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K. VISHVAKARMA
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K. VISHVAKARMA
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3 days ago
""कुछ लोग सोशल मीडिया पर भाजपा की खिल्ली उड़ाते हुए लिख रहे हैं" कि इस बार भाजपा बंगाल तो हारेगी ही हारेगी..! तो, भाई... बात ऐसी है कि भाजपा बंगाल हारे या जीते भाजपा को झाँ%$ कोई फर्क नहीं पड़ता है. क्योंकि, अगर भाजपा बंगाल हारती है तो उसका कुछ नहीं जाना है क्योंकि कौन सा बंगाल में उनकी सत्ता है जो चली जायेगी. और, अगर जीत गई तो कौन सा मोदी या शाह को बंगाल का मुख्यमंत्री बन जाना है. हाँ... भाजपा के बंगाल जीतने या हारने से बंगाल के हिंन्दुओ को जरूर फर्क पड़ना है. जैसे कि, केंद्र में भाजपा के आने से हमें राम मंदिर मिला, आर्टिकल 370 हटा, हज सब्सिडी आदि हटा, देश की सेना मजबूत हुई, आतंकवाद और नक्सली खत्म हुए आदि-आदि. उसी तरह... भाजपा के यूपी जीतने से हमें योगी आदित्यनाथ जैसे मुख्यमंत्री मिले, अतीक-मुख्तार और विकास दुबे जैसे गैंगस्टरों से आजादी मिली.. महिलाओं और बच्चियों को सुरक्षा मिली.. अच्छी सड़क और विकास की परियोजनाएं मिली. इसके अलावा असम-MP आदि के बारे में जानते ही हैं. इसके अलावा एक और उदाहरण है कि जब दिल्ली में केजरीवाल के शासनकाल में शाहीन बाग और खिसान आंदोलन आदि हुआ करते थे तो उससे मोदी और शाह को परेशानी होती थी या आम जनता को ?? लेकिन, दिल्ली में सत्ता बदलते ही ये सब आंदोलन-फान्दोलन खत्म हो गए तो इससे आराम मोदी और शाह को है... या, हम और आप जैसे आम जनता को ? वैसे भी, बंगाल में आज जो बांग्लादेशी और रोहिंग्या का उपद्रव है, कट मनी सिस्टम है... वो मोदी और शाह के लिए है या हम और आप जैसे सामान्य लोगों के लिए ?? इसीलिए, जब कोई ये धमकी देता है कि हम बंगाल हरवा देंगे, यूपी हरवा देंगे या दिल्ली हरवा देंगे तो उसे पढ़कर हँसी आने के साथ-साथ उनकी सोच पर दया भी आती है.. क्योंकि, उनकी ऐसी सोच देखकर मुझे अकबर के दरबारी मानसिंह और जयचंद आदि की याद आने लगती है... जो अपने समय में यही बोला करते थे कि इस बार तो पृथ्वीराज चौहान को हरवा देंगे काहे कि उसने ऐसा क्यों किया... अथवा, मानसिंह की वो कुत्सित हंसी याद आती है कि इस बार तो महाराणा प्रताप को इस तरह युद्ध में हरवा देना है. या फिर, ऐसी भाषा मुझे राजा रतन सिंह के संगीतकार राघव चेतन की याद दिलाती है जो अलाउद्दीन खिलजी से मिलकर रानी पद्मिनी समेत 16000 हिन्दू महिलाओं को जौहर के लिए विवश इसीलिए कर दिया था क्योंकि महाराज रावल रतन सिंह ने उसकी मनमानी पर आपत्ति की थी. इसीलिए, हमको ये सब मत सुनाया करो कि आप किसको सबक सिखा दोगे और किसको नहीं. क्योंकि, लोकतंत्र में सबक सत्ताधीश नहीं बल्कि जनता सीखा करती है. जैसे कि, सपा की सरकार में यूपी की जनता सबक सीखती थी और खांग्रेस के शासन में असम की जनता. यूपी में हमारे टोंटी भैया के हारने से ही उनका क्या बिगड़ गया ? हमारे टोंटी भैया तो पहले भी फॉर्च्यूनर और हेलीकॉप्टर पर चलते थे और आज भी चल ही रहे हैं. उसी तरह मोदी और शाह आज भी SPG प्रोटेक्शन में फॉर्च्यूनर और BMW से चलते हैं और हारने के बाद भी इसी प्रोटेक्शन में और इसी गाड़ी में चलेंगे. हाँ, सत्ता बदलने के बाद हम और आप भले मोटरसाइकिल से साइकिल पर न आ जाएं... और, ज्यादा टाँय-टाँय करने पर किसी अंसारी, खान या असलम अथवा जादो के हत्थे न चढ़ जाएँ. चिंता सिर्फ इस बात की होती है. लेकिन, इतनी समझ होगी कहाँ से ? आखिर, हमारे बड़े बुजुर्ग कुछ सोच कर ही तो ये कह गए हैं कि... जब नाश मनुज पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है. जय महाकाल!!!🚩🚩💕 #🙏PM मोदी के फैन 🇮🇳 #🚩मोदी फैन 🚩 #मेरा देश मेरी शान
