shri ganesh

sn vyas
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3 days ago
#श्री गणेश *🪷 श्रीमहागणपति ध्यानम् 🪷* `श्रीमच्छङ्कराचार्य विरचित – प्रपञ्चसार-आगम, सप्तदश-पटल` `कल्पवृक्ष के नीचे विराजमान दशभुज महागणपति का ध्यान` *मन्दाराद्यैः कल्पवृक्षविशेषैर्विशिष्टतरफलदैः ।* *शिशिरितचतुराशेऽन्तर्बालातपचन्द्रिकाकुले च तले ॥५॥* `अर्थात 👉🏻 मन्दार आदि विशिष्ट फल देने वाले कल्पवृक्षों से शीतल , बालसूर्य की उष्मा एवं चन्द्रिका से युक्त दिव्य स्थान में ।` *ऐक्षवजलनिधिलहरौकणजालकवाहिना च गन्धवहेन ।* *संसेविते च सुरतरुसुमनःश्रितमधुपपक्षचलनपरेण ॥६॥* `अर्थात 👉🏻 गन्ने के रस के समुद्र की बूंदों तथा सुगन्ध वाली वायु से , औऱ कल्पवृक्षों के पुष्पों पर गूंजते भौरों से सेवित ।` *रत्नमये मणिवज्रप्रवालफलपुष्पपल्लवस्य सतः ।* *महतोऽधस्तादृतुभिर्युगपत्संसेवितस्य कल्पतरोः ॥७॥* `अर्थात 👉🏻 रत्न , मणि , वज्र , प्रवाल के फल-पुष्प वाले विशाल कल्पवृक्ष के नीचे , जिसे छः ऋतुएं एक साथ सेवित करती हैं ।` *सिंहमुखपादपीठगलिपिमयपद्मे त्रिषट्‌कोणोल्लसिते ।* *आसीनस्त्वेकरदो बृहदुदरो दशभुजोऽरुणो गजवदनः ॥८॥* `अर्थात 👉🏻 सिंहमुख वाले पायों के पीठ पर , अक्षरमय कमल एवं षट्कोण-त्रिकोण पर विराजमान । एकदन्त , विशाल उदर , दशभुज , अरुणवर्ण , गजमुख महागणपति ।` *बीजापूरगदेक्षुकार्मुकरुजाचक्राब्जपाशोत्पल-* *व्रीह्यग्रस्वविषाणरत्नकलशप्रोद्यत्कराम्भोरुहः ।* *ध्येयो वल्लभया च पद्मकरयाश्लिष्टो ज्वलद्भूषया ,* *विश्वोत्पत्तिविनाशसंस्थितिकरो विघ्नो विशिष्टार्थदः ॥९॥* `अर्थात 👉🏻 दाएं हाथ में – बीजापूर , गदा , ईख का धनुष , शूल , चक्र । बाएं हाथ में – कमल , पाश , नीलकमल, धान की बाली , अपना दांत । सूंड में रत्नकलश । ज्वलंत आभूषण वाली पद्महस्ता 'वल्लभा' शक्ति से आलिंगित । विश्व की उत्पत्ति-स्थिति-लय करने वाले , भक्तों को विशिष्ट फल देने वाले ।` *करपुष्करधृतकलशस्त्रुतमणिमुक्ताप्रवालवर्षेण ।* *अविरतधारां विकिरन् परितः साधकसमग्रसम्पत्यै ॥१०॥* `अर्थात 👉🏻 हाथ के कमल में धृत कलश से साधकों पर मणि , मुक्ता , प्रवाल की अविरत वर्षा कर समस्त सम्पत्ति प्रदान करने वाले ।` *मदजलोलुपमधुकरमालां निजकर्णतालताडनया ।* *निर्वासयन् मुहुर्मुहुरमरैरसुरैश्च सेवितो युगपत् ॥११॥* `अर्थात 👉🏻 मदजल के लोभी भौरों को कान हिलाकर हटाते हुए । देव तथा असुर दोनों द्वारा एक साथ सेवित ।` *अग्रेऽथ बिल्वमभितश्च रमारमेशौ तद्दक्षिणे वटजुषौ गिरिजावृषाङ्कौ ।* *पृष्ठेऽथ पिप्पलजुषौ रतिपुष्पबाणौ सव्ये प्रियङ्गुमभितश्च महीवराहौ ॥१२॥* `अर्थात 👉🏻 पूर्व में – बिल्व के समक्ष लक्ष्मी औऱ विष्णु । दक्षिण में – वट के नीचे पार्वती एवं शिव । पश्चिम में – पीपल के नीचे रति एवं कामदेव । उत्तर में – प्रियंगु के समक्ष पृथ्वी तथा वराह ।` *ध्येयौ च पद्मयुगचक्रदरैः पुरोक्तौ पाशाङ्कुशाख्यपरशुत्रिशिखैरथाऽन्यौ।* *युग्मोत्पलेक्षुमयचापशरैस्तृतीया- वन्त्यौ शुकाह्वकलमाग्रगदारथाङ्गैः ॥१३॥* `अर्थात 👉🏻 विष्णु – २ कमल , चक्र, गदा । शिव – पाश , अंकुश , परशु , त्रिशूल । कामदेव – २ कमल , ईख का धनुष व बाण ।ववराह – शुक , धान की बाली, गदा , औऱ चक्र ।` *ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वरवरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥१४॥* `अर्थात 👉🏻 ये महागणपति का मूल तान्त्रिक मन्त्र है । वर देने वाले , सबको वश में करने वाले ।` *चतुरस्रे भूपुरे वज्रे अष्टदले पद्मे षट्कोणे त्रिकोणे च ।* *मध्यगतं बिन्दुस्थं महागणपतिं यन्त्रराजे चिन्तयेत् ॥१५॥