महाराणा प्रतापजयंती

संजय शिव नारायण रंगीला संजय अत्री
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1 months ago
# दहकता अंगारा (महाराणा प्रताप) -------------- था ख़ोला रक्त धमनियों में, भड़की श्वाँसों में चिंगारी । था ज़ोर विलक्षण बाज़ुओं में, नस-नस में थी वो उजियारी ।। उस अंगारे की लपटों से, तमतमा उठी पावन माटी । जहाँ चेतक घोड़े पर प्रताप, वह याद रहे हल्दी-घाटी ।। बप्पा रावल के दीपक का, इतिहास जहाँ के कण-कण में । जो अंधकार में रह कर भी, एक बने प्रेरणा क्षण-क्षण में ।। वह रौंद रहा कांटों को जिसकी, अद्भुत बड़ी कहानी है । उमड़े रग़-रग़ में स्वाभिमान, संकट ही पानी-पानी है ।। इक क्षत्राणी का दुग्ध वही, चित्तौड़ का अमिट उजाला है । जिसके फ़ौलादी पंजों में, तलवार दुधारी-भाला है ।। इक आन-मान के खातिर, भीषण कष्टों से नित जूझा था । सर्वस्व समर्पित कर जिसने, चन्दन-माटी को पूजा था ।। हर कदम-कदम और मोड़-मोड़, अनगिनत आपदा आई थी । परिवार सहित उस वीर ने जहाँ पर, घास की रोटी खाई थी ।। खेला प्राणों पर हरदम लेकिन, हिम्मत कभी न हारी थी । अंगारे से चेहरे पर जिसके, प्राणों की बलिहारी थी ।। ऐसी थी वह एक विकट घड़ी, बन एक चुनौती आई थी । दुश्मन ने आगे ही उसके, उल्टे मुँह की खाई थी ।। स्व-प्राण विसर्जन करते करते, प्रतिद्वंद्वी पर फूट पड़ा । एक कड़कड़ाती बिजली बन वह, घमासान में टूट पड़ा ।। बलिवेदी की घनघोर घटा में, महा-विजय का शंख बजा । ऐसे चिराग को पाने आखिर, माता का निज अंक सजा ।। ऐसा पल जीवन-दर्पण में जो, कभी न देखा जा सकता । मरते दम तक जिसकी रूह से, चित्तौड़ न भूला जा सकता ।। जब बरस पड़े शत्रु के अश्रु, थी कैसी उल्टी पाटी । जहाँ चेतक घोड़े पर प्रताप, वह याद रहे हल्दी-घाटी ।। था ख़ोला रक्त धमनियों में, भड़की श्वाँसों में चिंगारी । था ज़ोर विलक्षण बाज़ुओं में, नस-नस में थी वो उजियारी ।। उस अंगारे की लपटों से, तमतमा उठी पावन माटी । जहाँ चेतक घोड़े पर प्रताप, वह याद रहे हल्दी-घाटी ।। #महाराणा प्रतापजयंती #महाराणा #जय महाराणा जय राजपुताना
-mohit
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1 months ago
#🐎महाराणा प्रताप जयंती ⚔️💐 महाराणा प्रताप जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।। वो मेवाड़ का अमर बना एक नाम है, वीर भूमि को पवित्र बना गया धाम है।। सदा मेवाड़ की बनी अमर पहचान है, मेवाड़ का प्रताप अटल स्वाभिमान है।। पराधीनता के विरुद्ध वो तो लड़ा था, स्वाधीनता की अलख लेकर वो योद्धा खड़ा था।। चलता रहा जंगल-जंगल, नहीं हार मानी, हर दुश्मन पर अपनी वो तलवार तानी।। वो मेवाड़ को कभी गुलाम होने न दिया, लड़ता रहा मगर मेवाड़ न खोने दिया।। वो वीर, योद्धा, साहसी — प्रताप नाम था, जन्म लिया पवित्र भूमि कुम्भलगढ़ धाम था।। महाराणा मेवाड़ का गौरवगान था, हर पल महकता हुआ हिन्दू की शान था।। :- मोहित जागेटिया #महाराणा प्रतापजयंती #महाराणा प्रताप #महाराणा प्रताप जयंती #महाराणा प्रताप सिंह जयंती