होलाष्टक

Astro IPS Energy
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1 months ago
*ॐ नमः शिवाय* *🍁 होलाष्टक 🍁* 24 फरवरी मंगलवार से लेकर होली दहन तक होलाष्टक के दिन रहेंगे। *होलाष्टक का अर्थ* * धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि, होलाष्टक के इन आठ दिनों में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस दौरान किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। *इन दिनों में ग्रहों का भी होता है, उग्र प्रभाव-:* * इसके अतिरिक्त ज्योतिष मान्यता के अनुसार कहा जाता है की होलाष्टक के दिनों में अष्टमी तिथि के दिन चंद्रमा, नवमी तिथि के दिन सूर्य, दशमी तिथि के दिन शनि, एकादशी तिथि के दिन शुक्र, द्वादशी तिथि के दिन गुरु, त्रयोदशी तिथि के दिन बुध, चतुर्दशी तिथि के दिन मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र अवस्था में रहते हैं। ऐसे में इस दौरान अगर कोई भी मांगलिक कार्य किया जाए तो इससे व्यक्ति के जीवन में तमाम तरह की परेशानियां, बाधाएँ, रुकावटें और समस्या आने की आशंका बढ़ जाती है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ग्रहों के स्वभाव में उग्रता आने के चलते इस दौरान अगर कोई व्यक्ति शुभ कार्य करता भी है या ऐसा कोई फैसला लेता भी है तो वह शांत मन से नहीं ले पाता है और यही वजह है कि उनके द्वारा लिए गए फैसले अक्सर गलत साबित होते हैं या उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। *ज्योतिषीय सिद्धांत-:* * ज्योतिष के अनुसार माना जाता है कि होलाष्टक की इस समयावधि में उन जातकों को विशेष रूप से सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, जिनकी जन्म कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता हैं, चंद्रमा किसी अशुभ योग में व अशुभ प्रभाव में हो या फिर चंद्रमा छठे, आठवें, बारहवें भाव में होता हैं। *होलाष्टक व धार्मिक मान्यताएं-:* * धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के 8 दिन वह दिन होते हैं जब हिरनकश्य ने भक्त प्रहलाद को 8 दिनों तक कठोर यातनाएं दी थी। इसलिए इन दिनों में किसी भी तरह के मांगलिक कार्य शुभ नहीं माने जाते। *वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार-:* * फाल्गुन शुक्ल पक्ष के दौरान मौसम परिवर्तन हो जाता है और जिससे बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। इसलिए इस समय अधिक सावधानी रखना बताया गया है। *होलाष्टक के दिनों में क्या करना चाहिए-:* * जिस तरह से भक्त प्रहलाद ने भगवान विष्णु की उपासना- जप- स्तुति इत्यादि करते हुए भगवान श्री विष्णु की भक्ति व आशीर्वाद के अधिकारी बने थे और भगवान ने प्रहलाद के सभी कष्टों का निवारण किया था। इसी तरह होलाष्टक के इन दिनों में सभी उपासकों को भगवान की उपासना- स्तुति- नाम जप- मंत्र जप- कथा श्रवण इत्यादि करना चाहिए। 🙏🏼 *Astro IPS Energy* *ज्योतिष एवं वास्तु समाधान संस्थान* *कुंडली विश्लेषण । हस्तरेखा विश्लेषण । अंक ज्योतिष । वास्तु विश्लेषण | उच्च स्तरीय लैब द्वारा प्रमाणित नेचुरल रत्न (Gemstones)* http://wa.me/+919819331431 Facebook - https://www.facebook.com/astroips?mibextid=ZbWKwL Instagram - https://www.instagram.com/astro.ips @Astro IPS Energy #होलाष्टक #होली #🔯कुंडली दोष #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #ज्योतिष
sn vyas
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1 months ago
