#भगवान शिव

sn vyas
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5 दिन पहले
#शिव #शिव महामृत्युंजय मंत्र🙏 '#शिव शब्द का अर्थ "शुभ" "स्वाभिमानिक" "अनुग्रहशील" "सौम्य" "दयालु" "उदार" "मैत्रीपूर्ण" होता है ।` `लोक व्युत्पत्ति में "शिव" की जड़ "शि" है ।` `जिसका अर्थ है जिन में सब कुछ व्यापक है ।` `औऱ "व" इसका अर्थ है – "अनुग्रह के अवतार ।"` `ऋगवेद में "शिव" शब्द एक विशेषण के रूप में प्रयोग किया जाता है ।` `रुद्र सहित कई ऋग्वेदिक देवताओं के लिए एक विशेषण के रूप में ।` `शिव शब्द में "मुक्ति, अंतिम मुक्ति" एवं "शुभ व्यक्ति" का भी अर्थ दिया है ।` `इस विशेषण का प्रयोग विशेष रूप से साहित्य के वैदिक परतों में कई देवताओं को संबोधित करने हेतु किया गया है ।` `यह शब्द वैदिक रुद्र शिव से महाकाव्यों तथा पुराणों में नाम शिव के रूप में विकसित हुआ ।` `एक शुभ देवता के रूप में जो "निर्माता प्रजनक औऱ संहारक" होता है ।` `⚛️` `महाशक्तिशाली महामृत्युंजय मन्त्र ।` `शब्द की शक्ति , शब्द वही है एवं उनकी शक्ति निम्न प्रकार से है –` `✡️` `शब्द – शक्ति` `"त्र" त्र्यम्बक त्रि-शक्ति एवं त्रिनेत्र` `"य" यम तथा यज्ञ` `"म" मंगल` `"ब" बालार्क तेज` `"कं" काली का` `कल्याणकारी बीज –` `"य" यम औऱ यज्ञ` `"जा" जालंधरेश` `"म" महाशक्ति` `"हे" हाकिनी` `"सु" सुगन्धि एवं सुर` `"गं" गणपति का बीज` `"ध" धूमावती का बीज` `"म" महेश` `"पु" पुण्डरीकाक्ष` `"ष्टि" देह में स्थित षटकोण` `"व" वाकिनी` `"र्ध" धर्म` `"नं" नंदी` `"उ" उमा` `"र्वा" शिव की बाईं शक्ति` `"रु" रूप औऱ आँसू` `"क" कल्याणी` `"व" वरुण` `"बं" बंदी देवी` `"ध" धनदा देवी` `"मृ" मृत्युंजय` `"त्यो" नित्येश` `"क्षी" क्षेमंकरी` `"य" यम तथा यज्ञ` `"मा" माँग एवं मन्त्रेश` `"मृ" मृत्युंजय` `"तात" चरणों में स्पर्श` `यह पूर्ण विवरण – "देवो भूत्वा देवं यजेत" के अनुसार पूर्णतः सत्य प्रमाणित हुआ है ।` `🙏🏻🔱🚩` `"शिव" शब्द-तत्त्व –` `◇ व्याकरण के अनुसार – शीड् + वन् अर्थात शिव – धातु "शीङ् स्वप्ने" – जो सृष्टि के प्रलय में "शयन" करते हैं , योगनिद्रा में रहते हैं , वे शिव हैं ।` `◇ निरुक्ति –` `१. "शि" अर्थात – जो शमन करता है पापों का , मङ्गल करता है` `२. "व" अर्थात – वमन करता है – फैलाता है – जो अनुग्रह को` `३. "शिव" अर्थात – जिसमें सभी/समस्त शयन करते हैं – लय हो जाते हैं` 👉🏻`शेरते अस्मिन् भूतानि इति शिवः` `श्रुति-प्रमाण – ऋग्वेद १०.९२.९ 👉🏻 "शिवो नामासि स्वधितिस्ते पिता"– रुद्र के लिए "शिव" विशेषण ।` `~ श्वेताश्वतर उप. ३.११ 👉🏻 "सर्वानन शिरोग्रीवः... शिवमद्वैतम्" – ☝🏻यहाँ "शिव" संज्ञा-रूप में उपस्थित हुए हैं ।` `अस्तु वैदिक रुद्र + लौकिक मङ्गल – पुराणों में "शिव" 👉🏻 निर्माता-पालक-संहारक त्रिशक्ति-युक्त परब्रह्म ।` `महामृत्युंजय बीज-विज्ञान –` `ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।` `उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥` `उपरोक्त दिया गया बीज-विश्लेषण "मन्त्र-चैतन्य" का परम् रहस्य है –` `तथापि पुनः मुख्य बीज –` `१. "त्र" = त्र्यम्बक = भूत-भविष्य-वर्तमान के द्रष्टा, त्रिगुणातीत` `२. "मृ" = मृत्युंजय = मृत्यु को जीतने वाले , काल के भी काल "महाकाल"` `३. "म" = महेश , मङ्गल , महाशक्ति जोकि – तीन बार आता है – सृष्टि-स्थिति-लय` `४. "गं" = गणपति बीज – विघ्न-नाश बिना मन्त्र सिद्धि नहीं मिलती` `५. "कं" = काली/कल्याण बीज – काम-क्रोध का कर्षण` `☝🏻"देवो भूत्वा देवं यजेत" – तन्त्र का महावाक्य है 👉🏻 जब साधक प्रत्येक बीज के देवता से तादात्म्य कर लेता है , तभी मन्त्र "चैतन्य" होता है ।