जागो और जगाओ

नरेश चंद्र सनातनी
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6 दिन पहले
🚩 खुला पत्र : हिंदू-सिख भाईचारे को तोड़ने वालों के नाम 🚩 “चगद-दंग चौंका, हगद-दंग हनुमंता। जगद-दंग जोधा, महा तेजवंता॥” श्री दशम ग्रंथ साहिब में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा हनुमान जी के वीर स्वरूप का यह वर्णन केवल शब्द नहीं, बल्कि उस साझा आध्यात्मिक विरासत का प्रमाण है जिसने सदियों से हिंदू और सिख समाज को एक सूत्र में बांध रखा है। गुरु साहिब ने हनुमान जी को महान योद्धा, अद्भुत पराक्रमी और आदर्श सेवक के रूप में प्रस्तुत किया। आज कुछ कट्टरपंथी मानसिकता के लोग हिंदू-सिख भाईचारे में जहर घोलने का प्रयास कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियाँ कर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। ऐसे लोगों को इतिहास पढ़ने और अपनी औक़ात में रहने की आवश्यकता है। सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी का जन्म एक हिंदू बेदी खत्री परिवार में हुआ था। उनके बाद के सभी नौ गुरु भी हिंदू परिवारों से संबंधित थे। यह इतिहास किसी से छुपा नहीं है। सिख धर्म और सनातन संस्कृति का रिश्ता विरोध का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता का रहा है। जब औरंगजेब जबरन कश्मीरी हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवा रहा था, तब कश्मीरी पंडितों की पुकार पर नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी ने दिल्ली के चांदनी चौक में अपना शीश बलिदान कर दिया। उन्हें “हिंद की चादर” इसलिए कहा गया क्योंकि उन्होंने तिलक और जनेऊ की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। यह बलिदान केवल हिंदुओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत की आत्मा की रक्षा के लिए था। दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने “चण्डी दी वार” में “प्रथम भगवती सिमर कै…” लिखकर शक्ति स्वरूपा माता का स्मरण किया। उन्होंने अन्याय के विरुद्ध लड़ने और धर्म की रक्षा का संदेश दिया। यही सनातन और सिख परंपरा का साझा स्वरूप है। हनुमान जी को शिव जी का अवतार माना जाता है। वीरता, निष्ठा और धर्म रक्षा का जो स्वरूप हनुमान जी में दिखाई देता है, वही स्वरूप सिख इतिहास के योद्धाओं में भी दिखाई देता है। हिमालय की गोद में स्थित पवित्र हेमकुंड साहिब इसका जीवंत उदाहरण है। सिखों के लिए यह गुरु गोबिंद सिंह जी की तपस्थली है, वहीं हिंदुओं के लिए यह भगवान लक्ष्मण जी की साधना से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है। इसी प्रकार मणिकरण साहिब में गुरुद्वारा साहिब और हिंदू मंदिर साथ-साथ स्थित हैं। मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती वहाँ तपस्या करते थे और बाद में गुरु नानक देव जी भी उस पवित्र स्थान पर पहुंचे। कालका माता मंदिर के साथ गुरुद्वारा साहिब, ज्वाला माता देवी में आज भी श्रद्धा से घी चढ़ाने आने वाले सिख परिवार, नयनादेवी और देश के अनेक धार्मिक स्थल इस साझा विरासत की मिसाल हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से पंजाब में हिंदू और सिख परिवारों का रिश्ता