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ये कैसी बोलने की आज़ादी?
सामाजिक-चिंतन | समसामयिक हिंदी कविता
क्या बोलने की आज़ादी का अर्थ मर्यादा भूल जाना है? अपनी राय कमेंट में ज़रूर लिखें।
कुछ लोग इतने मासूम बनते हैं कि लगता है उन्हें कुछ पता ही नहीं… 😇
और फिर वही सबसे पहले पूरी खबर लेकर पहुँच जाते हैं! 🤣
मुस्कुराइए… ज़िंदगी हँसने के लिए है। 😄. #मजेदार#funny#india#हिंदी#दुखी जिन्दगी