#😊होली स्पेशल 🤘 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌷होलाष्टक🌷 #होलाष्टक पर जानकारी #होलाष्टक . “होलाष्टक” वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी को लगेगा, और यह 03 मार्च 2026 तक रहेगा। यह 8 दिनों का होता है, तथा इस काल में किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। भारतीय मुहूर्त विज्ञान व ज्योतिष शास्त्र प्रत्येक कार्य के लिए शुभ मुहूर्तों का शोधन कर उसे करने की अनुमति देता है। कोई भी कार्य यदि शुभ मुहूर्त में किया जाता है, तो वह उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है। इस धर्म धुरी से भारतीय भूमि में प्रत्येक कार्य को सुसंस्कृत समय में किया जाता है, अर्थात्‌ ऐसा समय जो उस कार्य की पूर्णता के लिए उपयुक्त हो। इस प्रकार प्रत्येक कार्य की दृष्टि से उसके शुभ समय का निर्धारण किया गया है। जैसे गर्भाधान, विवाह, पुंसवन, नामकरण, चूड़ाकरन, विद्यारम्भ, गृह प्रवेश व निर्माण, गृह शान्ति, हवन यज्ञ कर्म, स्नान, तेल मर्दन आदि कार्यों का सही और उपयुक्त समय निश्चित किया गया है। इस प्रकार होलाष्टक को ज्योतिष की दृष्टि से एक होलाष्टक दोष माना जाता है, जिसमें विवाह, गर्भाधान, गृह प्रवेश, निर्माण, आदि शुभ कार्य वर्जित हैं। इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी मंगलवार से प्रारम्भ हो रहा है, जो 03 मार्च होलिका दहन (फाल्गुन पूर्णिमा) के साथ ही समाप्त हो जाएगा, अर्थात्‌ आठ दिनों का यह होलाष्टक दोष रहेगा। जिसमें सभी शुभ कार्य वर्जित है। इस समय विशेष रूप से विवाह, नए निर्माण व नए कार्यों को आरम्भ नहीं करना चाहिए। ऐसा ज्योतिष शास्त्र का कथन है। अर्थात्‌ इन दिनों में किए गए कार्यों से कष्ट, अनेक पीड़ाओं की आशंका रहती है, तथा विवाह आदि सम्बन्ध विच्छेद और कलह का शिकार हो जाते हैं, या फिर अकाल मृत्यु का खतरा या बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। होलाष्टक से तात्पर्य है कि होली के 8 दिन पूर्व से है अर्थात धुलण्डी से आठ दिन पहले होलाष्टक की शुरुआत हो जाती है। इन दिनों शुभ कार्य करने की मनाही होती हैं। हिन्दू धर्मो के 16 संस्कारों को न करने की सलाह दी जाती है। क्या करते हैं होलाष्टक में माघ पूर्णिमा से होली की तैयारियाँ शुरु हो जाती हैं। होलाष्टक आरम्भ होते ही दो डण्डों को स्थापित किया जाता है, इसमें एक होलिका का प्रतीक है और दूसरा प्रह्लाद से सम्बन्धित है। ऐसा माना जाता है कि होलिका से पूर्व 8 दिन दाह-कर्म की तैयारी की जाती है। यह मृत्यु का सूचक है। इस दुःख के कारण होली के पूर्व 8 दिनों तक कोई भी शुभ कार्य नही होता है। जब प्रह्लाद बच जाता है, उसी खुशी में होली का त्योहार मनाते हैं। ग्रन्थों में उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव की तपस्या को भंग करने के अपराध में कामदेव को शिव जी ने फाल्गुन की अष्टमी में भस्म कर दिया था। कामदेव की पत्नी रति ने उस समय क्षमा याचना की और शिव जी ने कामदेव को पुनः जीवित करने का आश्वासन दिया। इसी खुशी में लोग रंग खेलते हैं। ॥जय जय श्री राधे॥
Deovrat Ojha
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1 months ago
जय सर्वजन समाज जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम। #होलाष्टक
Deovrat Ojha
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1 months ago
जय सर्वजन समाज जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम। #होलाष्टक
Deovrat Ojha
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1 months ago
जय सर्वजन समाज जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम। #होलाष्टक