*" जयति नव नागरी, रूप गुन आगरी,*
*सर्व सुख सागरी, कुंवरी राधा |*
*जयति हरि भामिनि, स्याम-घनदामिनी,*
*केलि कल कामिनी, छवि अगाधा ||*
*जयति मनमोहिनी, करौ दृग बौहिनी,*
*दरस दे सोहिनी, हरौ बाधा |*
*जयति रस मूर री, सुरभि सुर भूर री,*
*भगवत रसिक जन प्राण साधा ||* "
*श्री भगवत रसिक जी की वाणी*
नवनागरी किशोरी श्रीराधे, आप रूप और गुणों की खान हैं, सब सुखों की निधि है आपकी जय हो।
आप अपार सौंदर्यशालिनी हैं, उज्जवल केली -विलास की कामनाओं से भरी हैं, प्रियतम के मेघ रुपी अंगों से संश्लिष्ट होकर आप दामिनी की तरह दमक रही हैं, हे कुञ्ज बिहारी की प्राणवल्लभे आपकी जय हो।
आप परम शोभमयी हैं, श्री बिहारी जी महाराज के मन को भी मोहने वाली हैं आप की जय हो। आप अपने दर्शनों से मेरे नेत्रों को नित्य-निरंतर सुख-लाभ का अवसर देकर मेरी बाधा (आपके दर्शन में आने वाली) को हर लीजिये।
भगवत रसिक जी कहते हैं कि आप रस की मूल स्रोत हैं, आपकी देह की दिव्य सुगंध और कंठ का अत्यंत मनोहर स्वर रसिक जनों का प्राणाधार है, आपकी जय हो, आपकी जय हो, आपकी जय हो।*" जयति नव नागरी, रूप गुन आगरी,*
*सर्व सुख सागरी, कुंवरी राधा |*
*जयति हरि भामिनि, स्याम-घनदामिनी,*
*केलि कल कामिनी, छवि अगाधा ||*
*जयति मनमोहिनी, करौ दृग बौहिनी,*
*दरस दे सोहिनी, हरौ बाधा |*
*जयति रस मूर री, सुरभि सुर भूर री,*
*भगवत रसिक जन प्राण साधा ||* "
*श्री भगवत रसिक जी की वाणी*
नवनागरी किशोरी श्रीराधे, आप रूप और गुणों की खान हैं, सब सुखों की निधि है आपकी जय हो।
आप अपार सौंदर्यशालिनी हैं, उज्जवल केली -विलास की कामनाओं से भरी हैं, प्रियतम के मेघ रुपी अंगों से संश्लिष्ट होकर आप दामिनी की तरह दमक रही हैं, हे कुञ्ज बिहारी की प्राणवल्लभे आपकी जय हो।
आप परम शोभमयी हैं, श्री बिहारी जी महाराज के मन को भी मोहने वाली हैं आप की जय हो। आप अपने दर्शनों से मेरे नेत्रों को नित्य-निरंतर सुख-लाभ का अवसर देकर मेरी बाधा (आपके दर्शन में आने वाली) को हर लीजिये।
भगवत रसिक जी कहते हैं कि आप रस की मूल स्रोत हैं, आपकी देह की दिव्य सुगंध और कंठ का अत्यंत मनोहर स्वर रसिक जनों का प्राणाधार है, आपकी जय हो, आपकी जय हो, आपकी जय हो।
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