बेहद गहरा रहा है। पीढ़ियों से कई हिंदू परिवारों में सबसे बड़े बेटे को सिख धर्म के अनुसार खालसा पंथ में शामिल करने की परंपरा रही है। आज भी मेरे जन्म स्थान अंबाला के घेल गांव में लगभग हर घर में एक हिंदू परिवार का बच्चा सिख स्वरूप में सजाया जाता है। यह भाईचारा किसी राजनीति से नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और साझा इतिहास से बना है। सिख गुरुओं ने कभी किसी धर्म के अपमान की शिक्षा नहीं दी। उन्होंने मानवता, साहस, सेवा और धर्म रक्षा का मार्ग दिखाया। जो लोग हिंदू-सिख एकता को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वे न गुरु साहिबानों की विचारधारा समझ पाए हैं और न भारत की आत्मा। हमारी साझा विरासत करुणा, सहिष्णुता, बलिदान और आध्यात्मिक ज्ञान की विरासत है। हिंदू और सिख सदियों से एक-दूसरे की आस्था और सम्मान की रक्षा करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे। हिंदू-सिख भाईचारा अमर था, अमर है और अमर रहेगा। 🇮🇳🙏 — वीरेश शांडिल्य अंतरराष्ट्रीय प्रमुख, विश्व हिन्दू तख्त राष्ट्रीय अध्यक्ष, एंटी टेररिस्ट फ्रंट इंडिया #जागो और जगाओ
नरेश चंद्र सनातनी
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8 दिन पहले
जिन मूर्खों को एकलव्य का अंगूठा काटना सच लगता है उन मूर्खों को और उनके सरदारों को महाभारत का वन पर्व पढ़ने की आवश्यकता है सच जानने के लिए #जागो और जगाओ
नरेश चंद्र सनातनी
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11 दिन पहले
इस सरोवर में नीलकमलहै और कमल #जागो और जगाओ हरी प्रिया माता के साथ विराजमान है
नरेश चंद्र सनातनी
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11 दिन पहले
*राजनीति है, चलती रहती है, लेकिन बीजेपी कितनी सूक्ष्म स्तर पर काम करती है, यह समझने के लिए कृपया इसे जरूर पढ़ें। * *युद्ध की तैयारी* इस रणनीति में TMC की गुप्त चालों की जानकारी निकाली गई। इसमें काम आया PK... यानी प्रशांत किशोर। PK के पास अपार पैसा था... भारत में इतना पैसा सीधे रास्ते से नहीं आता। ED ने उस पर दबाव बनाया, उसने बिहार में झुकाव दिखाया, वह खत्म हो गया, लेकिन TMC की सारी जानकारी बीजेपी तक पहुंच गई। इसके बदले उसे संरक्षण दिया गया। PK खत्म हुआ... उससे I-PAC की जानकारी मिली। और TMC को झटका लगना शुरू हुआ। CAA के विरोध में ममता बनर्जी उतर गईं। वह अनावश्यक था। लेकिन उससे विचार-मंथन शुरू हुआ। और संघ का मंथन मतलब बहुत खतरनाक तैयारी होती है। साधारण कपड़े पहने, पैरों में साधारण चप्पलें डाले हुए सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी / जिला परिषद के रिटायर्ड शिक्षक जैसे दिखने वाले साधारण, बिना पहचान वाले लोग... बैठते हैं... बात करते हैं... फिर अपनी-अपनी थालियां लेकर आलू की सब्जी, रोटी, दाल-चावल खाते हैं, अपनी थालियां खुद धोकर जगह पर रखते हैं और बातचीत करते हुए निकल जाते हैं। इसी दौरान इन साधारण लोगों को समझ आया कि संसदीय शस्त्रागार में एक जंग लगा हुआ महाशस्त्र मौजूद है। #SIR यही वह हथियार था... इसे पूरी तरह संसदीय नियमों के अनुसार चलाया गया। पहली परीक्षा बिहार में हुई। इसके बाद ममता सतर्क हो गईं। उनके पास