K. VISHVAKARMA
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9 days ago
🚩 *शास्त्र📜 शस्त्र⚔️* *प्रतिदिन पूजन करे* ⚔️⚔️⚔️⚔️⚔️⚔️ 🗞️ *जहां पर आम आदमी सोचना बंद कर देता है वहां से मोदी जी की सोच शुरू होती है* *एसपी कॉलेज में कुछ समय पहले संपन्न हुए रामरक्षा पठन कार्यक्रम में अभिनेता राहुल सोलापुरकर ने एक ऐसी कहानी सुनाई जो कोई नहीं जानता।* *कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद जब अयोध्या के राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ, तो उसी क्षेत्र में रामलला की मूर्ति को एक अस्थायी मंदिर में स्थानांतरित किया जाना था। इसके लिए जो मुहूर्त निर्धारित किया गया था 25 मार्च 2020 का। ठीक उसी दौरान संपूर्ण भारत में कोरोना शुरु हो गया था। इस कारण कोई भी राम लला की शोभा यात्रा में सहभागी नहीं हो सकता था और राम लला को गाजे-बाजे के साथ ले न जा सकने के कारण योगी आदित्यनाथ चिंतित थे।* *उन्होंने मोदीजी को फोन किया और कहा कि रामजी की शोभायात्रा जोरदार चाहिए, तब मोदीजी ने कहा कि वह इसे देख लेंगे और वह दिन था 25 मार्च 2020, गुड़ीपड़वा का। उस दिन देश के सभी लोगों से थाली, घंटा नाद करने के लिए कहा गया तथा भगवान के पास दिया जलाने के लिए कहा गया।* *कोई नहीं जानता था कि ऐसा क्यों बताया गया, और इसी बीच योगी आदित्य नाथ स्वयं राम लला की मूर्ति को अपने सिर पर रख कर 5 महंतों और 3-4 सुरक्षा गार्डों के साथ 1.3 किमी पैदल चल कर गये और मूर्ति को स्थानांतरित किया। तब संपूर्ण देशवासी थाली बजा रहे थे, किन्तु किसी को भी इसकी धुंधली सी भी कल्पना नहीं थी। बाद में मोदीजी ने आदित्यनाथ से कहा कि अयोध्या में भी 100 करोड़ लोगों को साथ लेकर इतने बाजे-गाजे के साथ शोभायात्रा निकाली जा सकती थी क्या !* *विशेष बात ये है कि इसमें आस्तिक और नास्तिक सभी थालियाँ बजा रहे थे।* *जय जय श्री राम 🕉️🚩🌹🙏🏻* 🚩🚩👏👏 -------------------- 🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈 #🚩मोदी फैन 🚩 #🙏PM मोदी के फैन 🇮🇳 #मेरा देश मेरी शान
K. VISHVAKARMA
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13 days ago
🌞🕉️🌞 🚩 *शास्त्र📜 शस्त्र⚔️* *प्रतिदिन पूजन करे* ⚔️⚔️⚔️⚔️⚔️⚔️ 🚩 साइबर फ्रॉड पर सुरक्षा का विचार 🌈 1 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन पेमेंट करने का तरीका बदल जाएगा, OTP डालने का तरीका बदल जाएगा, और अपने बैंक अकाउंट को सुरक्षित रखने का तरीका भी पूरी तरह बदल जाएगा। 1) 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला पहला नियम डायनामिक टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन है। - इसका मतलब है कि अब आपका हर पेमेंट चेक किया जाएगा कि वह कहाँ से हो रहा है। 2) दूसरा नियम यह है कि आप बैंकिंग ऐप में स्क्रीनशॉट या स्क्रीन रिकॉर्डिंग नहीं ले पाएंगे। यह पूरी तरह से बैन हो जाएगा। - ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि स्कैमर किसी भी डेस्क के ज़रिए आपकी स्क्रीन रिकॉर्ड करते हैं और वहीं से वे OTP पता कर लेते हैं, पासवर्ड पता कर लेते हैं और आपके मोबाइल को ऑपरेट करके आपके पैसे निकाल लेते हैं। 