आमलकी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इसे अमला एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और आंवले के वृक्ष का पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. काशी में इसी दिन से होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है, इसलिए इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.
मान्यता है कि आमलकी एकादशी के दिन ही आंवले के पेड़ का प्राकट्य हुआ था. इस दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है. इसलिए भक्त इस दिन पेड़ की पूजा करते हैं और आंवले का फल भगवान को अर्पित करते हैं. कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को वरदान दिया था कि आंवला उन्हें अत्यंत प्रिय होगा.
जो व्यक्ति श्रद्धा से आंवले के पेड़ की पूजा करेगा और उसका फल अर्पित करेगा, उसके पाप नष्ट होंगे और जीवन की परेशानियां दूर होंगी.
पद्म पुराण के अनुसार, पुराण में वर्णित विधिपूर्वक यह व्रत करने से समस्त यज्ञों की अपेक्षा अधिक फल प्राप्त होता है।
आमलकी एकादशी पर कथा का पाठ करने से सहस्त्र गौदान के समान फल मिलता है.
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