* `अर्थात 👉🏻 चौकोर भूपुर , वज्र , ८ दल कमल , षट्कोण , त्रिकोण एवं मध्य बिन्दु वाले यन्त्रराज में महागणपति का ध्यान करें ।` *पूर्वादि दिक्षु क्रमेण लक्ष्मीविष्णू शिवापार्वत्यौ* *रतिकामौ पृथ्वीवराहौ च परिवारदेवताः पूज्याः ॥१६॥* `अर्थात 👉🏻 पूर्वादि दिशा में क्रमशः लक्ष्मी-विष्णु , शिव-पार्वती , रति-कामदेव , तथा पृथ्वी-वराह की आवरण पूजा करें ।` *एवं ध्यात्वा पूजयित्वा जप्त्वा च दशसहस्रम् ।* *सर्वसिद्धिमवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ॥१७॥* `अर्थात 👉🏻 इस प्रकार ध्यान , पूजन औऱ १०००० जप करने से साधक सर्वसिद्धि प्राप्त करता है ।` *पुत्रान्देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ।* *तुभ्यमहं नमस्यामि महागणपते नमः ॥१८॥* `अर्थात 👉🏻 हे महागणपति ! मुझे पुत्र दो , धन दो , मेरी समस्त कामनाएं दो ।` *इदं रहस्यं परमं मया प्रोक्तं तव प्रियम् ।* *गोपनीयं प्रयत्नेन न देयं यस्य कस्यचित् ॥१९॥* `अर्थात 👉🏻 ये परम् रहस्य है । इसे गोपनीय रखें । बिना पात्रता के प्रचार न करें ।` *प्रपञ्चसारस्यास्य पटले सप्तदशे शुभे ।* *महागणपतेः प्रोक्तं ध्यानं पूजाविधिस्तथा ॥२०॥* `अर्थात 👉🏻 प्रपञ्चसार के इस १७वें पटल में महागणपति का ध्यान एवं पूजन विधि कही गई है ।` *सनद रहे🎯🎯🎯 ये तान्त्रिक उपासना है । गुरु दीक्षा से ही जप करें । भाव शुद्ध हो तो एक माला भी करोड़ के बराबर है ।* `ॐ गं गणपतये नमः` `ॐ वक्रतुण्डाय नमः` `गणाधिपतये नमः` `हर हर महादेव🔱` `जय जय शङ्कर🚩` `हर हर शङ्कर🚩` `~ सर्वज्ञ शङ्कर🚩` `🌄🌆 प्रभात वन्दन 🌆🌄` `© सर्वाधिकार सुरक्षित। सर्वज्ञ शङ्कर🚩 चैनल` `#सर्वज्ञ_शङ्कर` `#प्रपञ्चसार` `#शङ्कराचार्य` `#महागणपति` `#तन्त्र` `#गणेश_ध्यान` `#दशभुज_गणपति`
sn vyas
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17 days ago
_आद्यंत प्रभु - आधे गणेश और आधे हनुमान का अनोखा मंदिर... 🚩_ °°'नादुक्कयलाई' दक्षिण चेन्नई में एक हिंदू मंदिर है। यह मन्दिर" अध्यायंत प्रभु" की अपनी अनूठी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध हो गय... 🚩°° 'नादुक्कयलाई' दक्षिण चेन्नई में एक हिंदू मंदिर है। यह मन्दिर" अध्यायंत प्रभु" की अपनी अनूठी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध हो गया है, जहाँ देवता का एक आधा भाग गणेश और दूसरा आधा हनुमान है। बाधाओं को दूर करने वाले माने जाने वाले हिंदू किसी भी नई चीज की शुरुआत में गणेश से प्रार्थना करना शुभ मानते हैं। इसलिए 'आदि' या पहले। माना जाता है कि भगवान शिव के अवतार माने जाने वाले हनुमान, सृष्टि के नष्ट होने के बाद भी बने रहते हैं। इसलिए 'अंत' या अंत। 'आदि' और 'अंत' का मेल इस देवता को 'आद्यंत प्रभु' बनाता है। आद्यंत प्रभु का अर्थ है वह भगवान जिसका न आदि है और न ही अंत। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान चिरंजीवी हैं और शिव और पार्वती के पुत्र होने के कारण, गणेश दो बार पैदा हुए थे। इस अनोखे मंदिर में आधे गणेश और आधे हनुमान के देवता हैं जिन्हें रुद्र का रूप कहा जाता है। जय श्री गणेश... 🙏🏼 जय वीर हनुमान... 🙏🏼 #श्री गणेश #🙏🌺ॐ रामदूताय नमः🌺🙏 🙏 जय श्री राम🙏 🙏🌺 जय हनुमानजी 🌺🙏 जय बालाजी महाराज #🌼🙏जय वीर हनुमानजी 💐शुभ मंगलवार 🌼श्री हनुमान चालीसा 🌼
harjitkduggal
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25 days ago
#🌷शुभ बुधवार #🙏प्रातः वंदन #🌞गुड मॉर्निंग☕🌞 #श्री गणेश 🌸 शुभ बुधवार 🌸 🙏 ॐ श्री गणेशाय नमः 🙏 विघ्नहर्ता श्री गणेश जी आपके सभी कष्ट हरें और आपके जीवन में सुख, शांति व सफलता भर दें। ✨ आपका बुधवार मंगलमय हो ✨ शुभ बुधवार 🌼