3) तीसरा नियम यह है कि आप रात के समय होने वाले ट्रांज़ैक्शन को लॉक कर सकते हैं। इसका मतलब है कि बैंकों ने अपने एप्लीकेशन में यह नियम बनाया है कि अगर आप चाहें तो रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक अपने ट्रांजैक्शन को लॉक कर सकते हैं। - इस दौरान कोई भी आपके अकाउंट से एक भी रुपया नहीं निकाल पाएगा। 4) चौथा नियम यह है कि जैसे ही आप कोई फ्रॉड ऐप या मैलवेयर डाउनलोड करेंगे, आपको वॉर्निंग दी जाएगी। 5) पांचवां नियम यह है कि ओटीपी सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। - इसका मतलब है कि एसएमएस से ओटीपी बैन हो जाएगा। आप जिस एप्लीकेशन या बैंकिंग ऐप का इस्तेमाल करेंगे, उसमें आपको ओटीपी मिलेगा। 6) छठा नियम यह है कि आपसे हर ट्रांजैक्शन पर एक्स्ट्रा सवाल पूछे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप 2000 रुपये का ट्रांजैक्शन करते हैं और अचानक 2000 रुपये कट जाते हैं। आपके अकाउंट से 50,000, Rs.100,000 या इससे ज़्यादा पैसे निकलते हैं, तो आपसे पूछा जाएगा कि आपकी माँ का नाम क्या है, आपने किस स्कूल में पढ़ाई की है, या आपने जो भी सिक्योरिटी सवाल डाले हैं, वे पूछे जा सकते हैं। अगर आप सही जवाब देते हैं, तो समझ जाएगा कि आप ऐसा कर रहे हैं। नहीं तो, बैंक को नोटिफ़िकेशन मिल जाएगा कि स्कैमर हो सकते हैं। 7) सातवाँ नियम है बिहेवियर बायोमेट्रिक्स। इसका मतलब है कि आपका बैंकिंग ऐप आपके टाइप करने के तरीके, आपकी टाइपिंग की स्पीड और आप अपनी स्क्रीन को कैसे हैंडल कर रहे हैं, इससे कन्फ़र्म करेगा कि आप वहाँ हैं या नहीं। 8) आठवाँ और आख़िरी नियम है आधार और बायोमेट्रिक्स। अगर आप बैंकिंग ऐप से बड़ी रकम का ट्रांज़ैक्शन करते हैं, Rs. 5,00,000, Rs.8,00,000, Rs. 10,00,000, तो आपका आधार लिंक, फ़िंगरप्रिंट या फ़ेस स्कैन पूछा जाएगा। - इसके बिना आप कोई पेमेंट नहीं कर पाएंगे। दोस्तों, इस जानकारी को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के साथ शेयर करें। खुद को और दूसरों को भी जागरूक करें। 🔥डिजिटल अरेस्ट और बैंकिंग स्कैमर्स से सावधान रहें। जय हिंद। जय भारत। 🙏 🚩🚩👏👏 ------------------- 🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट
K. VISHVAKARMA
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17 days ago
**देशों द्वारा अपने नागरिकों पर लगाए* *गए ईंधन संबंधी प्रतिबंध:* * **1. जर्मनी* *कमी को नियंत्रित करने के लिए* *जर्मनी प्रति लेनदेन पेट्रोल की खरीद** *को लगभग 10 लीटर तक* *सीमित करता है।* *2. फ्रांस* *फ्रांस, श्रीलंका की तरह क्यूआर कोड* *ईंधन राशनिंग प्रणाली का उपयोग करता है, जिसके तहत प्रति* *वाहन प्रति सप्ताह लगभग 15-20 लीटर ईंधन की अनुमति होती* *है।* *3. यूनाइटेड किंगडम* *ईंधन की खपत कम करने के लिए* *यूनाइटेड किंगडम में मोटरवे* *पर गति सीमा कम (लगभग* *60 मील प्रति घंटा) लागू* *है।* *4. इटली* *ईंधन की बचत के लिए इटली सप्ताह में दो दिन पेट्रोल पंप बंद रखता है।* *5. यूरोपीय संघ* *यूरोपीय संघ पेरिस और बर्लिन जैसे* *शहरों में रविवार को कारों के* *लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित* *करता है।* *6. बांग्लादेश* *बांग्लादेश में प्रतिदिन 5 घंटे* *का* *ब्लैकआउट होता है, और सेना* *ईंधन डिपो की सुरक्षा करती* *है।* *7. श्रीलंका* *श्रीलंका क्यूआर कोड के माध्यम से ईंधन का राशनिंग करता है (लगभग * 15 लीटर प्रति सप्ताह)* *और हर बुधवार को संस्थानों को बंद* *रखता है।* *8. न्यूजीलैंड* *न्यूजीलैंड ने सप्ताह में एक बार फिर* *कार-मुक्त दिवसों की शुरुआत* *की है।* *9. स्लोवाकिया* *स्लोवाकिया ईंधन की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए कोटा लागू* *करता है।