hinduekta

Rajesh Dogra
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10 hours ago
🔱🙏 हर हर महादेव! 🙏🔱 जहाँ महाकाल का आशीर्वाद हो, वहाँ भय, चिंता और बाधाएँ स्वयं दूर हो जाती हैं। भोलेनाथ की कृपा से जीवन में सुख, शांति, शक्ति और समृद्धि का वास हो। 🕉️✨ “काल भी जिसके अधीन है, वो हैं हमारे महाकाल।” ❤️🔱. #HarHarMahadev #Mahakal #Bholenath #ShivBhakt #Mahadev 🙏🕉️🔱**#hindu
Masoom se junoon - voice of strength
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1 days ago
#bhagwadgeeta #गीता संदेश #Sanatan dharam . #hinduekta #justice धर्म का अर्थ नफ़रत नहीं, बल्कि सत्य और न्याय के साथ खड़ा होना है गीता का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना युगों पहले 💭 गीता का कौन-सा उपदेश आपको जीवन में सबसे अधिक प्रेरित करता है? 🚩 Masoom Se junoon -Voice of strength ©️ Monica Bharti Original content Like ❤️ Comment 💬 Share 🔄 follow 👤
Pradeep Singh
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5 days ago
💔🔥 “जिसे अर्जुन सबसे बड़ा भक्त समझते थे… वही भगवान को सबसे ज़्यादा कष्ट देने वाला निकला!” 😳⚔️ “कभी-कभी भगवान के सबसे करीब होने का घमंड… इंसान को सबसे दूर कर देता है!” 🕉️👑 “भक्ति में नाम बड़ा नहीं होता… त्याग और प्रेम बड़ा होता है!” =========>>>>>> प्रभु श्रीकृष्ण के सबसे बड़े भक्त एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। उनकी इस भावना को भगवान श्रीकृष्ण ने समझ लिया। अर्जुन का अहंकार तोड़ने के लिए एक दिन भगवान उन्हें अपने साथ घुमाने ले गए। भ्रमण करते समय उन दोनों की मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई। उस ब्राह्मण का व्यवहार थोड़ा विचित्र था। वह सूखी घास खा रहा था और उसकी कमर से एक तलवार लटक रही थी। अर्जुन हैरान हो गया। उसने उस ब्राह्मण से पूछा, “आप तो अहिंसा के पुजारी हैं। जीव हिंसा न हो, इसलिए सूखी घास खाकर अपना गुजारा करते हैं। लेकिन फिर हिंसा का यह साधन तलवार आपके साथ क्यों है?” यह प्रश्न सुन कर ब्राह्मण ने जवाब दिया, “मैं कुछ लोगों को दंड देना चाहता हूँ।” अर्जुन ने उत्सुक होकर फिर प्रश्न किया, “हे महाभाग! आपके शत्रु कौन हैं?” ब्राह्मण ने उत्तर दिया, “मैं चार लोगों को ढूंढ रहा हूँ, जिन्होंने मेरे भगवान को परेशान किया है, ताकि उन्हें उनके कर्मों का दंड दे सकूं।” अर्जुन ने फिर पूछा, “वे चार लोग कौन हैं?” ब्राह्मण ने कहा, “सबसे पहले तो मुझे नारद की तलाश है। नारद मेरे प्रभु को विश्राम नहीं करने देते, हमेशा भजन-कीर्तन करके उन्हें जगाए रखते हैं। उसके बाद मैं द्रौपदी से भी अत्यंत नाराज हूँ। उसने मेरे प्रभु को ठीक उसी समय पुकार लिया, जब वह भोजन करने बैठे थे। उन्हें उसी समय भोजन छोड़कर उठना पड़ा, ताकि पांडवों को महर्षि दुर्वासा ऋषि के श्राप से बचा सकें। इतना ही नहीं, द्रौपदी ने मेरे आराध्य को जूठा भोजन खिलवा दिया।” “आपका तीसरा शत्रु कौन है?” अर्जुन ने पूछा। ब्राह्मण ने उत्तर दिया, “वह है हस्तक्षेप प्रह्लाद। उस दुष्ट के कारण मेरे भगवान को गरम तेल के कड़ाहे में प्रवेश करना पड़ा, हाथी के पैरों तले कुचलना पड़ा और अंत में खंभे से प्रकट होने के लिए विवश होना पड़ा।” “और मेरा चौथा शत्रु है अर्जुन। उसका दुस्साहस तो देखिए, उसने तो मेरे भगवान को अपना सारथी ही बना डाला। उसे भगवान की असुविधा का थोड़ा भी ध्यान नहीं रहा। इससे कितना कष्ट हुआ होगा मेरे आराध्य भगवान श्रीकृष्ण को!” यह सब बताते-बताते उस गरीब ब्राह्मण की आँखों से आँसू बहने लगे। उस गरीब ब्राह्मण की ऐसी निस्वार्थ भक्ति देखकर अर्जुन का सारा अहंकार पानी की तरह बह गया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगते हुए कहा, “मेरी आँखें खुल गई प्रभु, इस जगत में न जाने आपके कैसे-कैसे अद्भुत भक्त हैं। मैं तो उनके आगे कुछ भी नहीं हूँ।” =====>>> 🙏✨ #ShriKrishna #Bhakti #KrishnaBhakt #SanatanDharma #Hinduism #Spirituality #Motivation #LifeLessons #Karma #ViralStory 🌼🕉️ कभी-कभी सबसे बड़ा भक्त वही होता है… जिसे दुनिया पहचान भी नहीं पाती। अहंकार टूटते ही अर्जुन को समझ आया कि सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं, भगवान के दर्द को अपना दर्द मानने से होती है। 💔 “भगवान के सबसे करीब होने का घमंड… कहीं आपको उनसे दूर तो नहीं कर रहा?” ❓ क्या सच्ची भक्ति में अधिकार बड़ा होता है या समर्पण? 📊🙏 क्या अर्जुन का अहंकार टूटना जरूरी था? 🔹 हाँ, तभी सच्ची भक्ति समझ आई 🌸 🔹 नहीं, अर्जुन पहले से महान थे ⚔️ 🔹 सच्चा भक्त वही जो निस्वार्थ हो 🕉️ 🔹 भगवान सबकी भक्ति अलग तरह से स्वीकारते हैं 💖 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🔊सुन्दर कांड🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #hindu
Pradeep Singh
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10 days ago
मंदिर में 'खुली' आँखों से क्या देखते हैं? 🤫 जब वो 'निहारते' हैं, तो आपकी कौन सी चीज़ 'बड़ी' हो जाती है? 👀 कुछ लोग 'अंदर' जाकर भी 'बाहर' ही रह जाते हैं... जानिए क्यों! ​=========>>>>>> दर्शन कैसे करें ? ​हम लोगों को दर्शन करना नहीं आता ! हम मन्दिर में जाकर कहते हैं-'वाह ! बड़ी अच्छी मार्बल की मूर्ति है, सोने-चाँदी की मूर्ति है, काष की मूर्ति है।' वहाँ जाकर भगवान् का दर्शन करना चाहिए न की जड़-वस्तुओं का। सस्ते में जो नहीं देखना चाहिए, वो तो देखते चले जाते हैं। दूसरों के गुणदोष और भगवान् के सामने प्रेमपूर्वक दर्शन करके दृष्टि को कृतार्थ करना चाहिए तो वहाँ आँख मूंद के खड़े हो जाते हैं। यथा दुर्भाव है ! कितनी सुन्दर झाँकी है, फिर भी आँख मुंदकर खड़े हैं। आँख मुंदकर खड़े हैं तो वो भी किसी निष्काम भाव से प्रार्थना करने नहीं वल्कि-'है भगवन ! वहाँ से चलकर हम यहाँ तक आए हैं। हमें अमुक-अमुक वस्तुओं की आवश्यकता है, आप ये दे दीजिये, ये दे दीजिये।' बस पूरी लिस्ट बाँचर सुनाई, फिर प्रणाम किया और चले आए। फिर दुबारा मुड़कर