#शिव #शिव महामृत्युंजय मंत्र🙏
'
#शिव शब्द का अर्थ "शुभ" "स्वाभिमानिक" "अनुग्रहशील" "सौम्य" "दयालु" "उदार" "मैत्रीपूर्ण" होता है ।`
`लोक व्युत्पत्ति में "शिव" की जड़ "शि" है ।`
`जिसका अर्थ है जिन में सब कुछ व्यापक है ।`
`औऱ "व" इसका अर्थ है – "अनुग्रह के अवतार ।"`
`ऋगवेद में "शिव" शब्द एक विशेषण के रूप में प्रयोग किया जाता है ।`
`रुद्र सहित कई ऋग्वेदिक देवताओं के लिए एक विशेषण के रूप में ।`
`शिव शब्द में "मुक्ति, अंतिम मुक्ति" एवं "शुभ व्यक्ति" का भी अर्थ दिया है ।`
`इस विशेषण का प्रयोग विशेष रूप से साहित्य के वैदिक परतों में कई देवताओं को संबोधित करने हेतु किया गया है ।`
`यह शब्द वैदिक रुद्र शिव से महाकाव्यों तथा पुराणों में नाम शिव के रूप में विकसित हुआ ।`
`एक शुभ देवता के रूप में जो "निर्माता प्रजनक औऱ संहारक" होता है ।`
`⚛️`
`महाशक्तिशाली महामृत्युंजय मन्त्र ।`
`शब्द की शक्ति , शब्द वही है एवं उनकी शक्ति निम्न प्रकार से है –`
`✡️`
`शब्द – शक्ति`
`"त्र" त्र्यम्बक त्रि-शक्ति एवं त्रिनेत्र`
`"य" यम तथा यज्ञ`
`"म" मंगल`
`"ब" बालार्क तेज`
`"कं" काली का` `कल्याणकारी बीज –`
`"य" यम औऱ यज्ञ`
`"जा" जालंधरेश`
`"म" महाशक्ति`
`"हे" हाकिनी`
`"सु" सुगन्धि एवं सुर`
`"गं" गणपति का बीज`
`"ध" धूमावती का बीज`
`"म" महेश`
`"पु" पुण्डरीकाक्ष`
`"ष्टि" देह में स्थित षटकोण`
`"व" वाकिनी`
`"र्ध" धर्म`
`"नं" नंदी`
`"उ" उमा`
`"र्वा" शिव की बाईं शक्ति`
`"रु" रूप औऱ आँसू`
`"क" कल्याणी`
`"व" वरुण`
`"बं" बंदी देवी`
`"ध" धनदा देवी`
`"मृ" मृत्युंजय`
`"त्यो" नित्येश`
`"क्षी" क्षेमंकरी`
`"य" यम तथा यज्ञ`
`"मा" माँग एवं मन्त्रेश`
`"मृ" मृत्युंजय`
`"तात" चरणों में स्पर्श`
`यह पूर्ण विवरण – "देवो भूत्वा देवं यजेत" के अनुसार पूर्णतः सत्य प्रमाणित हुआ है ।`
`🙏🏻🔱🚩`
`"शिव" शब्द-तत्त्व –`
`◇ व्याकरण के अनुसार – शीड् + वन् अर्थात शिव – धातु "शीङ् स्वप्ने" – जो सृष्टि के प्रलय में "शयन" करते हैं , योगनिद्रा में रहते हैं , वे शिव हैं ।`
`◇ निरुक्ति –`
`१. "शि" अर्थात – जो शमन करता है पापों का , मङ्गल करता है`
`२. "व" अर्थात – वमन करता है – फैलाता है – जो अनुग्रह को`
`३. "शिव" अर्थात – जिसमें सभी/समस्त शयन करते हैं – लय हो जाते हैं` 👉🏻`शेरते अस्मिन् भूतानि इति शिवः`
`श्रुति-प्रमाण – ऋग्वेद १०.९२.९ 👉🏻 "शिवो नामासि स्वधितिस्ते पिता"– रुद्र के लिए "शिव" विशेषण ।`
`~ श्वेताश्वतर उप. ३.११ 👉🏻 "सर्वानन शिरोग्रीवः... शिवमद्वैतम्" – ☝🏻यहाँ "शिव" संज्ञा-रूप में उपस्थित हुए हैं ।`
`अस्तु वैदिक रुद्र + लौकिक मङ्गल – पुराणों में "शिव" 👉🏻 निर्माता-पालक-संहारक त्रिशक्ति-युक्त परब्रह्म ।`
`महामृत्युंजय बीज-विज्ञान –`
`ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।`
`उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥`
`उपरोक्त दिया गया बीज-विश्लेषण "मन्त्र-चैतन्य" का परम् रहस्य है –`
`तथापि पुनः मुख्य बीज –`
`१. "त्र" = त्र्यम्बक = भूत-भविष्य-वर्तमान के द्रष्टा, त्रिगुणातीत`
`२. "मृ" = मृत्युंजय = मृत्यु को जीतने वाले , काल के भी काल "महाकाल"`
`३. "म" = महेश , मङ्गल , महाशक्ति जोकि – तीन बार आता है – सृष्टि-स्थिति-लय`
`४. "गं" = गणपति बीज – विघ्न-नाश बिना मन्त्र सिद्धि नहीं मिलती`
`५. "कं" = काली/कल्याण बीज – काम-क्रोध का कर्षण`