* *10. म्यांमार* *म्यांमार में पेट्रोल की कमी के कारण पेट्रोल पंप बंद होने की आशंका है।* *11. कंबोडिया* *कंबोडिया ने अपने लगभग एक तिहाई पेट्रोल पंप बंद कर दिए हैं।* *12. मिस्र* *मिस्र में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था बंद करके बिजली की खपत में* *कटौती की जा रही है।* *14. पाकिस्तान* *पाकिस्तान में प्रति वाहन पेट्रोल की* *खरीद लगभग 5 लीटर तक* *सीमित है। वहीं* *भारतः* *कोई पाबंदी नहीं, कोई प्रतिबंध नहीं,* *पूरी आजादी।* *एक व्यक्ति की वजह से, जिसे* *तानाशाह कहा जाता है। प्रधानमंत्री* *नरेंद्र दामोदरदास* *मोदी !!* #मेरा देश मेरी शान #🚩मोदी फैन 🚩 #मेरे विचार👈 #🙏PM मोदी के फैन 🇮🇳 #पॉलिटिक्स
K. VISHVAKARMA
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18 days ago
एक आदमी अपने बंदर के साथ नाव में सफ़र कर रहा था। नाव पर दूसरे पैसेंजर के साथ एक फ़िलॉसफ़र भी था। बंदर ने पहले कभी नाव में सफ़र नहीं किया था, इसलिए उसे आराम महसूस नहीं हो रहा था। वह इधर-उधर घूम रहा था, चिल्ला रहा था, नाविक समेत किसी को भी शांत नहीं बैठने दे रहा था। नाविक इससे परेशान था और उसे चिंता हो रही थी कि पैसेंजर के घबराने से नाव डूब जाएगी। *अगर बंदर शांत नहीं हुआ, तो वह नाव डुबो देगा।* आदमी इस हालात से परेशान था, लेकिन उसे बंदर को शांत करने का कोई तरीका नहीं मिल रहा था। फ़िलॉसफ़र ने यह सब देखा और मदद करने का फ़ैसला किया। उसने कहा: "अगर आप इजाज़त दें, तो मैं इस बंदर को घरेलू बिल्ली की तरह शांत कर सकता हूँ।" वह आदमी तुरंत मान गया। दो पैसेंजर की मदद से, फ़िलॉसफ़र ने बंदर को उठाया और नदी में फेंक दिया। बंदर तैरने लगा ताकि वह बचकर ज़िंदा रहे। वह अब लगभग मर रहा था और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। कुछ देर बाद, फिलॉसफर ने बंदर को वापस नाव में खींच लिया। बंदर शांत हो गया और एक कोने में जाकर बैठ गया। बंदर के बदले हुए बर्ताव से वह नाविक और सभी यात्री हैरान थे। उस नाविक ने फिलॉसफर से पूछा: "पहले वह ऊपर-नीचे कूद रहा था। अब वह पालतू बिल्ली की तरह बैठा है। क्यों?" फिलॉसफर ने कहा: "जब मैंने इस बंदर को पानी में फेंका, तो उसे पानी की ताकत, अपनी जान की कीमत और नाव की उपयोगिता समझ में आई।" जो लोग भारत में हर बात पर उछल-कूद कर बुराई कर रहे हैं, कमेंट कर रहे हैं, विरोध कर रहे हैं, उन्हें 6 महीने के लिए नॉर्थ कोरिया, अफगानिस्तान, सोमालिया, साउथ सूडान, सीरिया, इराक, फिलिस्तीन, पाकिस्तान, श्रीलंका या चीन भेज देना चाहिए, फिर वे भारत आकर अपने आप पालतू बिल्ली की तरह शांत हो जाएंगे और देश को आगे बढ़ने देंगे। 'भारत' का गलत इस्तेमाल करने और उसे बदनाम करने वाले लोगो को समर्पित। 🇮🇳🚩 #पॉलिटिक्स #मेरे विचार👈 #🚩मोदी फैन 🚩 #मेरा देश मेरी शान
K. VISHVAKARMA
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18 days ago
*प्रोपेगंडा फ़िल्में क्या होती हैं, इसकी एक झलक देखिए।* 2000 में लाल क़िले पर हमला होता है। 2001 में संसद और अमरनाथ यात्रा पर आतंकवादी हमले होते हैं। 2002 में दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर पर हमला होता है। 2003 में मुंबई में बम विस्फोट होते हैं। *पूरे देश में इन घटनाओं को लेकर गुस्सा और आक्रोश है। ऐसे समय 2004 में फिल्म **“मैं हूँ ना”** *आती है। फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि असली दुश्मन पाकिस्तान या जिहादी आतंकवादी नहीं, बल्कि सेना के कुछ कट्टर और पुराने सोच वाले अधिकारी हैं, जो हिंदू-मुस्लिम भाईचारे से चिढ़ते हैं और शांति प्रक्रिया को बिगाड़ते हैं।