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#शराब_पीना_महापाप नशा नाश का कारण है :- कबीर, औगुण कहूं शराब का, ज्ञानवंत सुन लेय। मानुष से पशुवा करै, द्रव गांठ का देय।। सन्त रामपाल जी महाराज वेदों, गीता और सदग्रंथों के आधार पर नशे के दुष्परिणामों को समझाते हैं जिससे अपने आप नशा छूट जाता है। 👉SA True Story YouTube channel #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #✝चर्च
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2 hours ago
अनमोल पुस्तक जीने की राह पढ़िए……………) 📖📖📖📖📖 जीने की राह पार्ट - 26 पृष्ठ: 64-65 "पुहलो बाई की नसीहत" एक राजा ने पुहलो बाई के ज्ञान-विचार सुने, बहुत प्रभावित हुआ। उस राजा की तीन रानियाँ थी। राजा ने अपनी रानियों को पुहलो बाई के विषय में बताया। राजा ने कई बार पुहलो बाई भक्तिन की अपनी रानियों के सामने प्रशंसा की। अपने पति के मुख से अन्य स्त्री की प्रशंसा सुनकर रानियों को अच्छा नहीं लगा। परंतु कुछ बोल नहीं सकी। उन्होंने भक्तमति पुहलो बाई को देखने की इच्छा व्यक्त की। राजा ने पुहलो बाई को अपने घर पर सत्संग करने के लिए कहा तो पुहलो बाई ने सत्संग की तिथि तथा समय राजा को बता दिया। सत्संग के दिन रानियों ने अति सुंदर तथा कीमती वस्त्र पहने तथा सब आभूषण पहने। अपनी सुंदरता दिखाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। रानियों ने सोचा था कि पुहलो बहुत सुंदर होगी। भक्तमति पुहलो राजा के घर आई। उसने खद्दर का मैला-सा वस्त्र धारण कर रखा था। हाथ में माला थी, चेहरे का रंग भी साफ नहीं था। भक्तमति पुहलो को देखकर तीनों रानियाँ खिल-खिलाकर हँसने लगी और बोली कि यह है वह पुहलो, हमने तो सोचा था कि बहुत सुंदर होगी। उनकी बात सुनकर भक्तमति पुहलो बाई ने कहा किः- वस्त्र-आभूषण तन की शोभा, यह तन काच्चो भाण्डो। भक्ति बिना बनोगी कुतिया, राम भजो न रांडो ।। भावार्थ :- सुंदर वस्त्र तथा आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं। यह शरीर नाशवान है जैसे कच्चा घड़ा होता है। यह शरीर क्षण भंगुर है। न जाने किस कारण से, किस आयु में और कब कष्ट हो जाए। यदि भक्ति नहीं की तो अगले जन्म में कुतिया का जन्म पाओगी। फिर निःवस्त्र भटकती फिरोगी। इसलिए कहा है 'राण्डो' अर्थात् स्त्रियों भक्ति करो। 'राण्ड' शब्द विधवा के लिए प्रयोग होता है। परंतु सामान्य रीति में स्त्रियाँ अपनी प्रिय सखियों को प्यार से सम्बोधित करने में (प्यारी गाली के साथ) प्रयोग किया करती। अब शिक्षित होने पर यह शब्द प्रयोग नहीं होता। भक्तनति पुहलो बाई ने सत्संग सुनाया। कबीर परमेश्वर जी की साखियों सुनाई :- कबीर, हरि के नाम बिना, नारी कुतिया होय। गली-गली भौंकत फिरे, टूक ना डाले कोय ।। कबीर, राम रटत कोढी भलो, चू-चू पड़े जो चाम। सुंदर देहि किस काम की, जा मुख नाहीं नाम ।। कबीर, नहीं भरोसा देहि का, विनश जाए छिन माहीं। श्वांस उश्वांस में नाम जपो, और यत्न कुछ नाहीं ।। कबीर, श्वांस उश्वांस में नाम जपो, व्यर्था श्वास मत खोओ। ना जाने इस श्वांस का, आवन हो के ना होय ।। गरीब, सर्व सोने की लंका थी, रावण से रणधीरम्। एक पलक में राज्य गया, जम के पड़े जंजीरम् ।। गरीब, मर्द गर्द में मिल गए, रावण से रणधीरम् । कंस, केसि, चाणूर से, हिरणाकुश बलबीरम् ।। गरीब, तेरी क्या बुनियाद है, जीव जन्म घरि लेत। दास गरीब हरि नाम बिन, खाली रह जा खेत ।। * शब्दार्थ :- कबीर परमेश्वर जी ने अध्यात्म का विधान बताया है। कहा है कि जो स्त्री भक्ति नहीं करती, वह अगले जन्म में कुतिया का जीवन प्राप्त करके गली-गली भौंकती फिरती है। कोई उसको भोजन का ग्रास भी नहीं डालता। मानव जीवन में सब भोजन समय पर मिल रहा था। भक्ति न करने से यह दशा होगी। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry #✝चर्च #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕌मस्जिद 🤲 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇
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2 hours ago
#SpiritualLeaderSaintRampalJi #tattvdarshisantrampalji #TrueGuruSantRampalJiMaharaj #GreatestGuru_InTheWorld #SantRampalJiMaharaj #SaintRampalJiMaharaj #AlmightyGodKabir #MustListen_Satsang Ishwar TV Satsang ll 16-04-2026 ll Episode : 3091 ll Sant Rampal Ji Maharaj Live Satsang https://youtube.com/live/wkLTtoGGQZQ?si=9-MNxdj2K-OclAog #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #✝चर्च
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13 hours ago
#DevoteesOfSantRampalJi #SATrueStory Sant Rampal Ji Maharaj से नाम दान बहुत लाभ हुए | SA True Story https://www.facebook.com/share/v/1C9iwU77Ym/ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕌मस्जिद 🤲 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #✝चर्च
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13 hours ago
गरुड़ पुराण कब पढ़ना चाहिए? Sant Rampal Ji Maharaj #SantRampalJiMaharaj https://www.facebook.com/share/v/1FfeRZfMTw/ #✝चर्च #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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13 hours ago
#SpiritualLeaderSaintRampalJi #tattvdarshisantrampalji #TrueGuruSantRampalJiMaharaj #GreatestGuru_InTheWorld #SantRampalJiMaharaj #SaintRampalJiMaharaj #AlmightyGodKabir #MustListen_Satsang Sadhna TV Satsang ll 15-04-2026 ll Episode : 3594 ll Sant Rampal Ji Maharaj Live Satsang https://www.facebook.com/share/v/1DxPWKqmZE/ #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #✝चर्च
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13 hours ago
Goddess Durga has always been referred to as 'Maa Durga' for ages. But, did you know that Shrimad Bhagavad Devi Puran reveals Goddess Durga to be the mother of Brahma, Vishnu and Shiv. Though this shocking revelation was always present within this sacred scripture, none other than Jagatguru Tatvdarshi Sant Rampal Ji Maharaj could decipher the truth and bring it to the fore. In this article, Sant Rampal Ji Maharaj also unveils the real relationship between Maa Durga and Kaal Brahm, in addition to her relationship with the Tridev, challenging conventional beliefs. This article also beckons readers to explore the mysteries of creation, urging to understand Who the Supreme God is that orchestrates it all: https://bit.ly/4gf9sKk #✝चर्च #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕌मस्जिद 🤲
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14 hours ago
