शुभ श्रावण पुरुषोत्तम मास

sn vyas
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1 days ago
श् #🚩🚩अधिक मास पुरुषोत्तम मास निर्मित हार्दिक शुभेच्छा🚩🚩💐🙏🏻 #पुरुषोत्तम मास की हार्दिक शुभकामनाएं ।।सप्तश्लोकी पुरुषोत्तम स्तोत्रम् ।। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ यह अत्यंत पवित्र स्तोत्र भगवानविष्णु के “पुरुषोत्तम” स्वरूप की स्तुति है। इसमें भगवान के अनेक दिव्य अवतारों एवं तत्त्वस्वरूप का संक्षिप्त किन्तु गूढ़ वर्णन है। केवल सात श्लोकों में सम्पूर्ण वैष्णवसिद्धान्त का सार समाहित माना जाता है। नम: पुरुषोत्तमाख्याय नमस्ते विश्वभावन। नमस्तेस्तु हृषिकेश महापुरुषपूर्वज।।१।। येनेदमखिलं जातं यत्र सर्व प्रतिष्ठितम। लयमेष्यति यत्रैतत तं प्रपन्नोस्मि केशवं।।२।। परेश: परमानंद: परात्परतर: प्रभु:। चिद्रूपश्चित्परिज्ञेयो स मे कृष्ण: प्रसीदतु।।३।। कृष्णं कमलपत्राक्षं रामं रघुकुलोद्भवं। नृसिंहं वामनं विष्णुं स्मरन याति परां गतिम।।४।। वासुदेवं वराह च कंसकेशिनिषूदनम। पुराणपुरुषं यज्ञपुरुषं प्रणतोस्म्यहम।।५।। अनादिनिधनं देवं शंखचक्रगदाधरम। त्रिविक्रमं हलधरं प्रणतोस्मि सनातनम।।६।। य इदं कीर्तयेन्नित्यं स्तोत्राणामुत्तमोत्तमम। सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोके महीयते।।७।। हिंदी भावार्थ- 〰️〰️〰️〰️हे पुरुषोत्तम भगवान! आपको नमस्कार है। हे सम्पूर्ण विश्व की उत्पत्ति और पालन करने वाले! आपको प्रणाम है। हे ह्रषीकेश इन्द्रियों के स्वामी! आदिपुरुष से भी पूर्व कारणस्वरूप महापुरुष! आपको बारम्बार नमस्कार। जिस परमात्मा से यह सम्पूर्ण जगत उत्पन्न हुआ है, जिसमें यह स्थित है, और अन्त में जिसमें लीन हो जाएगा- ऐसे केशव की मैं शरण ग्रहण करता हूँ। जो समस्त देवों के भी ईश्वर हैं, जो परम आनन्दस्वरूप हैं, जो सबसे श्रेष्ठ और सर्वोच्च प्रभु हैं, जो शुद्ध चेतना के स्वरूप हैं और आत्मज्ञान से जाने जाते हैं- वे श्रीकृष्ण मुझ पर प्रसन्न हों। जो मनुष्य कमल के समान नेत्रों वाले भगवान कृष्ण, राम, नरसिंह, वामन और भगवान विष्णु का स्मरण करता है, वह परम गति अर्थात मोक्ष को प्राप्त करता है। मैं वासुदेव, वाराह,कंस और केशी दैत्य का वध करने वाले भगवान, सनातन पुराणपुरुष तथा यज्ञस्वरूप प्रभु को प्रणाम करता हूँ। जो अनादि और अनन्त हैं,जो शंख, चक्र और गदा धारण करते हैं, जो त्रिविक्रम हैं, और बलराम रूप हलधर हैं- ऐसे सनातन देव को मैं प्रणाम करता हूँ। जो व्यक्ति इस श्रेष्ठतम स्तोत्र का प्रतिदिन श्रद्धा से पाठ करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के लोक में सम्मान प्राप्त करता है। स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व👉 यह स्तोत्र भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों और परमतत्त्व का संक्षिप्त सार है। इसमें सृष्टि, पालन और प्रलय- तीनों का आधार पुरुषोत्तम भगवान को बताया गया है। वैष्णव परम्परा में इसे मोक्षदायक और पाप-नाशक स्तोत्र माना गया है। साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️