* इसके बाद भी घटनाएँ जारी रहती हैं— 2005 में दिल्ली में बम धमाके होते हैं। 2006 में काशी और मुंबई लोकल ट्रेन में विस्फोट होते हैं। 2007 में समझौता एक्सप्रेस और हैदराबाद में बम धमाके होते हैं। 2008 में दिल्ली, जयपुर और अहमदाबाद में बम विस्फोट होते हैं। *उसी दौर में फिल्म * *“माय नेम इज़ खान”** *आती है, जिसमें यह संदेश दिया जाता है कि लोगों का गुस्सा इसलिए है क्योंकि “खान” उपनाम वाले लोगों को दुनिया गलत तरीके से आतंकवादी समझती है और उनके साथ भेदभाव करती है।* इसी सूची में **“हैदर”**, **“फना”** जैसी फिल्मों बनाई गई इन फिल्मों में बताया जाता है लोग आतंकवाद की ओर सेना की कार्रवाई या राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ते है इनका धर्म, जिहाद, आजाद कश्मीर या पाकिस्तान से कोई रिश्ता नहीं है ! *जागरूक बनिए और अपनी सुरक्षा के लिए बेहतर सरकार के साथ-साथ खुद को भी मजबूत कीजिए।* शत्रुबोध को जगाए। दुष्प्रचार से सावधान रहे। अपने असली नायकों को पहचाने। कट्टर सनातनी बने। *अपने देश में शांति से रहना है तो ये सब करना ही एकमात्र विकल्प है।* 🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🕉️🇮🇱🇮🇳 #मेरे विचार👈 #🚩मोदी फैन 🚩 #🙏PM मोदी के फैन 🇮🇳
K. VISHVAKARMA
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18 days ago
इसे कहते हैं "आपदा में अवसर" मिलना ‼️ पर इस बार पासा उल्टा पड़ गया और गैस माफियाओं का बरसों पुराना काला खेल बेनकाब हो गया...‼️ भारत में वर्तमान में एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकार ने भविष्य की सुरक्षा और आपूर्ति को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए सावधानीवश गैस रिफिल बुकिंग हेतु 25 दिनों की समय सीमा निर्धारित कर दी है‼️ सरकार का उद्देश्य प्रबंधन सुधारना था, किंतु इस नियम के लागू होते ही देश भर की गैस एजेंसियों पर मची अफरातफरी ने एक बहुत बड़े घोटाले की कलई खोलकर रख दी है‼️ सच्चाई यह है कि गैस एजेंसी मालिकों ने एक व्यवस्थित सिंडिकेट बना रखा था। ये लोग आम घरेलू उपभोक्ताओं के नाम पर, उनकी जानकारी के बिना ही स्वयं घरेलू गैस रिफिल बुक कर लेते थे और उन सिलेंडरों को ऊंचे दामों पर होटल, रेस्टोरेंट और औद्योगिक इकाइयों जैसे व्यावसायिक संस्थानों पर 'ब्लैक' में बेच रहे थे‼️ जब तक बुकिंग की कोई समय सीमा नहीं थी, उपभोक्ता को पता ही नहीं चलता था कि उसके हिस्से की गैस कहीं और बेची जा चुकी है। किंतु अब जैसे ही 25 दिन की शर्त लागू हुई, और जब वास्तविक उपभोक्ता ने अपना सिलेंडर बुक करने का प्रयास किया, तो सिस्टम ने "Already Booked" दिखाकर बुकिंग रिजेक्ट कर दी‼️ उपभोक्ता हैरान और परेशान कि उसने तो काफी समय यानि विगत एक महीने से सिलेंडर लिया ही नहीं तो फिर यह बुकिंग रिजेक्ट कैसे हो गई...⁉️ उपभोक्ता पैनिक होकर गैस एजेंसियों के बाहर बुकिंग अथवा सिलेंडर के लिए लाईन लगाकर खड़े हो गए...‼️ ऐसी स्थिति में एजेंसी मालिक मुंह छिपाकर भागने लगे या वहां हंगामा खड़ा होने लगा...! क्यों...