mansoon ki शुभकामनाएं

Mayu
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20 hours ago
नरसिंह जयंती # वीडियो स्टेटस # जय श्री हरि #🙂 शुभेच्छा
Mayu
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21 hours ago
नरसिंह जयंती # श्री हरी # ॐ नमो भगवते वासुदेवाय # #🙂 शुभेच्छा
सुशील मेहता
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23 hours ago
आयुष्मान भारत दिवस (Ayushman Bharat Diwas) हर साल 30 अप्रैल को प्रोग्राम होता है। ️ आयुष्मान️ आयुष्मान️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ ️ गरीबों️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ दिन का उद्देश्य इस सामाजिक-जाति जनगणना डेटाबेस आर्थिक के आधार पर देश के दूरदराज के सभी क्षेत्रों में सस्ती चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ावा देना है। यह बेहतर होने के लिए फायदेमंद भी होगा। इस योजना को एप 2018 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था। एंव एंव कल्चरल वेलवर्क के प्रोजेक्ट्स, फिटर इंडिया ने अब तक 75,532 भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र का संचालन किया है। डायवटी 2022 तक 1.5 लाख स्वस्थ और कल्याण केंद्र का लक्ष्य रखा गया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य कवर है. आर्थिक रूप से प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख करोड़ रुपये की सुविधा प्रदान करता है। योजना यह अस्पताल में भर्ती होने से पंद्रह दिन पहले और अस्पताल में भर्ती होने के पंद्रह दिन बाद में को भी कवर करती है। मूवी और खर्च का खर्च शामिल है। आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना, जो 10 करोड़ गरीब और कमजोर परिवारों (लगभग 50 करोड़ लाभार्थियों) को कवर करेगी। वह हर परिवार के लिये, प्रति वर्ष 5 लाख रुपये के मुल्य के लिए माध्यमिक और तृतीयक स्थर पर अस्पताल मे देखभाल के लिये कवरेज प्रदान करती है। योजना के लाभ पूरे देश में कहीं भी लागू करे जा सकते है, और इस योजना के अंतर्गत आने वाले लाभार्थी को देश भर के किसी भी सार्वजनिक या निजी अन्तर्गत अस्पताल से कैशलेस (बिना पैसे दिये) लाभ लेने की अनुमति होगी। एस.ई.सी.सी डेटाबेस में दिए गए मानदंड के आधार पर तय होगा की किसे इस योजना का लाभ उठाने का हक है। यह लगभग 10.74 करोड़ गरीब, वंचित ग्रामीण परिवारों और विस्तृत शहरी कर्मचारियों के परिवारों को लक्षित करेगा। यह परिवार एस.ई.सी.सी डेटाबेस, जिसमे गांवों और शहरों दोनो के ङेटा शामिल हैं, के मुताबिक तय होंगे।यह लगभग सभी माध्यमिक और कई तृतीयक अस्पतालों को कवर करता है (एक नकारात्मक सूची को छोड़ २) कल्याण केंद्र संपादित करें स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र में प्रदान की जाने वाली सेवाओं की सूची में शामिल हैं: गर्भावस्था देखभाल और मातृ स्वास्थ्य सेवाएं नवजात और शिशु स्वास्थ्य सेवाएं बाल स्वास्थ्य जीर्ण संक्रामक रोग गैर संक्रामक रोग मानसिक बीमारी का प्रबंधन दांतों की देखभाल बुजुर्ग के लिए आपातकालीन चिकित्सा {0/} #शुभ कामनाएँ 🙏
सुशील मेहता
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23 hours ago
देवी छिन्नमस्ता जयंती हिंदी पंचांग के अनुसार बैशाख महीने में एक की शुक्ल चतुर्दशी को छिन्नमस्ता जयंती मनाई जाती है। वहीं गुप्त नवरात्रि में भी मां छिन्नमस्ता की पूजा-उपासना की जाती है। सनातन शास्त्र में मां को सवसिद्धि पूर्ण करने वाली अधिष्ठात्री कहा जाता है। मां की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही गुप्त नवरात्रि के दौरान भी मां छिन्नमस्ता की पूजा उपासना का विधान है। अत: तंत्र-मंत्र सीखने वाले साधक गुप्त नवरात्रि में भी मां छिन्नमस्ता की कठिन भक्ति करते हैं। ये दस महाविद्याओं की छठी देवी हैं। सनातन शास्त्र में मां छिन्नमस्ता को सर्व सिद्धि पूर्ण करने वाली अधिष्ठात्री कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं तत्काल पूर्ण होती हैं। इसके लिए साधक श्रद्धा भाव से मां छिन्नमस्ता की पूजा, जप एवं तप करते