Follow
vijay
@423838837
944
Posts
3,211
Followers
vijay
773 views
4 months ago
कालिदास, सच-सच बतलाना! इंदुमती के मृत्युशोक से अज रोया या तुम रोए थे? कालिदास, सच-सच बतलाना! शिवजी की तीसरी आँख से निकली हुई महाज्वाला में घृत-मिश्रित सूखी समिधा-सम कामदेव जब भस्म हो गया रति का क्रंदन सुन आँसू से तुमने ही तो दृग धोए थे? कालिदास, सच-सच बतलाना! रति रोई या तुम रोए थे? वर्षा ऋतु की स्निग्ध भूमिका प्रथम दिवस आषाढ़ मास का देख गगन में श्याम घन-घटा विधुर यक्ष का मन जब उचटा खड़े-खड़े तब हाथ जोड़कर चित्रकूट से सुभग शिखर पर उस बेचारे ने भेजा था जिनके ही द्वारा संदेशा उन पुष्करावर्त मेघों का साथी बनकर उड़ने वाले कालिदास, सच-सच बतलाना! पर पीड़ा से पूर-पूर हो थक-थक कर औ' चूर-चूर हो अमल-धवलगिरि के शिखरों पर प्रियवर, तुम कब तक सोये थे? रोया यक्ष कि तुम रोए थे! कालिदास, सच-सच बतलाना! स्रोत :पुस्तक : नागार्जुन रचना संचयन (पृष्ठ 64) संपादक : राजेश जोशी रचनाकार : नागार्जुन प्रकाशन : साहित्य #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ ##️⃣DilShayarana💘 #💞Heart touching शायरी✍️ #✍मेरे पसंदीदा लेखक #विजय पाल
vijay
885 views
4 months ago
सुनो ना..!! आज "आप" बताएं, "आपके" लिए क्या ख़ास लिखूँ.. फरियाद लिखूँ..या जज़्बात लिखूँ, इश्क़ लिखूँ..या प्यार लिखूँ... "आपको" अपना लिखूँ, या.. ख़ुद को "आपका" लिखूँ... "आपके" साथ अपनी ज़िन्दगी लिखूँ, या.."आपको" ही ज़िन्दगी लिखूँ.. आने वाला कल लिखूँ, या..गुज़रा हुआ पल लिखूँ.. बताएं...आज "आपके" लिए क्या ख़ास लिखूँ..!!😊 ✍️✍️💞💞 #विजय पाल #✍मेरे पसंदीदा लेखक #💞Heart touching शायरी✍️ ##️⃣DilShayarana💘 #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️
vijay
690 views
5 months ago
प्रेम हमारा शाश्वत है, जैसे आदि-अनंत सनातन, शाश्वती नाम तुम्हारा, जैसे सृष्टि का पावन अभिनंदन। मैं विजय, हूँ पूर्ण तुमसे, यह मेरा जीवन अर्पण है, तुम आधार हो इस कुटुंब का, तुम ही मेरी भक्ति हो। ​विक्रम संवत का यह सूरज, नई रश्मियाँ लाया है, चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा ने, नव-श्रृंगार सजाया है। ​जैसे प्रकृति खिलती है, नई कोपलों की मुस्कान लिए, वैसा ही हर्ष रहे जीवन में, माँ शक्ति का वरदान लिए। ​तुमसे ही घर आँगन महके, तुमसे ही पूर्ण ये जीवन है, नव वर्ष की मंगल बेला में, तुमको सादर अर्पण है। ​तुम ही मेरी शक्ति हो, मेरे कर्मों का शुभ फल तुम, इस पावन बेला में, विजय की बस तुम ही हो साथी। ​शाश्वती, तुम्हें यह नव संवत्सर मंगलमय और सुखकारी हो, ईश्वर की असीम अनुकंपा, हम पर सदा भारी हो। ​ ​"मेरी सहचरी, शाश्वती, और हमारे जीवन के हर एक विजय की गवाह। आपको और हमारे पूरे परिवार को सनातन नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ! ईश्वर हमारा साथ ऐसे ही बनाए रखे। 🚩🙏💖" #विजय पाल #📖 कविता और कोट्स✒️ #✍मेरे पसंदीदा लेखक #💞Heart touching शायरी✍️ ##️⃣DilShayarana💘
vijay
513 views
5 months ago
जब कोई अपना अचानक जीवन से विदा हो जाता है तो भीतर का समूचा संतुलन डगमगा उठता है-- उस क्षण ज्ञान के सारे सूत्र, धैर्य के सारे उपदेश और साधना की सारी दृढ़ता जैसे मौन हो जाते है क्युँकि हृदय का जो कोमल कोना अपनों के प्रेम से बँधा होता है!- ___ वहाँ तर्क नही केवल संवेदनाएँ निवास करती है इसलिए किसी अपने के जाने का दुःख-- अध्यात्म की ऊँचाइयों पर बैठे व्यक्ति को भी भीतर से तोड़ देता है और बता देता है कि आत्मा चाहे कितनी ही विरक्त क्यों न हो जाए हृदय फिर भी अपनेपन के बंधन से पूरी तरह मुक्त नहीं होता!- ____ इसे नार्मल शब्दों मे कैसे लिखूं मै?- मुझे समझ नहीं आ रहा परंतु एक लम्बा समय या संवेदनशील व्यक्ति के साथ बिताया समय और फिर उसमे अलगाव - बस वही क्षण परिपक्व व्यक्ति को भी तोड़ देता है - मालुम है समय सब कुछ ठीक कर देता है - पर मै समझती हूँ की हम ही उन पीड़ाओ के साथ एडजस्ट कर लेते है - और फ्रंट मे सबको कहते चलते है :- "स्वस्थ हो गए " एवं मुस्कान चेप देते है साथ मे!- _____ वास्तव मे स्वस्थ होते भी है क्या? इसका जवाब आपको देना है - जो पढ़ रहे है, मुझे जानना है!- _____ ©® स्मिता सिन्हा #☝आज का ज्ञान #🌸पॉजिटिव मंत्र #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📖 कविता और कोट्स✒️ #विजय पाल