⁉️ क्योंकि गैस कंपनियों के सिस्टम/सर्वर पर उपस्थित डाटा के अनुसार उपभोक्ता के सिलेंडर को तो गैस एजेंसी मालिकों ने बेच कर खा लिया था ‼️ यह स्पष्ट है कि भारत में गैस की कोई किल्लत नहीं है, बल्कि यह कृत्रिम संकट इन बिचौलियों यानि गैस एजेंसी मालिकों की काली करतूतों का परिणाम है। सरकार के इस एक निर्णय ने घरेलू गैस की अवैध बिक्री के इस बड़े रैकेट को सार्वजनिक कर दिया है‼️ यदि आप भी इस समस्या से त्रस्त हैं या आपके नाम पर भी घरेलू गैस सिलेंडर की अवैध बुकिंग करके गायब कर दी गई है, तो चुप न बैठें और तुरंत संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराएं‼️ शिकायत दर्ज करने हेतु महत्वपूर्ण नंबर: * MOPNG हेल्पलाइन (LPG): 1906 (24/7 आपातकालीन और शिकायत सेवा) * भारत गैस (Bharat Gas): 1800-22-4344 * इंडेन (Indane): 1800-233-3555 * एचपी गैस (HP Gas): 1800-233-3555 * राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन: 1800-11-4000 या 1915 जागरूक बनें और इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी आवाज उठाएं‼️ जय हिंद जय भारत 💪💪 #🙏PM मोदी के फैन 🇮🇳 #पॉलिटिक्स #मेरे विचार👈 #🚩मोदी फैन 🚩 #मोदी फैन क्लब 👌
K. VISHVAKARMA
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21 days ago
भीम का पुत्र #घटोत्कच, एक अर्ध-राक्षस। वह दूसरों की तरह युद्ध के मैदान में योद्धा नहीं था। उसने कर्ण को अपने मुख्य हथियार (शक्ति) का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया, जिसे कर्ण ने अर्जुन के लिए संरक्षित किया था। शक्ति को नष्ट करने और अर्जुन को बचाने के लिए कुरुक्षेत्र युद्ध में घटोत्कच्छ की ही उपयोगिता थी। उसी तरह अभिमन्यु एक अर्ध-प्रशिक्षित योद्धा था। श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में नियम तोड़ने के लिए उनका इस्तेमाल किया था। आप वर्दी में सैनिक हैं या बिना वर्दी के, धर्मयुद्ध में सभी की भूमिका है.... कहानी... कुछ यूँ है कि एक मियाँभाई घर के दरवाज़े पर बहुत महँगा पर्दा लगाकर रखते थे। अंदर सब खोखला था, लेकिन परदा बहुत महँगा था। मोहल्ले के लोग समझते कि मियाँभाई बहुत धनी व्यक्ति हैं। एक पठान से क़र्ज़ लिया हुआ था। पठान अक्सर आता व पैसे वापिस माँगता। मियाँभाई दे न पाते। कई बार ऐसा होने के बाद एक दिन पठान बहुत चिल्लाया, और चिल्लाते हुए बोला कि, पैसे लौटाते नहीं हो और पर्दा इतना महँगा टांगा हुआ है ?? मैं इसी को ले जाता हूँ ! और एक क्षण का भी समय दिए बिना परदा खींच लेता है। पूरा मोहल्ला इकट्ठा था। लोग देखते हैं कि आँगन में मियाँभाई के परिवार की महिलायें अत्यधिक फटे पुराने कपड़ों में एकत्र होकर पठान की गालियाँ सुन रही थीं। जो भी दृश्य दिखा, अत्यधिक दरिद्रता का था। पठान को भी इतनी ग्लानि हुई कि पर्दा वहीं छोड़कर चला गया। लेकिन मियाँभाई ने भी परदा वापिस टांगा नहीं, क्यूँकि कुछ छुपाने को बचा ही नहीं था अब। कॉंग्रेस पोषित मीडिया द्वारा पाकिस्तान के न्यूक्लियर अटैक का डर हमें इसीलिए दिखाया जाता रहा ताकि हम कभी आतंक के विरुद्ध कोई कार्रवाई न कर सकें, क्योंकि कार्रवाई करने से भारत में वोट बैंक वाले भाईजान लोग नाराज़ होकर फिर वोट नहीं देते काँग्रेस को ! न्यूक्लियरअटैक कोई गिल्ली डंडे का खेल नहीं है। प्रथम तो भारत ही पाकिस्तान को मिटा देगा। दूसरे, पश्चिमी देशों में ये सब वारगेम हो चुके हैं कि 1. पाकिस्तान ने भारत पर न्यूक्लियर अटैक किया तो या 2. ईरान ने इजरायल पर न्यूक्लियर अटैक किया तो, पूरी दुनिया से तुरंत माफ़िया गैंग का नामोनिशान मिटा देना है। रैबीज के वाइरस कैरी करना अलग बात है, रैबीज का अटैक हो चुके कुत्ते को सीधे गोली मारी जाती है। ना पश्चिम के वामी कुछ कर पाएँगे, न मानवाधिकार वाले, न मीडिया, ना धिम्मी। तो हुआ यूँ कि मोदी ने दो सर्जिकल स्ट्राइक करके मियाँभाई के दरवाज़े से परदा खींच दिया है। अंदर की पूरी दरिद्रता, पूरा खोखलापन सामने है। ब्लैक