हैं। छिन्नमस्तिका देवी को मां चिंतपूर्णी के नाम से भी जाना जाता है. देवी के इस रूप के विषय में कई पौराणिक धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है. मार्कंडेय पुराण व शिव पुराण आदि में देवी के इस रूप का विशद वर्णन किया गया है इनके अनुसार जब देवी ने चंडी का रूप धरकर राक्षसों का संहार किया। दैत्यों को परास्त करके देवों को विजय दिलवाई तो चारों ओर उनका जय घोष होने लगा. परंतु देवी की सहायक योगिनियाँ अजया और विजया की रुधिर पिपासा शांत नहीँ हो पाई थी इस पर उनकी रक्त पिपासा को शांत करने के लिए माँ ने अपना मस्तक काटकर अपने रक्त से उनकी रक्त प्यास बुझाई जिस कारण माता को छिन्नमस्तिका नाम से भी पुकारा जाने लगा। माना जाता है की जहां भी देवी छिन्नमस्तिका का निवास हो वहां पर चारों ओर भगवान शिव का स्थान भी हो. इस बात की सत्यता इस जगह से साबित हो जाती हैं क्योंकी मां के इस स्थान के चारों ओर भगवान शिव का स्थान भी है. यहां पर कालेश्वर महादेव व मुच्कुंड महादेव तथा शिववाड़ी जैसे शिव मंदिर स्थापित हैं। छिन्नमस्ता के प्राद्रुभाव की एक कथा इस प्रकार है- भगवती भवानी अपनी दो सहचरियों के संग मन्दाकिनी नदी में स्नान अक्र रही थी. स्नान करने पर दोनों सहचरियों को बहुत तेज भूख लगी. भूख कि पीडा से उनका रंग काला हो गया. तब सहचरियों ने भोजन के लिये भवानी से कुछ मांगा. भवानी के कुछ देर प्रतिक्षा करने के लिये उनसे कहा, किन्तु वह बार-बार भोजन के लिए हठ करने लगी। तत्पश्चात सहचरियों ने नम्रतापूर्वक अनुरोध किया - "मां तो भूखे शिशु को अविलम्ब भोजन प्रदान करती है" ऎसा वचन सुनते ही भवानी ने अपने खडग से अपना ही सिर काट दिया. कटा हुआ सिर उनके बायें हाथ में आ गिरा और तीन रक्तधाराएं बह निकली. दो धाराओं को उन्होंने सहचरियों की और प्रवाहित कर दिया. जिन्हें पान कर दोनों तृ्प्त हो गई. तीसरी धारा जो ऊपर की प्रबह रही थी, उसे देवी स्वयं पान करने लगी. तभी से वह छिन्नमस्तिका के नाम से विख्यात हुई है। छिन्नमस्तिका पूजा की सिद्धि के तुरंत बाद परिणाम का एहसास होता है. माँ छिन्नमस्ता की पूजा से समृद्धि, स्थिरता और लंबे जीवन के साथ साथ और भी अनगिनत लाभ होते है. छिन्नमस्तिका मंत्र कुंडलिनी जागरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कुंडलिनी योग माँ के अभ्यास के दौरान मूला धरा चक्र के जागरण के लिए छिन्नमस्तिका मंत्र का जाप किया जाता है। #शुभ कामनाएँ 🙏
सुशील मेहता
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23 hours ago
नरसिंह भगवान जयंती नरसिंह भगवान चौथे और भगवान विष्णु के सबसे अधिक पूजित अवतारों में से एक थे जिन्होंने हिरण्यकश्यप को मारने के लिए पृथ्वी पर जन्म लिया। जिस दिन भगवान नरसिंह का अवतार हुआ था उसे नरसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। उनकी शक्ल एक आदमी-कम-शेर की ज्यादा थी जहाँ उनका धड़ एक आदमी के समान था और चेहरा शेर के समान था। शुक्ल पक्ष के दौरान वैशाख में चतुर्दशी तिथि को नरसिंह जयंती मनाई जाती है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, भगवान नरसिंह बुराई पर अच्छाई की जीत और शक्ति का प्रतीक है। विभिन्न हिंदू धार्मिक ग्रंथों में भगवान नरसिंह की महानता और नरसिंह जयंती के महत्व को चित्रित किया गया है। नरसिंह जयंती के लिए जो भी उपासक देवता की पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं, उन्हें बहुत सारा आशीर्वाद मिलता है। भक्त अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं, अपने जीवन से सभी प्रकार के दुर्भाग्य और बुरी शक्तियों को खत्म कर सकते हैं और बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस दिन भगवान नरसिम्हा की पूजा और अर्चना करते हैं, तो उन्हें बहुतायत, समृद्धि, साहस और जीत का आशीर्वाद मिलता है। #शुभ कामनाएँ 🙏
सुशील मेहता
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1 days ago
अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस (अंग्रेज़ी: International Dance Day) प्रत्येक वर्ष 29 अप्रैल को विश्व स्तर पर मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस की शुरुआत 29 अप्रैल 1982 से हुई। यूनेस्को की सहयोगी अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्था की सहयोगी अंतर्राष्ट्रीय नाच समिति ने 29 अप्रैल को नृत्य दिवस के रूप में स्थापित किया। एक महान् रिफॉर्मर जीन जार्ज नावेरे के जन्म की स्मृति में यह दिन अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस को पूरे विश्व में मनाने का उद्देश्य जनसाधारण के बीच नृत्य की महत्ता का अलख जगाना था। साथ ही लोगों का ध्यान विश्वस्तर पर इस ओर आकर्षित करना था। जिससे लोगों में नृत्य के प्रति जागरूकता फैले। साथ ही सरकार द्वारा पूरे विश्व में नृत्य को शिक्षा की सभी प्रणालियों में एक उचित जगह उपलब्ध कराना था। सन 2005 में नृत्य दिवस को प्राथमिक शिक्षा के रूप में केंद्रित किया गया। विद्यालयों में बच्चों द्वारा नृत्य पर कई निबंध व चित्र भी बनाए गए। 2007 में नृत्य को बच्चों को समर्पित किया गया। कहा जाता है कि आज से 2000 वर्ष पूर्व त्रेतायुग में देवताओं की विनती पर ब्रह्माजी ने नृत्य वेद तैयार किया, तभी से नृत्य की उत्पत्ति संसार में मानी जाती है। इस नृत्य वेद में सामवेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद व ऋग्वेद से कई चीजों को शामिल किया गया। जब नृत्य वेद की रचना पूरी हो गई, तब नृत्य करने का अभ्यास भरत मुनि के सौ पुत्रों ने किया। अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस के अवसर पर सृ ज न व अरविंद ने बताया कि जितना आनंद नृत्य करने में आता है, उतना ही आनंद नृत्य देखने में आता है। कला क्षेत्र में यह एक विशिष्ट विधा है, जिसे नृत्य दिवस के रूप में मनाना चाहिए। वहीं गौरव व सोनू ने बताया कि नृत्य करने से दिल को सुकून मिलता है, जो कि शारीरिक व मानसिक रूप से बहुत जरूरी है तथा स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। हमारे लिए नृत्य संकटमोचन की तरह है। जिसकी साधना से हमारे बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं। नृत्यकला हमारी संस्कृति की देन है। नृत्य करने से आत्मिक शांति का अनुभव होता है। #शुभ कामनाएँ 🙏
सुशील मेहता
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3 days ago
मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि यह तिथी सब पापों को हरनेवाली और उत्तम है। इस दिन जो व्रत रहता है उसके व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल तथा पातक समूह से छुटकारा पा जाते हैं। वैशाख मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता हैं। यह तिथी सब पापों को हरनेवाली है। इस दिन जो व्रत रखते है वह मनुष्य मोहजाल तथा पातकों से छुटकारा पा जाते हैं।मोहिनी' को उपवास करने पर प्राणियों के अनेक जन्मों के किए हुए मेरु पर्वत जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।' मुनि का यह वचन सुनकर धृष्ट्बुद्धि का चित्त प्रसन्न हो गया। उसने कौँन्डिन्य के उपदेश से विधिपूर्वक 'मोहिनी एकादशी' का व्रत किया। इस व्रत के करने से वह निष्पाप हो गया और दिव्य देह धारण कर गरुड़ पर आरूढ़ हो सब प्रकार के उपद्रवों से रहित श्रीविष्णुधाम को चला गया। इस प्रकार यह 'मोहिनी' का व्रत बहुत उत्तम है। इसके पढने और सुनने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। मान्यता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ. मंथन के दौरान अमृत से भरा कलश निकला. इस कलश को लेकर देवताओं और असुरों के बीच झगड़ा होने लगा कि कौन पहले अमृत पिएगा. दोनों के बीच युद्ध की स्थिति बन गई. तभी भगवान विष्णु मोहिनी नामक सुंदर स्त्री का रूप लेकर प्रकट हुए और दैत्यों से अमृत कलश लेकर सारा अमृत देवताओं को पिला दिया। इससे देवता अमर हो गए. मान्यता है कि जिस दिन भगवान नारायण ने ये रूप धारण किया था, उस दिन वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का दिन था. इसके बाद से इस एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाने लगा और इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा की जाने लगी। #शुभ कामनाएँ 🙏