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Sagar Singh
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Sagar Singh
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18 फरवरी से आगे मौसम परिवर्तन 1 मई तक चलेगा इसमें बारिश शीतलहर बर्फबारी तथा आगे 15-20 मार्च से तथा अप्रैल में हो सकता है फसलों को ओलावृष्टि से नुकसान।🙏🏻 किसानों से निवेदन है कि जो भी फसल पकने जा रही है उनमें अधिक सिंचाई न करें और कटिंग थ्रेशिंग हार्वेस्टिंग में ढील नहीं बरतें वैसे एक बात अच्छी भी है कि बारिश के साथ ही अधिकांश फसलों के भावों में जबरदस्त उछाल आने की संभावना है और 18 फरवरी से दिसंबर तक मंदी के अधिक आसार नहीं हैं पहाड़ों पर बर्फबारी तेज बारिश से जनजीवन प्रभावित होगा और भू स्खलन हो सकता है। दिल्ली व उत्तर पुर्वी भारत में हिंसा हत्या उपद्रव राजनीतिक उथल-पुथल आतंकी घटना की प्रबल संभावना है, महाराष्ट्र में भी उपद्रव होगा यह सब कुछ देशद्रोही तत्वों के षड्यंत्रों से ही होगा सीमा पर युद्ध या युद्ध जैसे हालात पैदा होंगे, होली पर चंद्रमा का जन्म दिवस मानते हैं और ऐसी जानकारी है कि महाभारत में भी ऐसा ही ग्रहण योग आया था चंद्र ग्रहण 15 दिन में फिर से दौबारा सूर्य ग्रहण यानि धरती पर रक्तपात महायुद्ध शुरू हो सकता है ,रुस चीन की सीमा पर भूकंप आ सकता है और हवाई दुर्घटनायें चलती रहेगी।अनेक देशों में दुनिया में उपद्रव हिंसा खूनी संघर्ष होगा और भारी संख्या में लोग पलायन करेंगे 🙏🏻 सागर सिमरोल #🌃 तारों संग शुभ रात्रि ✨ #👍All The Best #ज्योतिष #astrology
Sagar Singh
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श्वास रोग अत्यंत कष्टकारी होता है। बहुत सारे लोग इस रोग से पीड़ित हैं और कोई अच्छा उपचार चाहते हैं। ऐसे में हम एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि की बात कर रहे हैं, जिसके बारे में आचार्य वाग्भट ने बहुत स्ट्रॉन्ग स्टेटमेंट दिया है। #🌿आयुर्वेद #😪सर्दी-खांसी का घरेलू इलाज #🌿आयुर्वेदिक नुस्खों पर चर्चा "श्वास और कास यानी पूरी रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट की बीमारियों में बाकी सारी दवाइयाँ एक तरफ, और ये एक औषधि एक तरफ।" अगर आपको सांस फूलने की समस्या है, सूखी या बलगम वाली खांसी रहती है, गले में खराश, बार-बार कफ जमा होना, ब्रोंकाइटिस, पुराना टीबी, निमोनिया के बाद कमजोर फेफड़े, या स्मोकिंग की वजह से सांस की दिक्कत है तो,यह औषधि आपके लिए बहुत गुणकारी है। आचार्य वाग्भट ने अष्टांग हृदय, चिकित्सा स्थान, अध्याय 3 के श्लोक 172 में कहा है— “सर्वेषु श्वासकासेषु केवलं विभीतकी” अर्थात श्वास और कास की सभी बीमारियों में केवल विभीतकी (बहेड़ा) ही पर्याप्त है। इतना बड़ी ख्याति आयुर्वेद में बहुत कम दवाओं के लिए मिलती है। यहां जिस औषधि की बात हो रही है, वह है विभीतकी, जिसे आम भाषा में बहेड़ा कहते हैं। #लाभ ☑️सांस फूलना ☑️सूखी खांसी या कफ वाली खांसी ☑️गले में बार-बार खराश या भारीपन ☑️ब्रोंकाइटिस ☑️स्मोकिंग के बाद सांस की दिक्कत ☑️पुराने टीबी या निमोनिया के बाद कमजोर लंग्स ☑️रात में कफ जम जाना, सुबह गला पूरी तरह भरा हुआ लगना ☑️नाक से ज्यादा पानी गिरना, साइनस की समस्या सेवन विधि ✅ गुड़ के साथ गोली बनाकर बहेड़ा पाउडर एक चुटकी पुराना देसी गुड़ थोड़ा सा दोनों मिलाकर चना दाने जितनी छोटी गोली बना लें। दिन में 4–5 बार, खाने के बाद चूसने की तरह लें। इसे एक बार में निगलना नहीं है, धीरे-धीरे मुंह में घुलने देना है। क्योंकि श्वास रोग में आयुर्वेद बार-बार अल्प मात्रा में औषधि लेने को कहता है। ✅पाउडर + गर्म पानी आधा चम्मच बहेड़ा पाउडर हल्के गुनगुने पानी के साथ खासकर रात में सोने से पहले यह तरीका उन लोगों के लिए खास है जिनका गला रात में बंद हो जाता है और सुबह भारी कफ निकलता है। अब आयुर्वेदिक लॉजिक समझिए श्वास रोग की जड़ कहाँ है? आयुर्वेद के अनुसार श्वास रोग सीधे फेफड़ों से शुरू नहीं होता। सबसे पहले गड़बड़ी होती है: आमाशय (पेट) में अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) कमजोर होती है रस धातु ठीक से नहीं बनती रस धातु का मल = कफ, जो ज़्यादा बनने लगता है यही कफ ऊपर जाकर छाती और लंग्स में जमा हो जाता है यानी अगर पेट ठीक नहीं, तो सांस भी ठीक नहीं। बहेड़ा के आयुर्वेदिक गुण लघु – हल्का, कफ को तोड़ने वाला रूक्ष – अतिरिक्त चिकनाई हटाता है उष्ण – गर्म प्रकृति, वात-कफ शमन विपाक मधुर विपाक – यानी पाचन के बाद शरीर को संतुलन देता है दोषों पर प्रभाव वात को अनुलोमन करता है कफ को विशेष रूप से कम करता है पित्त को संतुलित रखता है धातुओं पर प्रभाव: क्यों फेफड़ों के लिए खास है? विभीतकी का प्रभाव इन धातुओं पर बताया गया है: रस धातु रक्त धातु मांस धातु मेद धातु आयुर्वेद कहता है कि फेफड़ों (फुफ्फुस) की उत्पत्ति रक्त धातु से होती है। जब रक्त धातु शुद्ध और मजबूत होती है, तो लंग्स भी मजबूत होते हैं। बहेड़ा: पाचन सुधारता है रस और रक्त धातु को शुद्ध करता है कफ का एक्सेस प्रोडक्शन रोकता है सीधे नाक से लेकर लंग्स तक काम करता है किन मरीजों में असर सबसे ज्यादा दिखता है? जिनके सीने में भारी कफ भरा रहता है जिनको पीला या सफेद गाढ़ा बलगम निकलता है जिनकी खांसी लंबे समय से ठीक नहीं हो रही जिनको रात में सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होती है ऐसे मामलों में बहेड़ा को आयुर्वेद “मोर देन हाफ ट्रीटमेंट” मानता है। इसे श्वास रोग के लिए बहुत उत्तम माना गया है क्योंकि यह पाचन की जड़ से इलाज करती है कफ को सिर्फ दबाती नहीं, बनने से रोकती है लंग्स, गला, नाक—पूरी रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट पर काम करती है शास्त्रों में इसका स्पष्ट और स्ट्रॉन्ग उल्लेख है इसीलिए आचार्य वाग्भट ने कहा— श्वास रोग में अगर एक औषधि चुननी हो, तो विभीतकी पर्याप्त है। विशेष परिस्थितियों में कुशल वैद्य के परामर्श से ही सेवन करें। #health #ayurveda
Sagar Singh
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किसान देवता कीटनाशकों फफुंदीनाशक बीजोपचार दवाइयां महंगा टानिक खाद उर्वरक फर्टिलाइजर कंपनियों दुकानदारों की चांदी कर रहे हैं माइक्रोन्यूट्रीयंस, मल्टीविटामिन, प्रोटीन जिंक तांबा मेग्निशियम केल्शियम पोटाश गंधक वगैरह वगैरह तो 🙏🏻 सागर सिमरोल की हाथ जोड़कर विनती है कि हर एक पेड़ पौधे को भोजन प्रकाश संश्लेषण क्रिया से ही प्राप्त होता है तभी फूल पत्ती डालियों फलों में वृद्धि होती है अगर सूर्य का प्रकाश पर्याप्त मात्रा में नहीं आता है तो तापक्रम गिरने से जैसे संध्या काल में मच्छरों कीटों की सक्रियता बढ़ जाती है वैसी ही स्थिति बन जाती है जिससे कीटों मच्छरों रसचुषक, इल्लियों आदि का प्रकोप बढ़ जाता है और पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाते हैं तो प्रकाश संश्लेषण क्रिया यानी Photosynthesis की कमी से पौधे पीले रंग के दिखाई देने लगते हैं ।