देखा ही नहीं। ये दर्शन दत्तचित्त नहीं है। निहारो, ठाकुरजी को निहारो। चरण से लेकर मुख पर्यन्त और मुख से लेकर चरण पर्यन्त। बार बार छवि को निहारो। जरूरी नहीं की १०-२० मन्दिरों में जाए, एक जगह दर्शन करो लेकिन निहारो और जब प्रेमपूर्वक ठाकुरजी को आप निहारने लग जायेंगे तो मन्दिरों में ही नहीं आपके घर के ठाकुरजी में ही आपको विविध अनुभूतियाँ होने लगेंगी। कभी लगेगा हमारे ठाकुरजी आज थोड़े गंभीर हैं, कभी लगेगा आज थोड़े अगमने से हैं, कभी लगेगा नजर से नजर तो मिलती है लेकिन ये शरमा रहे हैं। और फिर तन्मयता बढ़ेगी तो वे बातचीत भी करने लगेंगे। ​राधे राधे =========>>>>>> ​🔥 #pradiptgyan ✨ #krishnadarshan 🙏 #radheradhe 🌻 #spiritualgrowth 🎯 #morningmotivation Trending: #reelsindia #love Viral: #shortvideo #explorepage ​🥰 मंदिर में आँखें बंद करने वालों के लिए एक ज़रूरी सबक! 🙏 अगर आप भी मंदिर जाकर सिर्फ अपनी 'लिस्ट' सुनते हैं, तो आप बहुत कुछ 'मिस' कर रहे हैं। सच्चा दर्शन क्या है और उसे कैसे पाएँ, यह कहानी खोल देगी आपकी आँखें। प्रेम से बोलिए, राधे राधे! ​👀 क्या आप भी मंदिर में वही 'एक' गलती करते हैं? हम सब मंदिर जाते हैं, लेकिन क्या हम सच में 'देखते' हैं? अगली बार जब आप दर्शन करने जाएँ, तो आँखें बंद न करें, बल्कि यह करें—और देखिए चमत्कार! ​🗳️ क्या आपने कभी ठाकुरजी से बात की है? 👍 हाँ, बहुत बार! 😐 नहीं, कभी नहीं। #hindu #🔊सुन्दर कांड🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
Pradeep Singh
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10 days ago
🔥 समुद्र मंथन सिर्फ देवताओं ने नहीं किया था… कुछ लोग आज भी अपने अंदर का ज़हर घोल रहे हैं 😈💔 जिसने “रस्सी” पकड़ी, वही सबसे ज़्यादा तड़पा… असली दर्द हमेशा बीच वाले को ही होता है 🐍🔥 =========>>>>>> "समुद्र मंथन कहाँ हुआ था? यदि स्थूल दृष्टि से देखें तो शायद अरब सागर में कहीं। लेकिन ऐसा नहीं है। किसी भी घटना के सही स्थान का पता करने हेतु उस समय की भौगौलिक स्थिति का पता होना भी जरूरी है। ग्रंथों में गहरे घुसेंगे तो पता चलेगा कि बिहार, बंगाल, झारखण्ड, उड़ीसा आदि समुद्र मंथन के समय जलमग्न थे। उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से भी उस समय थे नहीं। समुद्रमंथन का समय भागीरथी के प्रादुर्भाव से भी बहुत पहले का है। उस समय हिमालय से निकलने वाली नदियाँ बहुत थोड़ी ही भूमि का निर्माण कर पाई थी। नदियाँ ही भूमि का निर्माण करती हैं। इस राष्ट्र के पिता पर्वत हैं तो माताएँ नदियाँ। अभी भी सबसे प्रसिद्ध डेल्टा सुंदरवन इसी निर्माण का प्रमाण है। कथा है कि जब समुद्रमंथन की बात उठी तो मंदार पर्वत की मथानी तो बना ली गई, कूर्मावतार ने आधार भी दे दिया, लेकिन मथानी की रस्सी कहाँ से लाएँ। उस समय सर्वसम्मति बनी कि हिमालय की कंदराओं में आराम कर रहे नागराज वासुकि से ही यह काम करवाया जा सकता है। उनसे बड़ी रस्सी जैसी कोई वस्तु तीनों लोक और चौदहों भुवन में नहीं हैं। अब समस्या थी कि उन्हें लाए कौन? इतने बड़े थे कि लहरिया स्टाइल में रेंगते तो टकराने लगते। इसलिये अधिकतर समय आराम ही करते थे। इस पर कैलाशपति उठे और वासुकि को अपनी कलाई में लपेट कर चल दिये। नागराज की डिलीवरी करके भोले एक स्थान पर बैठ गए। जब मंथन प्रारम्भ हुआ तो नागराज को पीड़ा होने लगी। इधर से देवता खींचें, उधर से असुर खींचें, बीच में मंदराचल चुभे। क्षुब्ध होकर नागराज से फुफकारना शुरू कर दिया। अब सोचिये कि जिस नाग को एक पर्वत के चारों तरफ लपेट दिया गया, वह कितना बड़ा होगा। नागराज के फुफकारने से समस्त सृष्टि में जहर फैलने लगा। हाहाकार मच गया। एक तरफ तो देवता और असुर भाग खड़े हुए और दूसरी तरह नागराज निढाल होकर फुफकारते रह गए। अब करें तो करें क्या? देवताओं की मीटिंग बिठाई गई। प्रश्न उठा कि इस हलाहल को कौन पियेगा? विष्णु भगवान ने भोले बाबा के चरण धर लिये कि बाबा आप ही पी सकते हैं। जो भोले होते हैं, उनके हिस्से ही जहर आता है। बाबा उठे और पहले जहर पिया और फिर वासुकि का उपचार किया। तब तक तो धन्वंतरि निकले भी नहीं थे। उनसे भी पुराने वैद्य हैं वैद्यनाथ। बाबा ने हलाहल पी तो लिया, लेकिन उसका ताप असह्य हो गया। वहीँ एक स्थान देखकर बैठ गए। मंथन शुरू हो गया। मंथन से निकले चन्द्रमा के एक टुकड़े को तोड़ कर निकाला गया और उसे भगवान के सर के ठीक ऊपर स्थापित किया गया। उस टुकड़े से निरंतर शीतल जल महादेव के सर पर गिरता रहता है। यह क्षेत्र कहाँ है जहाँ मंथन हुआ था? बिहार के बाँका जिले में स्थित मंदार पर्वत के आसपास का क्षेत्र ही मंथन का स्थान है। आज भी झारखण्ड, बंगाल, उड़ीसा और बिहार की भूमि में खनिजों का प्रचुर भण्डार है। सबका केंद्र मंदार पर्वत ही है। मंदार में अब भी समुद्र मंथन से निकली निधियाँ छिपी हुई हैं। भोलेनाथ नागराज को पहुँचाने के बाद जिस स्थान पर बैठे थे, वह स्थान है वासुकीनाथ। जिस स्थान पर नागराज का उपचार करने व विष ग्रहण करने के बाद बैठे थे, वह स्थान है वैद्यनाथ धाम, देवघर में। चाँद का वह टुकड़ा जो उनके सर पर लगाया गया था, आज भी लगा है और उससे निरंतर जल टपकता रहता है। वह टुकड़ा भोलेनाथ के ठीक ऊपर मंदिर के शिखर के नीचे लगा है। नाम है - चंद्रकांत मणि।" =======>> 🔥⚡💰 #viral #trending #highrpm #mythologyfacts #hindustories #spiritualviral #ancientindia #bhagwanstories #deeptruth #mysteryfacts 📖🔥 सच यही है कि हर इंसान के जीवन में एक “समुद्र मंथन” चलता है… कोई अमृत पाता है, तो कोई ज़हर पीकर ही महान बनता है 💔✨ ❓🔥 जो सबसे ज्यादा खींचा जाता है, वही सबसे ज्यादा टूटता भी है… क्या आपकी जिंदगी में भी कोई “मंथन” चल रहा है? 🤯 सीख: जो भोले होते हैं, वही दुनिया का ज़हर पीते हैं… लेकिन वही सबसे महान भी बनते हैं 🙏🔥 📊🗳️ क्या समुद्र मंथन की ये सच्चाई आपको पहले पता थी? 👉 हाँ, पहले से पता था 😮 👉 नहीं, आज पहली बार जाना 🤯 👉 ये कहानी सोचने पर मजबूर कर गई 😶 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🔊सुन्दर कांड🕉️ #hindu