` `केवल जप भर करलेने से नहीं , अपितु भाव से ।` `चित्र का रहस्य –` `सदाशिव का पंचवक्त्र एवं शिवलिंग स्वरूप "अनुग्रह-मूर्ति" है ।` `१. पंचमुख – ○सद्योजात , ○वामदेव , ○अघोर , ○तत्पुरुष , तथा ○ईशान 👉🏻 पंचकृत्य – ○सृष्टि , ○स्थिति , ○संहार , ○तिरोभाव ,औऱ ○अनुग्रह ।` `२. चन्द्रमा – "सोम" अर्थात – उमया सहितः शिवः 👉🏻 अमृत-तत्त्व , मन का अधिपति ।` `३. शिवलिंग पर त्रिपुण्ड्र एवं बिन्दु त्रिगुण + तुरीय अवस्था – बिन्दु अर्थात 👉🏻 शिव-शक्ति सामरस्य ।` `४. जलधारा – गङ्गा अर्थात ज्ञान-गङ्गा – अभिषेक करना अर्थात – अहंकार का विसर्जन करना ।` `५. कमल-पुष्प – हृदय-कमल में शिव का वास अर्थात – बाहर पूजो , भीतर पाओ ।` `☝🏻"शिव" नाम ही महामन्त्र है` `शिवपुराण , कोटिरुद्र संहिता ३५.१`~ `"""शिव इत्यक्षरं नाम व्याहरिष्यन्ति ये नराः ।` `तेषां जन्मसहस्रेषु पापं नश्यति तत्क्षणात् ॥"""` `शिव पुराण , वायवीय संहिता २.३१.६ ~` `""'शिं करोति शुभं शश्वत् वं करोति च वाञ्छितम् ।` `शिवस्तेन समाख्यातो भक्तानां वाञ्छितप्रदः ॥"""` `अर्थात 👉🏻 "शि" सदैव शुभ करता है , "व" वाञ्छित फल देता है , इसलिए भक्तों के वाञ्छित-प्रदाता को "शिव" कहते हैं ।` `लिंगपुराण पूर्व ६५.९९ ~` `"""शिवः सुखेति धातोश्च वं प्राप्त्यर्थे स्मृतो बुधैः ।` `सुखप्राप्तिकरो यस्मात्तस्मात् शिव इति स्मृतः ॥"""` `अर्थात 👉🏻 शिव धातु "सुख" अर्थ में है , "व" प्राप्ति के अर्थ में है - जो सुख की प्राप्ति कराए वह ही शिव है ।` `महामृत्युंजय मंत्र का "तात" रहस्य –` `ऊपर जो लिखा गया है कि – "तात = चरणों में स्पर्श" ☝🏻यह तन्त्र का गुह्यतम भाव है ।` `"मा" अर्थात – माँग , "मृ" अर्थात – मृत्युंजय , "तात" अर्थात – हे तात , हे पिता` 👉🏻 `मृत्युंजय शिव से प्रार्थना` 👉🏻 `"मुझे अमृत से वंचित न करो , मैं आपके चरणों में पड़ा तात हूँ ।"` `📿रुद्रयामल तंत्र –` `"""तकारः शरणं प्रोक्त आकारः शरणागतः ।` `तातः शरण्य इत्युक्तः शिवो मे शरणं गतः ॥"""` `अर्थात 👉🏻 तात शब्द ही शरणागति है – महामृत्युंजय मंत्र की पूर्णाहुति एक मात्र "समर्पण" है ।` `पंचवक्त्र का आज के दिन से सम्बन्ध –` `🧘🏻‍♂️आज गुरु पुष्य योग है एवं ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि – रम्भा तीज है तथा – दोनों में ही "अनुग्रह" तत्त्व प्रधान है ।` `पंचवक्त्र के ५ मुख अर्थात – पंचकृत्य , औऱ गुरु भी ५ कार्य करता है –` `१. सद्योजात – शिष्य का द्विजत्व – परिणामतः नया जन्म` `२. वामदेव – सौन्दर्य-ज्ञान से स्थिति` `३. अघोर – पाप-संहार` `४. तत्पुरुष – माया का तिरोभाव` `५. ईशान – अनुग्रह – शिवत्व प्रदान करना` `इसीलिए ही तो कहा गया है –` `"""गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः""" – चित्र में तीनों एक हैं ।` `शिव-शब्द , शिव-मन्त्र , शिव-चित्र - तीनों का दर्शन करें औऱ "त्र्यम्बक-कृपा" के अनुभव को सर्वत्र प्रसारित देखें ।` `☝🏻"""शिव इत्यक्षरं नाम""" - सदैव स्मरण रखें , यह महामन्त्र ही पर्याप्त है ।` `जहाँ शिव-चर्चा , शिव-नाम , शिव-स्वरूप का चिंतन – वहाँ स्वयं त्र्यम्बक उपस्थित ।` `आप समस्त – इस "शिव-ज्ञान-यज्ञ" में यह आहूतियां स्वीकार करें 🙏🏻🌼` `🌄🌄 शिवोऽहम् शिवोऽहम् 🌄🌄©®`
Aayush Gupta
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5 दिन पहले
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|| महादेव || 🔱✨ 🎵 नमामी शमिशान ।१। । अनन्त • निराकार • निर्वाण । भोलेनाथ की कृपा सब पर बनी रहे। 🕉️ हर हर महादेव 🪬🔱 #सनातनधर्म #महादेव #रुद्राष्टकम #हरहरमहादेव #शिव #आओ चले शिव की ओर।