`☝🏻"देवो भूत्वा देवं यजेत" – तन्त्र का महावाक्य है 👉🏻 जब साधक प्रत्येक बीज के देवता से तादात्म्य कर लेता है , तभी मन्त्र "चैतन्य" होता है ।` `केवल जप भर करलेने से नहीं , अपितु भाव से ।`
`चित्र का रहस्य –`
`सदाशिव का पंचवक्त्र एवं शिवलिंग स्वरूप "अनुग्रह-मूर्ति" है ।`
`१. पंचमुख – ○सद्योजात , ○वामदेव , ○अघोर , ○तत्पुरुष , तथा ○ईशान 👉🏻 पंचकृत्य – ○सृष्टि , ○स्थिति , ○संहार , ○तिरोभाव ,औऱ ○अनुग्रह ।`
`२. चन्द्रमा – "सोम" अर्थात – उमया सहितः शिवः 👉🏻 अमृत-तत्त्व , मन का अधिपति ।`
`३. शिवलिंग पर त्रिपुण्ड्र एवं बिन्दु त्रिगुण + तुरीय अवस्था – बिन्दु अर्थात 👉🏻 शिव-शक्ति सामरस्य ।`
`४. जलधारा – गङ्गा अर्थात ज्ञान-गङ्गा – अभिषेक करना अर्थात – अहंकार का विसर्जन करना ।`
`५. कमल-पुष्प – हृदय-कमल में शिव का वास अर्थात – बाहर पूजो , भीतर पाओ ।`
`☝🏻"शिव" नाम ही महामन्त्र है` `शिवपुराण , कोटिरुद्र संहिता ३५.१`~
`"""शिव इत्यक्षरं नाम व्याहरिष्यन्ति ये नराः ।`
`तेषां जन्मसहस्रेषु पापं नश्यति तत्क्षणात् ॥"""`
`शिव पुराण , वायवीय संहिता २.३१.६ ~`
`""'शिं करोति शुभं शश्वत् वं करोति च वाञ्छितम् ।`
`शिवस्तेन समाख्यातो भक्तानां वाञ्छितप्रदः ॥"""`
`अर्थात 👉🏻 "शि" सदैव शुभ करता है , "व" वाञ्छित फल देता है , इसलिए भक्तों के वाञ्छित-प्रदाता को "शिव" कहते हैं ।`
`लिंगपुराण पूर्व ६५.९९ ~`
`"""शिवः सुखेति धातोश्च वं प्राप्त्यर्थे स्मृतो बुधैः ।`
`सुखप्राप्तिकरो यस्मात्तस्मात् शिव इति स्मृतः ॥"""`
`अर्थात 👉🏻 शिव धातु "सुख" अर्थ में है , "व" प्राप्ति के अर्थ में है - जो सुख की प्राप्ति कराए वह ही शिव है ।`
`महामृत्युंजय मंत्र का "तात" रहस्य –`
`ऊपर जो लिखा गया है कि – "तात = चरणों में स्पर्श" ☝🏻यह तन्त्र का गुह्यतम भाव है ।`
`"मा" अर्थात – माँग , "मृ" अर्थात – मृत्युंजय , "तात" अर्थात – हे तात , हे पिता` 👉🏻 `मृत्युंजय शिव से प्रार्थना` 👉🏻 `"मुझे अमृत से वंचित न करो , मैं आपके चरणों में पड़ा तात हूँ ।"`
`📿रुद्रयामल तंत्र –`
`"""तकारः शरणं प्रोक्त आकारः शरणागतः ।`
`तातः शरण्य इत्युक्तः शिवो मे शरणं गतः ॥"""`
`अर्थात 👉🏻 तात शब्द ही शरणागति है – महामृत्युंजय मंत्र की पूर्णाहुति एक मात्र "समर्पण" है ।`
`पंचवक्त्र का आज के दिन से सम्बन्ध –`
`🧘🏻♂️आज गुरु पुष्य योग है एवं ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि – रम्भा तीज है तथा – दोनों में ही "अनुग्रह" तत्त्व प्रधान है ।`
`पंचवक्त्र के ५ मुख अर्थात – पंचकृत्य , औऱ गुरु भी ५ कार्य करता है –`
`१. सद्योजात – शिष्य का द्विजत्व – परिणामतः नया जन्म`
`२. वामदेव – सौन्दर्य-ज्ञान से स्थिति`
`३. अघोर – पाप-संहार`
`४. तत्पुरुष – माया का तिरोभाव`
`५. ईशान – अनुग्रह – शिवत्व प्रदान करना`
`इसीलिए ही तो कहा गया है –`
`"""गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः""" – चित्र में तीनों एक हैं ।`
`शिव-शब्द , शिव-मन्त्र , शिव-चित्र - तीनों का दर्शन करें औऱ "त्र्यम्बक-कृपा" के अनुभव को सर्वत्र प्रसारित देखें ।`
`☝🏻"""शिव इत्यक्षरं नाम""" - सदैव स्मरण रखें , यह महामन्त्र ही पर्याप्त है ।`
`जहाँ शिव-चर्चा , शिव-नाम , शिव-स्वरूप का चिंतन – वहाँ स्वयं त्र्यम्बक उपस्थित ।`
`आप समस्त – इस "शिव-ज्ञान-यज्ञ" में यह आहूतियां स्वीकार करें 🙏🏻🌼`
`🌄🌄 शिवोऽहम् शिवोऽहम् 🌄🌄©®`