आउट किए बैठे हैं मियाँभाई, सो नही पा रहे हैं, पता है कि कुछ भी किया तो ये मोदी है, फिर ठोकेगा। गाँव में बुज़ुर्ग कहते थे कि किसी बात को अधिक लम्बा कभी मत खींचो। मियाँभाई ने एक रोज़ धमकी दी-न्यूक्लियर अटैक कर दूँगा। मोदी ने परदा झटक कर फेंका और बोला, "आ, कर के दिखा।" हर वीरगति प्राप्त हुए सैनिक या नागरिक पर छाती पीटने वालों को पॉपकॉर्न की तरह व्यवहार करने के बजाय महाभारत और गीता का अध्ययन करना चाहिए। हम धर्म युद्ध में हैं। यदि आप भावनात्मक रूप से कमजोर हैं, तो घर पर रहें और अपना मुंह बंद रखें, और उन लोगों का मनोबल न गिराएं जो आपकी लड़ाई लड़ रहे हैं। #मेरे विचार👈 #पॉलिटिक्स #मोदी फैन क्लब 👌 #🚩मोदी फैन 🚩 #🙏PM मोदी के फैन 🇮🇳 @🚩[卐] 𝙍𝙞𝙩𝙪_ 𝙗𝙖𝙟𝙥𝙖𝙞 [卐] @ 🇮🇳$HR££🕉️✨ @BIJESH JHINJHONIYA @✯͜𝐈ᵐ🇿‌𝙖𝙩𝙩𝙞𝙞 🇺‌𝙥 🇦‌𝙖𝙡 i❤
K. VISHVAKARMA
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1 months ago
भारत में 80% कॉलेज और विश्वविद्यालय अगले 10 वर्षों में बंद हो जाएंगे..??? क्या यह अतिशयोक्ति लगती है..??? यह नहीं है।अब आंकड़ों को देखें। प्लंबर ₹1,200 - ₹2,000 प्रति दिन ≈ ₹30,000 - ₹50,000 प्रति माह इलेक्ट्रीशियन ₹1,500 - ₹2,500 प्रति दिन ≈ ₹35,000 - ₹60,000 प्रति माह टाइल वर्कर / मिस्त्री ₹1,200 - ₹2,000 प्रति दिन ≈ ₹30,000 - ₹50,000 प्रति माह जोमैटो / स्विगी राइडर ₹25,000 - ₹35,000 प्रति माह अमेज़न / फ्लिपकार्ट डिलीवरी पार्टनर ₹28,000 - ₹40,000 प्रति माह छोटा दुकानदार नेट आय ≈ ₹30,000–₹70,000 प्रति माह ये आय कौशल, गति और मांग के साथ बढ़ती हैं। कोई दीक्षांत समारोह आवश्यक नहीं। अब डिग्री धारकों की स्थिति देखें। बी.कॉम फ्रेशर ₹12,000 - ₹18,000 बीए फ्रेशर ₹10,000 - ₹15,000 बीएससी फ्रेशर ₹12,000 - ₹18,000 एमएससी फ्रेशर ₹15,000 - ₹22,000 एमबीए फ्रेशर (टियर 2 / 3 कॉलेज) ₹18,000–₹30,000 नॉन टेक इंजीनियर ₹12,000 - ₹20,000 टेक इंजीनियर ₹20,000–₹35,000 (शीर्ष 5% को छोड़कर) ये वेतन तब तक स्थिर रहते हैं जब तक कौशल नहीं जोड़े जाते। पैटर्न...??? खतरनाक रूप से वास्तविक। कुशल कामगार तुरंत कमाते हैं। डिग्री धारक “अवसरों” का इंतजार करते हैं। कौशल मासिक रूप से बढ़ते हैं। डिग्रियां वार्षिक रूप से घटती हैं। एक प्लंबर अपस्किल करता है = आय बढ़ती है। एक डिलीवरी पार्टनर मार्गों का अनुकूलन करता है = आय बढ़ती है। एक दुकानदार मांग को समझता है = आय बढ़ती है। एक डिग्री धारक...??? इंतजार करें... आवेदन करें... इंटर्न करें... पुनः कौशल सीखें... दोहराएं... आशावादी रहें... और फिर भी, हमारे राजनेता सबसे कम परवाह करते हैं। हमारे बाबू अनमने रहते हैं। हमारे विश्वविद्यालय मालिक नए कॉलेज खोलते रहते हैं। क्योंकि यह प्रणाली छात्रों के लिए नहीं बनी है। यह लाभ के लिए बनी है। डिग्रियां अभी भी बांटी जा रही हैं। जैसे कि उनका कोई मतलब हो। मध्यवर्गीय माता-पिता के पास कोई विकल्प नहीं है। छात्रों के पास कोई बचाव नहीं है।डिग्रियां अनुमोदनों से जुड़ी हैं।अनुमोदन नौकरियों से जुड़े हैं।तो चक्र चलता रहता है। आज स्कूल में प्रवेश करने वाला बच्चा, लगभग 2040 - 2045 में स्नातक होगा। यहाँ रुकें। तब दुनिया कैसी दिखेगी..??? हर जगह ऑटोमेशन।हर तीन साल में करियर का पुनर्लेखन। डोमेन पार करने वाली नौकरियां। हर दो साल में कौशल की समाप्ति। मानव मशीनों के साथ काम कर रहे हैं। सिस्टम में सोच रहे हैं। अस्पष्ट समस्याओं को हल कर रहे हैं।