पूजन विधि

Deovrat Ojha
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4 days ago
जय सर्वजन समाज जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम। #मंगलागौरी पूजा विधि
sn vyas
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8 days ago
#sahi aachran सही आचरण 🙏🏻🙏🏻🌹🌹🙏🏻🙏🏻गलत पूजा पाठ न करें 🙏🙏🌹🌹🙏🏻🙏🏻एक कदम मोक्ष की ओर #पूजा पाठ #🙏सुबह की पूजा पाठ💐 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 🌺 सुप्रभातम . 🍁 #पञ्चदेवोपासना 🍁 शास्त्रीय प्रमाणों से पंचदेवों की उपासना सम्पूर्ण कर्मों में प्रख्यात है। 'शब्दकल्पद्रुम' कोश में लिखा है- * *आदित्यं गणनाथं च देवीं रुद्रं च केशवम् ।* * *पञ्चदैवतमित्युक्तं सर्वकर्मसु पूजयेत् ॥* पंचदेवों की उपासना का रहस्य पंचभूतों के साथ सम्बन्धित है। पंचभूतों में पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश प्रख्यात हैं और इन्हीं के आधिपत्य के कारण से *आदित्य, गणनाथ (गणेश), देवी, रुद्र और केशव* - ये पंचदेव भी पूजनीय प्रख्यात हैं। एक-एक तत्त्व का एक-एक देवता स्वामी है— * *आकाशस्याधिपो विष्णुरग्नेश्चैव महेश्वरी ।* * *वायोः सूर्यः क्षितेरीशो जीवनस्य गणाधिपः ॥* क्रम निम्न प्रकार है- *महाभूत* *अधिपति* * *१- क्षिति (पृथ्वी)* *शिव* * *२- अप् (जल)* *गणेश* * *३- तेज (अग्नि)* *शक्ति (महेश्वरी)* * *४-मरुत् (वायु)* *सूर्य (अग्नि)* * *५- व्योम (आकाश )* *विष्णु* यह विषय गम्भीरता से मननीय तथा गवेषणीय है। इस विषय में अल्प ही संकेत दिये जा सकते हैं । *भगवान् श्रीशिव के पृथ्वीतत्त्व के अधिपति होनेके कारण उनकी पार्थिव पूजा का विधान है। भगवान् विष्णु के आकाशतत्त्व के अधिपति होने के कारण उनकी शब्दों द्वारा स्तुति का विधान है। भगवती देवी के अग्नितत्त्व का अधिपति होने के कारण उनका अग्निकुण्ड में हवनादि के द्वारा पूजा का विधान है। श्रीगणेशजी के जलतत्त्व के अधिपति होने के कारण उनकी सर्वप्रथम पूजा का विधान है।* मनु का कथन है- `'अप एव ससर्जाऽऽदौ तासु बीजमवासृजत्।'` (मनुस्मृति १/८ ) इस प्रमाण से सृष्टि के आदि में एकमात्र जल के अधिपति गणेश हैं। अतः जितने भी अनुष्ठान किये जायँ, उनके आरम्भ में गणेश-पूजन अत्यन्त आवश्यक है। *सूर्य के वायुतत्त्व के अधिपति होनेके कारण प्राण की रक्षा के लिये* `‘सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च'` (यजुर्वेद ७/४२) *इस प्रमाण से नमस्कारादि द्वारा पूजन का विधान है।* *_जय श्री हरि विष्णु_*🌺 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