दुःख

Shiv
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17 days ago
#दुख में मुस्कुराना बहुत कठिन होता है....
Krishna papiya
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1 months ago
AI indicator
जो मिडिल क्लास लोग हैं सिलेंडर के महंगा होने से उनका बुरा हाल है #गरीब की मदद #किस्मत का खेल #दुख #जिंदगीकी #टीवीसीरियल
Naman News
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1 months ago
#दर्दनाक #सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला #सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश #दुख उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का 32 साल का एक नवजवान, जो 13 साल से कोमा में था. अब वह अपनी इच्छामृत्यु पा सकेगा. माता-पिता ने इच्छामृत्यु के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी. अब उनका लाइफ सपोर्ट सिस्टम धीरे-धीरे हटा दिया जाएगा, जिससे वो इस पीड़ादायक जिंदगी से छुटकारा पा सकें. इस बीच हरीश राणा के पिता अशोक और माता निर्मला की जो तस्वीरें और बयान सामने आ रहे हैं, वो हर इंसान का कलेजा चीर दे रहे हैं. सवाल भी उठा रहे हैं. हरीश राणा के पिता अशोक के कुछ शब्द तो ऐसे हैं, जो अंदर तक झकझोर दे रहे हैं और कर्म चक्र को शाश्वत सत्य बता रहे हैं. अक्सर बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि पिछले जनम का कुछ बाकी रहा होगा. हरीश के पिता अशोक राणा का दर्द कुछ ऐसे ही छलका. उन्होंने कहा कि शायद पिछला कुछ लेन-देन बाकी था. जो ये सब सह रहा हूं. अब बेटे की शांतिपूर्वक विदाई चाहता हूं. हमारी भावनाओं का सम्मान करें. मानवता के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सही फैसला दिया है. उन्हें आदेश की आधिकारिक कॉपी नहीं मिली है, लेकिन कुछ अन्य सूत्रों से जानकारी मिली है. जैसे ही आदेश पढ़ेंगे, पूरी स्थिति साफ हो जाएगी.
Naman News
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2 months ago
#📰 बिहार अपडेट #📹 ट्रेंडिंग वीडियो #मां #मेरी जान मेरी प्यारी सी बेटी #दुखद छपरा में मां की अर्थी को बेटियों ने दिया कंधा, समाज की चुप्पी पर उठे सवाल छपरा के सवर्ण समाज की बेटियां माँ की अर्थी को ख़ुद कन्धा देने को क्यों हुईं मजबूर? छपरा के सवर्ण समाज की ये बेटियां है इनकी मां चली गई, गांव ने भी मुंह मोड़ा, बेटियों ने दी मुखाग्नि, श्राद्ध के लिए समाज से मदद की पुकार मां के निधन के बाद न रिश्तेदार पहुंचे, न ही गांव के लोग आगे आए। आख़िरकार दो बेटियों ने ही हिम्मत जुटाकर मां की अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि देकर बेटियों का फ़र्ज़ निभाया। दोनों बेटियां गांव की गलियों में दर-दर हाथ जोड़ती रहीं, लोगों से विनती करती रहीं, लेकिन संवेदनाएं जैसे पत्थर बन चुकी थीं। काफ़ी देर बाद दो-तीन लोग किसी तरह पहुंचे, तब जाकर चार कंधों पर अर्थी उठ सकी और अंतिम संस्कार हो पाया। उनका समाज और रिश्तेदारों से सिर्फ़ इतना ही आग्रह है कि कोई आगे आकर मां के श्राद्ध संस्कार में सहयोग कर दे, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिल सके।