#सत_भक्ति_संदेश
सुमिरन सुरति - निरति तथा मन व श्वांस
(पवन) के साथ स्मरण करने से एक ही नाम जाप से चार युगों तक की गई शास्त्रविरुद्ध मन्त्रों के जाप की भक्ति से भी अधिक फल मिल जाता है।
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#सत_भक्ति_संदेश
पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने के लिए
मनमुखी (मनमानी) साधना त्याग कर,
पूर्ण सदगुरु को समर्पण कर सच्चे नाम के
जाप से ही मोक्ष संभव है नकली नाम के जाप
से नहीं। नहीं तो मृत्यु के उपरांत नरक जाएगा।
#सत_भक्ति_संदेश
सतलोक
कबीर जी ने स्पष्ट कर दिया है किः-
कहाँ नाद कहाँ बिन्द ने भाई। नाम भक्ति बिन लोक न जाई ।।
भावार्थः- चाहे कोई नाद वाला है, चाहे बिन्द वाला है। यदि नाम की वास्तविक भक्ति है तो सतलोक जा सकेगा।
#सत_भक्ति_संदेश
वाणी
बिन उपदेश अचम्भ है, क्यों जिवत हैं प्राण।
भक्ति बिना कहाँ ठौर है, ये नर नाहीं पाषाण।।
भावार्थ:-
परमात्मा कबीर जी कह रहे हैं कि हे भोले मानव ! मुझे आश्चर्य है कि बिना गुरू से दीक्षा लिए किस आशा को लेकर जीवित है।
#सत_भक्ति_संदेश
संत के सामने यह मन भाग जाता है
और ये आत्मा ऊपर आ जाती है क्योंकि परमात्मा आत्मा का साथी है।
"अन्तर्यामी एक तू आत्म के आधार ।"
आत्मा का आधार कबीर भगवान है।
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