यह प्रकाश तापमान की असंतुलन से ही पैदा हुई है और दुकानों पर प्रकाश संश्लेषण तापमान नहीं बिकता है।गपोटे में जेब खाली नहीं करें थोड़ा बहुत उपयोगी है लेकिन शायद किसानों को धून सवार हो चुकी है रोज रोज उनकी जेब गरम करने की 🙏🏻 सागर सिमरोल #kisan #farmer #Agriculture #किसान #कृषि
Sagar Singh
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*"अनपेक्ष: शुचिर्दक्ष: उदासीनो गतव्यथ: ।""* जो न ही किसी व्यक्ति वस्तु स्थिति स्थान पर आश्रित है कि उसकी यह अपेक्षा कामना पूरी हो इनसे और जो अंदर बाहर से शुद्ध रहता है अर्थात मन बुद्धि चित्त अहंकार और शरीर का शौच करने में दक्ष है, अपने कर्म स्वभाव व्यवहार आचरण में मन को निर्मल योग्य प्रसन्न संतुष्ट संतुलित संयमित रखना जानता है अर्थात दक्ष है, उदासीन न चिपकता है किसी व्यक्ति वस्तु स्थिति स्थान परिस्थितियों में न घृणा अकड़ पकड़ में उलझता है अर्थात कोई ऋण धन इलेक्ट्रॉन विन्यास नहीं है उदासीन है तटस्थ है साक्षी भाव में स्थित है जैसे टाकिज सिनेमा हॉल में फिल्म में सब प्रकाश के पर्दे पर पट्टी में से गुजर कर जो जीवंतता है उसे मृत पट्टी में प्रकाश डाला गया है इसलिए जीवित दिखाई देता है यह अनोखा भ्रम पैदा किया गया है उसे मृत पट्टी जानकर उसमें अच्छा दृश्य बुरा दृश्य समझकर बंधता नहीं है उदासीन है और वह गतव्यथ: है अर्थात कोई भी सत्यता को स्वीकार नहीं किया सरकने वाले संसार की तो उसकी असर दिलो-दिमाग में कैसे टिकेगी मतलब वह सदा सदा के लिए व्यथा मुक्त हो जाता है गतव्यथ: है इसीलिए भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि हे अर्जुन- प्रसादे सर्व दुखानाम् हानि रस्योपजायते। इस असत् संसार को सत्य समझकर बंधता क्यों है इसे क्षणभंगुर नाशवान समझकर सदैव पुर्ण प्रसन्न संतुष्ट हो जा स्थितप्रज्ञ अर्थात प्रज्ञा को बराबर सत्य में स्थित करके कर्म कर मुझ परमेश्वर परमसत्य में जुड़ कर योगी हो जा। संतुष्ट: सततम् योगी अशांतस्य कुत: सुखम्। हे अर्जुन*" जिस काल में तेरी बुद्धि इस लोक और परलोक में सुने हुए और सुनने में आने वाले समस्त भोगों से भलीभांति वैराग्य को प्राप्त हो जायेगी उस काल में समय में तु मुझमें ही वास करेगा।""* श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा - संसृत मूल सूलप्रद नाना। संसृत - सरकने वाला क्षणिक इंद्रिय तृप्ति सुख संपत्ति वैभव सफलता का संसार जो मन में सुक्ष्म शरीर में बैठा है नाशवान का भरोसा अस्थाई आभासी दुनिया को स्थाई समझने का भ्रम पैदा हो गया है वहम वो संसार है, माया मात्रम् मनोमयम् है।दुसरी चौपाई में - जानहूं तबहीं जीव जग जागा।जब सब विषय विलास बिरागा। सुमति क्षुधा बाढहीं नित नई। विषय आस दुर्बलता गई।। श्री रामचरितमानस 🙏🏻 #भक्ति दर्शन #krishna #bhakti #🪐तत्वज्ञान #Gyan
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