मराठा साम्राज्य के विस्तारक, अपराजेय योद्धा और दूरदर्शी प्रशासक पेशवा बाजीराव प्रथम (1700-1740) की पुण्यतिथि (28 अप्रैल) पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि। छत्रपति शाहूजी महाराज के पेशवा के रूप में, उन्होंने 20 वर्षों के अपने कार्यकाल में एक भी युद्ध न हारकर मराठा पताका को उत्तर भारत तक फहराया और अटूट राष्ट्र निष्ठा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
पेशवा बाजीराव प्रथम के गौरवशाली योगदान : -
अपराजेय सैन्य नेतृत्व: महज 12 वर्ष की आयु में युद्ध क्षेत्र में कदम रखने वाले बाजीराव प्रथम, 1720-1740 तक मराठा साम्राज्य के चौथे पेशवा रहे।
उत्तर भारत में विस्तार: उन्होंने अपनी कुशल रणनीति और 'गुमनाम' (गनिमी कावा) युद्ध नीति से मुगलों और निजाम को भोपाल व दिल्ली जैसे प्रमुख युद्धों में धूल चटाई।
दूरदर्शी प्रशासक: उन्होंने न केवल युद्ध लड़े, बल्कि प्रशासन में भी दूरदर्शिता का परिचय दिया।
शिवाजी का स्वप्न: बाजीराव प्रथम को 'थोरले बाजीराव' (वयोवृद्ध बाजीराव) के रूप में भी जाना जाता है, जिन्होंने मराठा साम्राज्य को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुँचाया।
वीर पेशवा बाजीराव प्रथम को कोटि-कोटि नमन।। 🙏🙏
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