लोकप्रिय समाजवादी जननेता एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री रहे स्व चन्द्रशेखर जी की जयंती पर मैं आप को कोटिशः नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।श्री चन्द्रशेखर जी का जन्म 17 अप्रैल 1927 ई को उत्तर प्रदेश के बागी बलिया जिले में स्थित इब्राहिमपट्टी गांव में एक किसान परिवार में हुआ था।आप ने कहा था कि, " नफरत की राजनीति से केवल सरकार बनाई जा सकती है देश नहीं।आप न तो केंद्र में मंत्री बने न ही राज्य मंत्री।आप बिना इन पदों को ग्रहण किए बिना सीधे देश के प्रधानमंत्री बने।आप ने राष्ट्रीय मसलों और जनता के सवालों पर सत्ता धारी सरकारों का विरोध किया और आवश्यक सहयोग भी।आप 1951 में सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकता बन गये।आप ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डीग्री प्राप्त की।आप 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।आप एक ऐसे ‘युवा तुर्क’ नेता के रूप में सामने आए जिसने दृढ़ता,साहस एवं ईमानदारी के साथ निहित स्वार्थ के खिलाफ लड़ाई लड़ी।आप 1969 में दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘यंग इंडियन’ के संस्थापक एवं संपादक थे।इसका सम्पादकीय अपने समय के विशिष्ट एवं बेहतरीन संपादनों में से एक हुआ करता था।आपातकाल (मार्च 1977 से जून 1975) के दौरान ‘यंग इंडियन’ को बंद कर दिया गया था।फरवरी 1989 से इसका पुनः नियमित रूप से प्रकाशन शुरू हुआ।आप इसके संपादकीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष थे।श्री चन्द्र शेखर अपने छात्र जीवन से ही राजनीति की ओर आकर्षित थे और क्रांतिकारी जोश एवं गर्म स्वभाव वाले वाले आदर्शवादी के रूप में जाने जाते थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1950-51) से राजनीति विज्ञान में अपनी मास्टर डिग्री करने के बाद वे समाजवादी आंदोलन में शामिल हो गए। उन्हें आचार्य नरेंद्र देव के साथ बहुत निकट से जुड़े होने का सौभाग्य प्राप्त था। वे बलिया में जिला प्रजा समाजवादी पार्टी के सचिव चुने गए एक साल के भीतर वे उत्तर प्रदेश में राज्य प्रजा समाजवादी पार्टी के संयुक्त सचिव बने। 1955-56 में वे उत्तर प्रदेश में राज्य प्रजा समाजवादी पार्टी के महासचिव बने।1962 में वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए। वे जनवरी 1965 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। 1967 में उन्हें कांग्रेस संसदीय दल का महासचिव चुना गया। संसद के सदस्य के रूप में उन्होंने दलितों के हित के लिए कार्य करना शुरू किया एवं समाज में तेजी से बदलाव लाने के लिए नीतियाँ निर्धारित करने पर जोर दिया। इस संदर्भ में जब उन्होंने समाज में उच्च वर्गों के गलत तरीके से बढ़ रहे एकाधिकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई तो सत्ता पर आसीन लोगों के साथ उनके मतभेद हुए।
वे एक ऐसे ‘युवा तुर्क’ नेता के रूप में सामने आए जिसने दृढ़ता, साहस एवं ईमानदारी के साथ निहित स्वार्थ के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वे 1969 में दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘यंग इंडियन’ के संस्थापक एवं संपादक थे। इसका सम्पादकीय अपने समय के विशिष्ट एवं बेहतरीन संपादनों में से एक हुआ करता था। आपातकाल (मार्च 1977 से जून 1975) के दौरान ‘यंग इंडियन’ को बंद कर दिया गया था। फरवरी 1989 से इसका पुनः नियमित रूप से प्रकाशन शुरू हुआ। वे इसके संपादकीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष थे।
श्री चन्द्र शेखर हमेशा व्यक्तिगत राजनीति के खिलाफ रहे एवं वैचारिक तथा सामाजिक परिवर्तन की राजनीति का समर्थन किया। यही सोच उन्हें 1973-75 के अशांत एवं अव्यवस्थित दिनों के दौरान श्री जयप्रकाश नारायण एवं उनके आदर्शवादी जीवन के और अधिक करीब ले गई। इस वजह से वे जल्द ही कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष का कारण बन गए।आपातकाल (1975-1977) के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी को आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (MISI) के तहत गिरफ्तार करके जेल में रखा गया था।आप तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी का हिस्सा होने के बावजूद अपनी मुखरता के कारण गिरफ्तार किए गए और अधिकांश समय कारावास में रहे।
#🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌞 Good Morning🌞 ##viral #🥰मोटिवेशन वीडियो #prime minister