लगातार सीख रहे हैं। अब हमारे कक्षाओं को देखें। पुराने... स्थिर पाठ्यक्रम... अनचाहे प्रायोगिक... सभी के लिए एक ही डिग्री... हमारी शिक्षा प्रणाली 21वीं सदी के मानवों को तैयार नहीं कर सकती। तो मूल कारण कहाँ है? ब्यूरोक्रेट्स। हमारे बाबू सिस्टम चलाते हैं।वे नीति सलाह देते हैं।वे क्रियान्वयन डिजाइन करते हैं।और वे एक ही द्वार से आते हैं। यूपीएससी। यूपीएससी 1940 के दशक के लिए डिजाइन किया गया था। रानी की सेवा के लिए। स्मृति के लिए अनुकूलित... पालन... जोखिम से बचाव... छोटे अपडेट... बड़ी जड़ता... बाबू अपनी पदोन्नति को आपके बच्चे के भविष्य से ज्यादा महत्व देते हैं। एनईपी 2020 पहले ही पुराना लगने लगा है। दुनिया बहुत आगे बढ़ चुकी है। आज, दुनिया चाहती है... सिस्टम थिंकर... डेटा तर्क... संज्ञानात्मक लचीलापन... मानव निर्णय... भावनात्मक बुद्धिमत्ता... क्रॉस-डोमेन कौशल... नहीं रैंक-होल्डर... नहीं रटने वाले विशेषज्ञ... जब कौशल हर दो साल में समाप्त हो जाते हैं, तो एक स्थिर डिग्री क्या बचाती है..??? कुछ भी नहीं... @🌹श्री 🌹 @🚩[卐] 𝙍𝙞𝙩𝙪_ 𝙗𝙖𝙟𝙥𝙖𝙞 [卐] @ 🇮🇳$HR££🕉️✨ #मेरे विचार👈 #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👍 डर के आगे जीत👌
K. VISHVAKARMA
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1 months ago
*कुंवारेपन का विस्फोट, समाज अंधी दौड़ में कहाँ पहुँच रहा है ?* अब वक्त आ गया है कि चीज़ों को मीठे शब्‍दों में कहना बंद किया जाए। दुनिया जिस आज़ादी की जय-जयकार कर रही है, वही आज़ादी धीरे-धीरे *परिवार, रिश्तों,* और *सामाजिक संतुलन,* सब कुछ निगलने लगी है। अंतरराष्ट्रीय सर्वे कहता है कि आने वाले कुछ वर्षों में *युवतियों में 45% तक विवाह से दूरी बना सकती हैं।* पहली नज़र में यह *प्रगति* लगती है, पर असल में यह *भविष्य के लिए एक टाइम-बम* है। 1.*कैरियर, पैसे और अकेलापन….यह कैसी प्रगति?* आज की बेटी डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, उद्यमी, सब बन रही है। बहुत अच्छा। शानदार। पर क्या कैरियर पूरा जीवन है? *पैसा साथी नहीं बनता। पद वृद्धावस्था में हाथ नहीं पकड़ता। मोबाइल और लैपटॉप बुढ़ापे में बात नहीं करते।* लेकिन समाज को इस सच्चाई से फर्क नहीं पड़ता, सबको दौड़ लगानी है… बस लगानी है। 2.*परिवार ढह रहे हैं…. कोई देख भी रहा है?* कुँवारे लड़के बढ़ रहे हैं, अविवाहित युवतियाँ बढ़ रही हैं, जनसंख्या गिर रही है, और *अकेलेपन उद्योग* (counsellor, therapy, depression pills) फल-फूल रहा है। पर हम फिर भी कहते हैं, *सब ठीक है, यह आधुनिकता है।* यह *आधुनिकता नहीं, धीमी मौत* है, परिवार, समाज और मानवीय संबंधों की। 3.*सर्वाधिक खतरनाक स्थिति.....* आज माता-पिता रिश्ता ढूंढते हैं, पर लड़की कहती है, *अभी नहीं।* फिर *अभी नहीं* धीरे-धीरे *कभी नहीं* में बदल जाता है और जब एहसास होता है तो मेडिकल रिपोर्ट सामने होती है, हार्मोनल इश्यू, कंसिव न होना, मानसिक तनाव, अकेलापन। पर तब कौन जिम्मेदार? *कोई नहीं, क्योंकि फैसला स्वतंत्रता का था।* 4.*समाज के सफेदपोश लोग चुप क्यों हैं????* क्योंकि सच्चाई बोलने से उन्हें आधुनिकता-विरोधी कहलाने का डर है। पर सच्चाई यह है कि अगर 21–25 की उपयुक्त उम्र में विवाह नहीं हुए तो समाज जल्द ही *दिसंबर की ठंडी रात जैसा सूना* हो जाएगा। 5.*अंतिम बात…..* प्रगति वो नहीं जो हमें अकेला कर दे। अगर हमारा भविष्य कुंवारा, अकेला और भावहीन होने वाला है, तो समाज के लिए यह गर्व की नहीं,*खतरे की घंटी* है। @🌹श्री 🌹 @🚩[卐] 𝙍𝙞𝙩𝙪_ 𝙗𝙖𝙟𝙥𝙖𝙞 [卐] @ 🇮🇳$HR££🕉️✨ @✯͜𝐈ᵐ🇿‌𝙖𝙩𝙩𝙞𝙞 🇺‌𝙥 🇦‌𝙖𝙡 i❤ #मेरे विचार👈 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख