, #💓 मोहब्बत दिल से
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#संतगरीबदास_को_मिले_कबीरभगवान संत गरीबदास जी को 10 वर्ष की उम्र में सन 1727 में परमेश्वर कबीर जी एक जिन्दा महात्मा के वेश में मिले। उन्हें अपने अविनाशी लोक सतलोक को दिखाया जहां सर्व सुख है। तब गरीबदास जी ने बताया कि सृष्टि का रचनहार कबीर परमेश्वर है। 5Days Left For Bodh Diwas #💓 मोहब्बत दिल से
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गरीब बिनाधणी की बंदगी सुख नहीं तीनों लोक चरण कमल के ध्यान से गरीब दास संतोष।🙏☘️🌹🌴💐💐🍁🌲🍂🌿🥀🌳🌺🍀🌷 #💓 मोहब्बत दिल से
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#अल्लाह_की_यथार्थ_जानकारी पवित्र कुरान में अच्छी शिक्षा। " ब्याज लेना पाप हैं " सूरः अल् बकरा -२ आयत नं. 276 :- अल्लाह ब्याज लेने वाले का मठ मार देता है यानि नाश कर देता है और (खैरात) दान करने वाले को बढ़ाता है। Baakhabar Sant Rampal Ji #💓 मोहब्बत दिल से
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