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neelam singhal
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neelam singhal
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सुनो प्यारे जू 🙏 चले आओ मेरे बिहारी जी, क्यों नाहक में लजाते हो, 🙏🙏🙏🙏🙏 माखन चोरी में तो लजाए नहीं, मेरे पास आने में क्यों शर्माते हो! 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 #🤗जया किशोरी जी🕉️
neelam singhal
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1 hours ago
श्री अयोध्या जी में 'कनक भवन' एवं 'हनुमानगढ़ी' के बीच में एक आश्रम है जिसे 'बड़ी जगह' अथवा 'दशरथ महल' के नाम से जाना जाता है। काफी पहले वहाँ एक सन्त रहा करते थे जिनका नाम था श्री रामप्रसाद जी। प्रतिदिन मन्दिर में आने वाला सारा चढ़ावा एक बनिए को (जिसका नाम था पलटू बनिया) भिजवाया जाता था। उसी धन से थोड़ा बहुत जो भी राशन आता था.... उसी का भोग-प्रसाद बनकर भगवान को भोग लगता था और जो भी सन्त आश्रम में रहते थे वे खाते थे। एक बार प्रभु की ऐसी लीला हुई कि मन्दिर में कुछ चढ़ावा आया ही नहीं। अब इन साधुओं के पास कुछ जोड़ा गांठा तो था नहीं... तो क्या किया जाए ..? कोई उपाय ना देखकर श्री रामप्रसाद जी ने दो साधुओं को पलटू बनिया के पास भेज के कहलवाया कि भइया आज तो कुछ चढ़ावा आया नहीं है... अतः थोड़ा सा राशन उधार दे दो... कम से कम भगवान को भोग तो लग ही जाए। पलटू बनिया ने जब यह सुना तो उसने यह कहकर मना कर दिया कि मेरा और महन्त जी का लेना देना तो नकद का है... मैं उधार में कुछ नहीं दे पाऊँगा। श्री रामप्रसाद जी को जब यह पता चला तो "जैसी भगवान की इच्छा" कहकर उन्होंने भगवान को उस दिन जल का ही भोग लगा दिया। सारे साधु भी जल पी के रह गए। प्रभु की ऐसी परीक्षा थी कि रात्रि में भी जल का ही भोग लगा और सारे साधु भी जल पीकर भूखे ही सोए।वहाँ मन्दिर में नियम था कि शयन कराते समय भगवान को एक बड़ा सुन्दर पीताम्बर ओढ़ाया जाता था तथा शयन आरती के बाद श्री रामप्रसाद जी नित्य करीब एक घण्टा बैठकर भगवान को भजन सुनाते थे। पूरे दिन के भूखे रामप्रसाद जी बैठे भजन गाते रहे और नियम पूरा करके सोने चले गए। धीरे-धीरे करके रात बीतने लगी। करीब आधी रात को पलटू बनिया के घर का दरवाजा किसी ने खटखटाया। वो बनिया घबरा गया कि इतनी रात को कौन आ गया। जब आवाज सुनी तो पता चला कुछ बच्चे दरवाजे पर शोर मचा रहे हैं–'अरे पलटू... पलटू सेठ ... अरे दरवाजा खोल...।' उसने हड़बड़ा कर खीझते हुए दरवाजा खोला। सोचा कि जरूर ये बच्चे शरारत कर रहे होंगे... अभी इनकी अच्छे से डांट लगाऊँगा।जब उसने दरवाजा खोला तो देखता है कि–चार लड़के जिनकी अवस्था बारह वर्ष से भी कम की होगी .... एक पीताम्बर ओढ़ कर खड़े हैं। वे चारों लड़के एक ही पीताम्बर ओढ़े थे। उनकी छवि इतनी मोहक .... ऐसी लुभावनी थी कि ना चाहते हुए भी पलटू का सारा क्रोध प्रेम में परिवर्तित हो गया और वह आश्चर्य से पूछने लगा–'बच्चों ...! तुम हो कौन और इतनी रात को क्यों शोर मचा रहे हो...?' बिना कुछ कहे बच्चे घर में घुस आए और बोले–हमें रामप्रसाद बाबा ने भेजा है। ये जो पीताम्बर हम ओढ़े हैं... इसका कोना खोलो... इसमें सोलह सौ रुपए हैं... निकालो और गिनो।' ये वो समय था जब आना और पैसा चलता था। सोलह सौ उस समय बहुत बड़ी रकम हुआ करते थे। जल्दी-जल्दी पलटू ने उस पीताम्बर का कोना खोला तो उसमें सचमुच चांदी के सोलह सौ सिक्के निकले। प्रश्न भरी दृष्टि से पलटू बनिया उन बच्चों को देखने लगा। तब बच्चों ने कहा–'इन पैसों का राशन कल सुबह आश्रम भिजवा देना। अब पलटू बनिया को थोड़ी शर्म आई–'हाय...! आज मैंने राशन नहीं दिया... लगता है महन्त जी नाराज हो गए हैं... इसीलिए रात में ही इतने सारे पैसे भिजवा दिए।' पश्चाताप, संकोच और प्रेम के साथ उसने हाथ जोड़कर कहा–'बच्चों..! मेरी पूरी दुकान भी उठा कर मैं महन्त जी को दे दूँगा तो भी ये पैसे ज्यादा ही बैठेंगे। इतने मूल्य का सामान देते-देते तो मुझे पता नहीं कितना समय लग जाएगा। बच्चों ने कहा–'ठीक है... आप एक साथ मत दीजिए... थोड़ा-थोड़ा करके अब से नित्य ही सुबह-सुबह आश्रम भिजवा दिया कीजिएगा... आज के बाद कभी भी राशन के लिए मना मत कीजिएगा।' पलटू बनिया तो मारे शर्म के जमीन में गड़ा जाए। वो फिर हाथ जोड़कर बोला–'जैसी महन्त जी की आज्ञा।' इतना कह सुन के वो बच्चे चले गए लेकिन जाते-जाते पलटू बनिया का मन भी ले गए। इधर सवेरे सवेरे मंगला आरती के लिए जब पुजारी जी ने मन्दिर के पट खोले तो देखा भगवान का पीताम्बर गायब है। उन्होंने ये बात रामप्रसाद जी को बताई और सबको लगा कि कोई रात में पीताम्बर चुरा के ले गया।जब थोड़ा दिन चढ़ा तो गाड़ी में ढेर सारा सामान लदवा के कृतज्ञता के साथ हाथ जोड़े हुए पलटू बनिया आया और सीधा रामप्रसाद जी के चरणों में गिरकर क्षमा माँगने लगा। रामप्रसाद जी को तो कुछ पता ही नहीं था। वे पूछें–'क्या हुआ... अरे किस बात की माफी मांग रहा है।' पर पलटू बनिया उठे ही ना और कहे–'महाराज रात में पैसे भिजवाने की क्या आवश्यकता थी... मैं कान पकड़ता हूँ आज के बाद कभी भी राशन के लिए मना नहीं करूँगा और ये रहा आपका पीताम्बर... वो बच्चे मेरे यहाँ ही छोड़ गए थे.... बड़े प्यारे बच्चे थे... इतनी रात को बेचारे पैसे लेकर आ भी गये... आप बुरा ना मानें तो मैं एक बार उन बालकों को फिर से देखना चाहता हूँ।' जब रामप्रसाद जी ने वो पीताम्बर देखा तो पता चला ये तो हमारे मन्दिर का ही है जो गायब हो गया था। अब वो पूछें कि–'ये तुम्हारे पास कैसे आया?' तब उस बनिया ने रात वाली पूरी घटना सुनाई। अब तो रामप्रसाद जी भागे जल्दी से और सीधा मन्दिर जाकर भगवान के पैरों में पड़कर रोने लगे कि–'हे भक्तवत्सल...! मेरे कारण आपको आधी रात में इतना कष्ट उठाना पड़ा और कष्ट उठाया सो उठाया मैंने जीवन भर आपकी सेवा की .... मुझे तो दर्शन ना हुआ ... और इस बनिए को आधी रात में दर्शन देने पहुँच गए। जब पलटू बनिया को पूरी बात पता चली तो उसका हृदय भी धक् से होके रह गया कि जिन्हें मैं साधारण बालक समझ बैठा वे तो त्रिभुवन के नाथ थे... अरे मैं तो चरण भी न छू पाया। अब तो वे दोनों ही लोग बैठ कर रोएँ। इसके बाद कभी भी आश्रम में राशन की कमी नहीं हुई। आज तक वहाँ सन्त सेवा होती आ रही है। इस घटना के बाद ही पलटू बनिया को वैराग्य हो गया और यह पलटू बनिया ही बाद में श्री पलटूदास जी के नाम से विख्यात हुए। श्रीरामप्रसाद जी की व्याकुलता उस दिन हर क्षण के साथ बढ़ती ही जाए और रात में शयन के समय जब वे भजन गाने बैठे तो मूर्छित होकर गिर गए। संसार के लिए तो वे मूर्छित थे किन्तु मूर्च्छावस्था में ही उन्हें पत्नियों सहित चारों भाइयों का दर्शन हुआ और उसी दर्शन में श्री जानकी जी ने उनके आँसू पोंछे तथा अपनी ऊँगली से इनके माथे पर बिन्दी लगाई जिसे फिर सदैव इन्होंने अपने मस्तक पर धारण करके रखा। उसी के बाद से इनके आश्रम में बिन्दी वाले तिलक का प्रचलन हुआ। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
neelam singhal
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1 hours ago
मेरे महाकाल... मुझको खुद में जगह नहीं मिलती... तुम हो मौजूद.. इस कदर मुझ में... जय श्री महाकाल सरकार... #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
neelam singhal
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1 hours ago
🌿🍁🌹॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चैः॥🌹🍁🌿 दिनांक- 17/04/2026 💢 माता श्री नैना देवी जी 💢 के आलौकिक श्रृंगार दर्शन"🍁 माँ_आप_सभी_की_मनोकामनाएं_पूर्ण_करें_ आपका_दिन_मंगलमय_हो | #🙏 माँ वैष्णो देवी 🙏🕉️🚩जय माता दी 🚩🕉️🙏
neelam singhal
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2 hours ago
*" जयति नव नागरी, रूप गुन आगरी,* *सर्व सुख सागरी, कुंवरी राधा |* *जयति हरि भामिनि, स्याम-घनदामिनी,* *केलि कल कामिनी, छवि अगाधा ||* *जयति मनमोहिनी, करौ दृग बौहिनी,* *दरस दे सोहिनी, हरौ बाधा |* *जयति रस मूर री, सुरभि सुर भूर री,* *भगवत रसिक जन प्राण साधा ||* " *श्री भगवत रसिक जी की वाणी* नवनागरी किशोरी श्रीराधे, आप रूप और गुणों की खान हैं, सब सुखों की निधि है आपकी जय हो। आप अपार सौंदर्यशालिनी हैं, उज्जवल केली -विलास की कामनाओं से भरी हैं, प्रियतम के मेघ रुपी अंगों से संश्लिष्ट होकर आप दामिनी की तरह दमक रही हैं, हे कुञ्ज बिहारी की प्राणवल्लभे आपकी जय हो। आप परम शोभमयी हैं, श्री बिहारी जी महाराज के मन को भी मोहने वाली हैं आप की जय हो। आप अपने दर्शनों से मेरे नेत्रों को नित्य-निरंतर सुख-लाभ का अवसर देकर मेरी बाधा (आपके दर्शन में आने वाली) को हर लीजिये। भगवत रसिक जी कहते हैं कि आप रस की मूल स्रोत हैं, आपकी देह की दिव्य सुगंध और कंठ का अत्यंत मनोहर स्वर रसिक जनों का प्राणाधार है, आपकी जय हो, आपकी जय हो, आपकी जय हो।*" जयति नव नागरी, रूप गुन आगरी,* *सर्व सुख सागरी, कुंवरी राधा |* *जयति हरि भामिनि, स्याम-घनदामिनी,* *केलि कल कामिनी, छवि अगाधा ||* *जयति मनमोहिनी, करौ दृग बौहिनी,* *दरस दे सोहिनी, हरौ बाधा |* *जयति रस मूर री, सुरभि सुर भूर री,* *भगवत रसिक जन प्राण साधा ||* " *श्री भगवत रसिक जी की वाणी* नवनागरी किशोरी श्रीराधे, आप रूप और गुणों की खान हैं, सब सुखों की निधि है आपकी जय हो। आप अपार सौंदर्यशालिनी हैं, उज्जवल केली -विलास की कामनाओं से भरी हैं, प्रियतम के मेघ रुपी अंगों से संश्लिष्ट होकर आप दामिनी की तरह दमक रही हैं, हे कुञ्ज