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छठी माता, जिन्हें सटवाई देवी, षष्ठी माता अथवा छठ माता के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू परंपरा में नवजात शिशुओं की रक्षिका और संतानों को आयु, आरोग्य तथा सौभाग्य प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। लोकमान्यता के अनुसार जन्म के छठे दिन रात्रि में सटवाई माता बालक के भाग्य का लेखन करती हैं। इसी कारण शिशु के जन्म के छठे दिन "छठी" या "सटवाई पूजन" का विशेष विधान है। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, बंगाल तथा उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों में सटवाई माता की पूजा अत्यंत श्रद्धा से की जाती है। मान्यता है कि जो माता-पिता श्रद्धापूर्वक सटवाई देवी का पूजन करते हैं, उनके बच्चों को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सद्बुद्धि और जीवन में सफलता प्राप्त होती है। सटवाई देवी को मातृत्व, संरक्षण और भाग्य की अधिष्ठात्री शक्ति माना जाता है। पुराणों में षष्ठी देवी को भगवान कार्तिकेय की पालनकर्त्री तथा बालकों की संरक्षिका बताया गया है। वे प्रकृति की छठी शक्ति हैं और संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों पर विशेष कृपा करती हैं। बाल ग्रह दोष, शिशु रोग और संतान संबंधी बाधाओं से रक्षा के लिए भी इनकी आराधना की जाती है। सटवाई माता की पूजा में स्वच्छ स्थान पर चौकी स्थापित कर उस पर देवी का चित्र या प्रतीक रखा जाता है। फल, पुष्प, अक्षत, दीपक तथा नैवेद्य अर्पित कर संतान की मंगलकामना की जाती है। बालकों के कल्याण हेतु माता का स्मरण अत्यंत शुभ माना गया है। छठी माता स्तोत्र नमो देव्यै महादेव्यै सिद्ध्यै शान्त्यै नमो नमः। शुभायै देवसेनायै षष्ठ्यै देव्यो नमो नमः॥ वरदायै पुत्रदायै धनदायै नमो नमः। सुखदायै मोक्षदायै षष्ठ्यै देव्यो नमो नमः॥ सृष्टिस्थित्यन्तकारिण्यै मायायै च नमो नमः। बालरक्षाकर्यै नित्यं षष्ठ्यै देव्यो नमो नमः॥ धनं देहि प्रियं देहि पुत्रं देहि सुरेश्वरि। यशो देहि श्रियं देहि षष्ठिदेवि नमोऽस्तु ते॥ जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ छठी माता का स्मरण करता है, उसके परिवार में सुख, समृद्धि और संतान का कल्याण बना रहता है। माता की कृपा से बच्चों की रक्षा होती है और उनके जीवन में शुभता का संचार होता है। नमामीशमीशान #namamishan #छठीमाता #सटवाईदेवी #षष्ठीदेवी #सनातनधर्म #देवीउपासना #मातृशक्ति #💥🔥आज के चर्चित मुद्दे🔥💥 #लोकप्रिय ।