🌸`श्री हित प्रेमानंद सत्संग संवाद सीरीज भाग - 34 (विषय: भक्ति में 'भाव' का महत्व)`
*आज की जिज्ञासा:*
```"महाराज जी, मैं नियम से पूजा करता हूँ, पर मन में वो प्रेम (भाव) नहीं आता। क्या मेरी पूजा व्यर्थ है?"```
*महाराज जी का समाधान:*
```"कोई भी क्रिया व्यर्थ नहीं जाती। जैसे सूखी लकड़ियों को रगड़ने से आग देर से निकलती है, वैसे ही निरंतर अभ्यास से एक दिन 'भाव' प्रकट होगा। तुम नियम मत छोड़ो। भाव कोई बाजार में मिलने वाली वस्तु नहीं है, यह तो प्रभु की कृपा से मिलता है। तुम बस अपना कर्तव्य करते रहो और उनसे प्रार्थना करो—'हे प्रभु, मुझे अपना प्रेम दे दो।' तुम्हारी निष्ठा ही एक दिन प्रेम में बदल जाएगी।"```
*आज का दिव्य सूत्र:*
> "नियम शरीर को साधता है, और भाव आत्मा को।"
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