बिहारी की प्राणवल्लभे आपकी जय हो। आप परम शोभमयी हैं, श्री बिहारी जी महाराज के मन को भी मोहने वाली हैं आप की जय हो। आप अपने दर्शनों से मेरे नेत्रों को नित्य-निरंतर सुख-लाभ का अवसर देकर मेरी बाधा (आपके दर्शन में आने वाली) को हर लीजिये। भगवत रसिक जी कहते हैं कि आप रस की मूल स्रोत हैं, आपकी देह की दिव्य सुगंध और कंठ का अत्यंत मनोहर स्वर रसिक जनों का प्राणाधार है, आपकी जय हो, आपकी जय हो, आपकी जय हो। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
neelam singhal
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2 hours ago
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 मां शिवदूती, आदिशक्ति का अत्यंत उग्र और रहस्यमयी स्वरूप है। यह देवी केवल शक्ति नहीं, बल्कि स्वयं महाकाल की आज्ञा से प्रकट होने वाली दैवी चेतना हैं। “शिवदूती” नाम का अर्थ है—वह देवी जो स्वयं भगवान शिव को दूत बनाकर कार्य सिद्ध करवाती हैं। यह रूप साधारण देवी स्वरूपों से अलग, पूर्ण तांत्रिक और युद्धमयी शक्ति का प्रतीक है। देवी शिवदूती वास्तव में मां चामुंडा और काली का ही एक विशेष उग्र रूप मानी जाती हैं। जब अधर्म अत्यंत बढ़ जाता है और देवताओं की शक्तियां भी असहाय हो जाती हैं, तब आदिशक्ति इस स्वरूप में प्रकट होकर स्वयं भगवान शिव को अपना दूत बनाती हैं। यह दर्शाता है कि इस रूप में शक्ति सर्वोच्च है, यहां तक कि शिव भी उनकी आज्ञा का पालन करते हैं। पुराणों में इसका उल्लेख विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती में मिलता है। शुंभ-निशुंभ वध के समय देवी ने शिव को दूत बनाकर असुरों के पास संदेश भेजा था। इसी कारण उन्हें “शिवदूती” कहा गया। इस प्रसंग में देवी का स्वरूप अत्यंत उग्र, रक्तपिपासु और युद्धप्रिय बताया गया है, जो अधर्म का संहार करने के लिए प्रकट होती हैं। तंत्र साधना में मां शिवदूती की उपासना अत्यंत गूढ़ और शक्तिशाली मानी जाती है। इनकी साधना सामान्य भक्तों के लिए नहीं होती, बल्कि इसे विशेष रूप से तांत्रिक, अघोरी और भैरव साधक ही करते हैं। यह साधना श्मशान, निर्जन स्थानों या रात्रि के गहन समय में की जाती है। साधक इस साधना के माध्यम से शत्रु विजय, अदृश्य शक्तियों पर नियंत्रण और तेजस्विता प्राप्त करने का प्रयास करता है। इस उग्र स्वरूप का एक प्रसिद्ध श्लोक भी प्रचलित है, जो देवी की प्रचंडता और दिव्य सत्ता को प्रकट करता है— ॥ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ॥ शिवदूती स्वरूपेण दैत्यानां संहारकारिणी। घोररूपे महादेवि नमस्तुभ्यं नमो नमः ॥ मां शिवदूती की आराधना में भय और श्रद्धा दोनों का समावेश होता है। यह देवी अपने साधक की कठोर परीक्षा लेती हैं, लेकिन जो साधक सच्चे मन और पूर्ण नियम से साधना करता है, उसे यह देवी अद्भुत सिद्धियां प्रदान करती हैं। यह स्वरूप हमें यह भी सिखाता है कि जब जीवन में अन्याय अपनी सीमा पार कर देता है, तब भीतर की शक्ति को जागृत कर निर्णायक रूप धारण करना ही धर्म है। मां शिवदूती उसी जागृत, प्रचंड और अजेय शक्ति का प्रतीक हैं। नमामीशमीशान #namamishan #shivduti #mahavidya 🙏❤️❤️adishakti