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सोम प्रदोष व्रत कथा #पूजन विधि
सोम प्रदोष व्रत कथा, पूजन विधि
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    देवशयनी एकादशी #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
    देवशयनी एकादशी, शुभ मुहूर्त
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    श्रावण शिवरात्रि #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
    श्रावण शिवरात्रि, शुभ मुहूर्त
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    द्वितीय मंगला गौरी व्रत #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
    11-08-26 द्वितीय मंगला गौरी व्रत मंगलवार सावन का महीना जहां शिव भक्ति और पूजन से जुड़ा है वहीं इस महीने में देवी पार्वती की भी विधिवत पूजा की जाती है। मंगला गौरी, आदि शक्ति माता पार्वती का ही मंगल रूप हैं इन्हें मां दुर्गा के  महागौरी के नाम से भी जाना जाता है । आठवें स्वरूप  मंगला गौरी व्रत सावन के हर मंगलवार को रखा जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से महिलाओं को भगवान सुहागिन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिव और माता पार्वती मंगला गौरी पूजा में १६ की संख्या का बहुत महत्व है, इसलिए पूजा में जहां दीपक १६ बत्तियों वाला जलाना चाहिए तो वहीं मां को १६ चीजों का भोग भी लगाना चाहिए।
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    कोकिला व्रत #पूजन विधि
    कोकिला व्रत, पूजन विधि
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    सूर्य ग्रहण #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
    8 12 3 सूर्य ग्रहण 2026 सूर्य ग्रहण १२ अगस्त २०२६, बुधवार को श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा| यह ग्राहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ग्रहण के दौरान भगवान का स्मरण , सूर्य मंत्र का जाप, ध्यान और दान-पुण्य करना सूर्यदेव शुभ माना जाता है। यह समय आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए उत्तम है। ग्रहण के बाद स्नान और शुद्धि करने की धार्मिक परंपरा है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा जीवन में सुख, स्वास्थ्य , समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। 3 31೯ನೌ #೫: Il 8 12 3 सूर्य ग्रहण 2026 सूर्य ग्रहण १२ अगस्त २०२६, बुधवार को श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा| यह ग्राहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ग्रहण के दौरान भगवान का स्मरण , सूर्य मंत्र का जाप, ध्यान और दान-पुण्य करना सूर्यदेव शुभ माना जाता है। यह समय आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए उत्तम है। ग्रहण के बाद स्नान और शुद्धि करने की धार्मिक परंपरा है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा जीवन में सुख, स्वास्थ्य , समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। 3 31೯ನೌ #೫: Il
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    हरियाली अमावस्या #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
    हरियाली अमावस्या, शुभ मुहूर्त
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    सोम प्रदोष व्रत #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
    सोम प्रदोष व्रत, शुभ मुहूर्त
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    शिवरात्रि #पूजन विधि
    ఇగ ffa शिवरात्रि के एक दिन पहले, मतलब त्रयोदशी तिथि के दिन, भक्तों को केवल एक समय ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। शिवरात्रि के दिन, सुबह नित्य कर्म करने के पश्चात् भक्त गणों को पुरे दिन के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प के दौरान, भक्तों को मन ही मन अपनी प्रतिज्ञा दोहरानी चाहिए और भगवान शिव से व्रत को निर्विघ्न रूप से हिन्दु पूर्ण करने हेतु आशीर्वाद मांगना चाहिए। धर्म में व्रत कठिन होते है, भक्तों को उन्हें पूर्ण करने हेतु श्रद्धा व विश्वास रखकर अपने आराध्य देव से उसके निर्विघ्न पूर्ण होने की कामना करनी चाहिए। शिवरात्रि के दिन भक्तों को सन्ध्याकाल स्नान करने के पश्चात् ही पूजा करना चाहिए या मन्दिर जाना चाहिए। शिव भगवान की पूजा रात्रि के समय करना चाहिए एवं अगले दिन स्नानादि के पश्चात् अपना व्रत तोड़ना चाहिए। व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु, भक्तों को सूर्योदय व तिथि के अस्त होने के मध्य के समय में ही व्रत का समापन चतुर्दशी करना चाहिए। लेकिन, एक अन्य धारणा के अनुसार, व्रत के समापन तिथि के पश्चात् का बताया गया है। दोनों ही का सही समय সনুতহীী अवधारणा परस्पर विरोधी हैं। लेकिन, ऐसा माना जाता है की, शिव पूजा और पारण (व्रत का समापन) , दोनों चतुर्दशी तिथि अस्त होने से पहले करना चाहिए। ఇగ ffa शिवरात्रि के एक दिन पहले, मतलब त्रयोदशी तिथि के दिन, भक्तों को केवल एक समय ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। शिवरात्रि के दिन, सुबह नित्य कर्म करने के पश्चात् भक्त गणों को पुरे दिन के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प के दौरान, भक्तों को मन ही मन अपनी प्रतिज्ञा दोहरानी चाहिए और भगवान शिव से व्रत को निर्विघ्न रूप से हिन्दु पूर्ण करने हेतु आशीर्वाद मांगना चाहिए। धर्म में व्रत कठिन होते है, भक्तों को उन्हें पूर्ण करने हेतु श्रद्धा व विश्वास रखकर अपने आराध्य देव से उसके निर्विघ्न पूर्ण होने की कामना करनी चाहिए। शिवरात्रि के दिन भक्तों को सन्ध्याकाल स्नान करने के पश्चात् ही पूजा करना चाहिए या मन्दिर जाना चाहिए। शिव भगवान की पूजा रात्रि के समय करना चाहिए एवं अगले दिन स्नानादि के पश्चात् अपना व्रत तोड़ना चाहिए। व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु, भक्तों को सूर्योदय व तिथि के अस्त होने के मध्य के समय में ही व्रत का समापन चतुर्दशी करना चाहिए। लेकिन, एक अन्य धारणा के अनुसार, व्रत के समापन तिथि के पश्चात् का बताया गया है। दोनों ही का सही समय সনুতহীী अवधारणा परस्पर विरोधी हैं। लेकिन, ऐसा माना जाता है की, शिव पूजा और पारण (व्रत का समापन) , दोनों चतुर्दशी तिथि अस्त होने से पहले करना चाहिए।
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    कामिका एकादशी #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
    कामिका एकादशी, शुभ मुहूर्त
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