बांग्लादेशी घुसपैठियों का आधार था। मरे हुए और बाहर रहने वाले लोगों के नाम पर वोट डाले जाते थे। उस हथियार को निष्क्रिय कर दिया गया। आगे “छापा वोट” का तरीका था। विरोधी लोगों को मतदान के लिए बाहर निकलने ही नहीं देना, और ममता के मुस्लिम पुलिसकर्मी खुद बटन दबाते रहते थे। किसके दम पर? प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के बल पर... वहां चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को आगे रखते हुए कई उपाय करके नई सख्त व्यवस्था बनाई। वहां की समानांतर मुस्लिम पुलिस समर्थक व्यवस्था को तोड़ दिया गया। क्लब व्यवस्था डर दिखाती थी, तो वहां केंद्रीय बल तैनात किए गए। I-PAC पर छापे के दौरान ममता ने जो फाइलें तेजी से हटाई थीं, उसकी पूरी जानकारी PK ने दी ही थी, लेकिन वहां के I-PAC अधिकारी चंदेल और जैन को ED ने पकड़ लिया। और आधा काम पूरा हो गया। 92 लाख कथित बांग्लादेशी मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। यह काम कठिन तो था ही, लेकिन अद्भुत भी था... क्योंकि ममता की मुस्लिम और जिहादी पुलिस नेटवर्क की बड़ी श्रृंखला तोड़नी थी। “बाइक वाहिनी” दोपहिया वाहनों पर आतंक फैलाती थी, यह जानकारी पहले से थी। इसलिए मतदान से सिर्फ दो दिन पहले दोपहिया वाहनों पर रोक लगा दी गई। उन 48 घंटों में हर विधानसभा क्षेत्र के TMC अपराधियों को पकड़कर जेल में डाल दिया गया। करीब दस हजार इस्लामिक और जिहादी तत्व जेल भेजे गए। मतदान के बाद EVM कैसे ले जाए जाते हैं, कहां रखे जाते हैं — इसमें पुलिस और I-PAC की मिलीभगत थी। इसलिए वहां पुलिस को मतदान केंद्रों और उनके आसपास से हटाकर केंद्रीय बल तैनात किए गए। TMC की हर छोटी-बड़ी जानकारी निकालकर यह रणनीति संघ के साधारण कार्यकर्ताओं ने छह-सात महीने पहले ही तय कर ली थी और समय आने पर लागू की। जो सामान्य जनता की आंखों को दिखाई नहीं देता था, वही यहां बताया गया है... जनता जो देख रही थी, पीड़ित हिंदू समाज जो सह रहा था... आज वह मुक्त हुआ। अगर बीजेपी सत्ता में नहीं आती, तो यह “बानो” कम से कम आधे हिंदुओं को खत्म कर देती, और बंगाल भारत का हिस्सा नहीं रहता... या फिर मुस्लिम बहुल राज्य बन गया होता। मोदी और शाह ने हिंदुओं के जय हो मोदी जी आपकी जय हो #जागो और जगाओ 🙏
नरेश चंद्र सनातनी
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12 दिन पहले
भगवती की भव्य शाला भोजशाला भोजशाला। अर्चना की दिव्य शाला भोजशाला भोजशाला।। भक्ति की यह नव्य शाला भोजशाला भोजशाला। अब नहीं इस पर है ताला भोजशाला भोजशाला।। जिसने है संस्कृति को पाला भोजशाला भोजशाला। नृत्य करती-सी ये बाला भोजशाला भोजशाला।। शारदा की अक्षमाला भोजशाला भोजशाला। ज्ञान का है यह शिवाला भोजशाला भोजशाला।। #जागो और जगाओ
नरेश चंद्र सनातनी
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12 दिन पहले
नशा-शराब के कारण प्रतिवर्ष 02 लाख अकाल मौत हो रही है आर्टिकल 47 नशा बंदी-शराब बंदी का निर्देश देता है लेकिन संविधान की शपथ लेने वाले देशी ठेका, विदेशी ठेका, अंग्रेजी ठेका, बीयर बार, हुक्का बार, डांस बार, सट्टा बार और कैसिनो खुलवा रहे हैं देर से ही सही लेकिन समीक्षा सबकी होती है #जागो और जगाओ