अनमोल पुस्तक जीने की राह पढ़िए……………) 📖📖📖📖📖 जीने की राह पार्ट - 25 पृष्ठ: 62-64 "सत्संग से घर की कलह समाप्त होती है" एक माई अपनी पुत्रवधु पर बात-बात पर क्रोध करती थी। छोटी- छोटी गलतियों को बढ़ा-चढ़ाकर अपने पुत्र से कहती। पुत्र अपनी पत्नी को धमकाता। इस प्रकार घर नरक बना हुआ था। पुत्रवधु अपनी सासू-माँ से कभी-कभी कहती थी कि आप सत्संग जाया करो। अपनी पड़ोसन भी जाती है। सासू-माँ बोली कि सत्संग में तो आई-गई यानि बदचलन स्त्रियाँ जाती हैं जिनका संसार में सम्मान नहीं होता, जो अच्छे कुल की नहीं हैं। हम खानदानी हैं। हमारा क्या काम सत्संग में? ऐसे पुत्रवधु ने कई बार कोशिश की, परंतु माई मानने को तैयार नहीं होती। एक दिन गाँव की स्त्री किसी कार्यवश उनके घर आई तो सास अपनी पुत्रवधु को गालियाँ दे रही थी, धमका रही थी कि आने दे तेरे खसम को, आज तेरी खाल उतरवाऊँगी। बात क्या थी कि गिलास में चाय रखी थी जो सास के लिए डालकर पुत्रवधु बच्चे को लेने अंदर चली गई थी जो सोया था, जागने पर रो रहा था। उस बच्चे को उठाकर लाने में एक मिनट भी नहीं लगी थी कि इसी बीच में कुत्ता आया और चाय के गिलास में जीभ मारने लगा। गिलास गिर गया। चाय पृथ्वी पर बिखर गई। सासू-माँ आँगन में उस गिलास से मात्र बीस फुट की दूरी पर चारपाई पर बैठी थी। हट्टी-कट्टी थी। खेतों में सैर करके आती थी, परंतु काम के हाथ नहीं लगाती थी। इसी बात पर कलह कर रही थी। गाँव के दूसरे मोहल्ले से आई माई सत्संग में जाती थी। सब बात सुनकर उसने भतेरी (उस सास का नाम भतेरी था) से कहा कि आप सत्संग चला करो। उसका वही उत्तर था। उस सत्संग वाली भक्तमति ने बहुत देर सत्संग में सुनी बातें बताई, परंतु भतेरी मानने को तैयार नहीं थी। भतेरी की दूसरी बहन उसी मोहल्ले में विवाह रखी थी, जिस पान्ने की वह सत्संग वाली माई जानकी थी। भतेरी की बहन का नाम दयाकौर था। जानकी ने जाकर दयाकौर से बताया कि तेरी बहन भतेरी ने तो घर का नरक बना रखा है। बिना बात की लड़ाई करती है। मैं कल किसी कामवश गई थी। एक चाय का गिलास कुत्ते ने गिरा दिया। उसी का महाभारत बना रखा था। दयाकौर भी जानकी के कहने से सत्संग सुनने गई थी और दीक्षा ले ली थी। जानकी ने कहा कि उसको जैसे-तैसे एक बार सत्संग में ले चल। जब तक संतों के विचार सुनने को नहीं मिलते तो व्यक्ति व्यर्थ की टैंशन (चिंता) स्वयं रखता है तथा घर के सदस्यों को भी चिंता में रखता है। दयाकौर अगले दिन अपनी बहन के घर गई। किसी बहाने भतेरी को अपने घर ले गई। वहाँ से कई अन्य औरतें सत्संग में जाने के लिए जानकी के घर के आगे खड़ी थी। वे दयाकौर को सत्संग में चलने के लिए कहने उसके घर गई। वहाँ उसकी बहन भतेरी को देखकर उसे भी कह-सुनकर साथ ले गई। भतेरी ने जीवन में प्रथम बार सत्संग सुना। आश्रम में कैसे स्त्री-पुरूष रहते हैं, सब आँखें देखा तो अच्छा लगा। जैसा अनाप-सनाप सुना करती थी, वैसा आश्रम में कहीं देखने को नहीं मिला। सत्संग में बताया गया कि कई व्यक्ति अपनी बहन, बेटियों-बहुओं तथा अन्य स्त्रियों को सत्संग नहीं भेजते और न स्वयं जाते हैं। वे कहते हैं कि हमारे सत्संग में जाने से घर की इज्जत का नाश हो जाएगा। हमारी बहू-बेटियाँ बदनाम हो जाएंगी। उनको विचार करना चाहिए कि सत्संग में न आने से परमात्मा के विधान का ज्ञान नहीं होता कि भक्ति न करने वाले स्त्री-पुरूष अगले जीवन में महान कष्ट भोगते हैं। * सूक्ष्मवेद में बताया है कि जो मनुष्य शरीर प्राप्त करके भक्ति नहीं करते, उनको क्या हानि होती है? कबीर, हरि के नाम बिना, नारि कुतिया होय। गली-गली भौकत फिरै, टूक ना डालै कोय।। सन्त गरीब दास जी की वाणी से :- बीबी पड़दै रहे थी, ड्योडी लगती बाहर। अब गात उघाडै फिरती हैं, बन कुतिया बाजार। वे पड़दे की सुन्दरी, सुनों संदेशा मोर। गात उघाड़ै फिरती है करें सरायों शोर ।। नक बेसर नक पर बनि, पहरें थी हार हमेल। सुन्दरी से कुतिया बनी, सुन साहेब (प्रभु) के खेल ।। भावार्थ :- मनुष्य जीवन प्राप्त प्राणी यदि भक्ति नहीं करता है तो वह मृत्यु के उपरान्त पशु-पक्षियों आदि-आदि की योनियाँ प्राप्त करता है, परमात्मा के नाम जाप बिना स्त्री अगले जन्म में कुतिया का जीवन प्राप्त करती है। फिर निःवस्त्र होकर नंगे शरीर गलियों में भटकती रहती है, भूख से बेहाल होती है, उसको कोई रोटी का टुकड़ा भी नहीं डालता। जिस समय वह आत्मा स्त्री रूप में किसी राजा राणा तथा उच्च अधिकारी की बीवी (पत्नी) थी। वे उसके पूर्व जन्मों के पुण्यों का फल था जो कभी किसी जन्म में भक्ति-धर्म आदि किया था। वह सर्व भक्ति तथा पुण्य स्त्री रूप में प्राप्त कर लिए, वह आत्मा उच्च घरानों की बहू - बेटियाँ थीं। तब पर्दों में रहती थी, काजु-किशमिश डालकर हलवा तथा खीर खाती थी, उनका झूठा छोड़ा हुआ नौकरानियाँ खाती थी। उनको सत्संग में नहीं जाने दिया जाता था क्योंकि वे उच्च घरानों की बहुऐं तथा बेटियाँ थी, घर से बाहर जाने से बेइज्जती मानती थी। बड़े घरों की इज्जत इसी में मानी जाती थी कि बहू-बेटियाँ का पर्दों में घर में रहना उचित है। इन कारणों से वह पुण्यात्मा सत्संग विचार न सुनने के कारण भक्ति से वंचित रह जाती थी। उस मानव शरीर में वह स्त्री गले में नौ- नौ लाख रूपये के हमेल-हार पहनती थी, नाक में सोने की नाथ पहनती थी, उसी हार-सिंगार में अपना जीवन धन्य मानती थी। भक्ति न करने से वे अब कुतिया का जीवन प्राप्त करके नंगे शरीर गलियों में एक-एक टुकड़े के लिए तरस रही होती हैं, शहर में पहले सराय (धर्मशाला) होती थी। यात्री रात्रि में उनमें रूकते थे, सुबह भोजन खाकर प्रस्थान करते थे। वह पर्दे में रहने वाली सुन्दर स्त्री कुतिया बनकर धर्मशाला में रूके यात्री का डाला टुकड़ा खाने के लिए सराय (धर्मशाला) में भौंकती है। रोटी का टुकड़ा धरती पर डाला जाता है। उसके साथ कुछ रेत-मिट्टी भी चिपक जाती है, वह सुन्दरी जो काजु-किशमिश युक्त हलवा-खीर खाती थी, भक्ति नही करती थी, उस रेत-मिट्टी युक्त टुकड़े को खा रही है। यदि मनुष्य शरीर रहते-रहते पूरे सन्त से नाम लेकर भक्ति कर लेती तो ये दिन नहीं देखने पड़ते। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕌मस्जिद 🤲 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #✝चर्च
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#SpiritualLeaderSaintRampalJi #tattvdarshisantrampalji #TrueGuruSantRampalJiMaharaj #GreatestGuru_InTheWorld #SaintRampalJiMaharaj #SantRampalJiMaharaj #AlmightyGodKabir #MustListen_Satsang Shraddha TV Satsang ll 15-04-2026 ।। Episode : 3261 ll Sant Rampal Ji Maharaj Live Satsang https://youtube.com/live/yY0yd6Yf6L8?si=10PiM4uD5naCqIw7 #✝चर्च #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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1 days ago
#GodMorningWednesday "अनंत कोटि बाजी तहां, रचे सकल ब्रह्मांड। गरीबदास मैं क्या करूं, काल करै जीव खण्ड।।" परमात्मा कबीर जी ने बताया कि हे गरीबदास ! मैं इतना समर्थ हूँ कि अनन्त जीवों की रचना तथा सब ब्रह्मण्डों की रचना मैंने की। भोले जीव मुझे ठीक से न पहचानकर मुझे छोड़कर मेरे नाम को खण्ड करके काल के जाल में फंस जाते हैं। अब तुम ही बताओ, मैं क्या करूं? - जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #✝चर्च