गायत्री परिवार मुंबई महाराष्ट्र

PI💞HA
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13 days ago
आज की कहानी:- यहाँ जीवन का एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती हुई एक सुंदर और विचारणीय कहानी प्रस्तुत है: *​अनुभव का अदृश्य तराज़ू* 🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷 ​बहुत समय पहले की बात है, एक दूर-दराज़ के राज्य में सोमदेव नाम का एक युवा चित्रकार रहता था। वह अपनी कला में बेहद निपुण था। उसकी बनाई तस्वीरें इतनी सजीव लगती थीं कि देखने वाला दंग रह जाए। लेकिन सोमदेव के भीतर एक बड़ी कमी थी—उसमें धैर्य का अभाव था और वह हमेशा अपनी कला का श्रेय केवल अपनी उंगलियों की सफाई और अपनी प्रतिभा को ही देता था। ​एक दिन, राज्य के राजा ने घोषणा की कि जो भी कलाकार दरबार की मुख्य दीवार पर ऐसी पेंटिंग बनाएगा जो देखने वाले के मन को परम शांति दे सके, उसे राज्य का सबसे बड़ा सम्मान और पुरस्कार दिया जाएगा। ​सोमदेव ने यह चुनौती स्वीकार कर ली। उसने तीन महीनों तक बिना सोए, बिना आराम किए दिन-रात मेहनत की। उसने पहाड़ों, नदियों, उड़ते पक्षियों और ढलते सूरज का एक ऐसा अद्भुत दृश्य उकेरा कि राजा सहित पूरा दरबार उसकी तारीफ़ करते नहीं थक रहा था। ​वृद्ध शिल्पी की चुनौती ​तभी दरबार में वृद्ध शिल्पी रामनाथ आए, जो वर्षों से पत्थरों को तराशकर मूर्तियाँ बनाते थे। उन्होंने पेंटिंग को ध्यान से देखा और मुस्कुराते हुए राजा से कहा: ​"महाराज, चित्रकार की उंगलियों में जादू है। दृश्य सुंदर है, लेकिन इसमें 'प्राण' नहीं हैं। यह आँख को तो भाता है, लेकिन आत्मा को स्पर्श नहीं करता।" ​यह सुनकर सोमदेव का अहंकार आहत हो गया। उसने गुस्से में कहा, "वृद्ध महाशय! आपने जीवन भर सिर्फ़ कठोर पत्थरों को तोड़ा है। आप रंगों की कोमलता और मेरी महीनों की मेहनत का मोल क्या जानें?" ​राजा ने स्थिति को संभालते हुए कहा, "यदि ऐसा है, तो हम एक परीक्षा लेते हैं। सोमदेव, तुम और रामनाथ जी, दोनों को दो हफ़्ते का समय दिया जाता है। सोमदेव अपनी इस पेंटिंग को और बेहतर बनाएँ, और रामनाथ जी इस दीवार के ठीक सामने वाली दीवार पर अपनी कला का प्रदर्शन करें। दो हफ़्ते बाद फ़ैसला होगा।" ​दो अलग-अलग दिशाएँ ​अगले ही दिन से काम शुरू हुआ: ​सोमदेव का तरीका: उसने तुरंत नए और महंगे रंग मँगवाए। वह दिन-रात पेंटिंग में और बारीकियाँ जोड़ने लगा—कही सुनहरी किरणें, तो कहीं पानी की बूँदें। वह रंगों से उस चित्र को भर देने में जुट गया। ​रामनाथ जी का तरीका: दूसरी तरफ़, वृद्ध रामनाथ ने कोई रंग या ब्रश नहीं उठाया। उन्होंने बस एक सूती कपड़ा, कुछ पानी और पॉलिश करने का पत्थर लिया। वे दिन भर सामने वाली पुरानी, धूल-भरी और खुरदरी दीवार को घिसकर साफ़ करते रहते। ​सोमदेव मन ही मन उनका मज़ाक उड़ाता कि "ये बूढ़ा आदमी सिर्फ़ दीवार साफ़ कर रहा है, यह भला क्या कला दिखाएगा?" ​निर्णय का दिन ​दो सप्ताह पूरे हुए। राजा और पूरा दरबार निर्णय के लिए उपस्थित हुआ। ​पर्दा सबसे पहले सोमदेव की पेंटिंग से हटाया गया। चित्र वाकई पहले से कहीं अधिक भव्य और चमकदार लग रहा था। सबने उसकी प्रतिभा की जमकर प्रशंसा की। ​इसके बाद, राजा रामनाथ जी की दीवार की ओर मुड़े। वहाँ कोई चित्र नहीं बना था। लेकिन जैसे ही रामनाथ जी ने उस दीवार पर पड़ा पर्दा हटाया, पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया। ​सामने वाली दीवार इतनी साफ़, समतल और शीशे की तरह पारदर्शी हो चुकी थी कि उसमें सोमदेव की पेंटिंग का प्रतिबिंब (Reflection) दिखाई दे रहा था। लेकिन वह केवल एक साधारण प्रतिबिंब नहीं था। ​दीवार की गहराई और उसकी असीम स्वच्छता के कारण, उसमें दिख रही पेंटिंग के रंग और भी गहरे, जीवंत और शांत महसूस हो रहे थे। ​सोमदेव के चित्र की हर एक छोटी सी कमी दूर हो चुकी थी और उसमें ढलते सूरज की रोशनी ऐसी लग रही थी मानो सचमुच सामने कोई दिव्य सवेरा हो रहा हो। ​दृश्य इतना अलौकिक था कि देखने वालों का मन स्वतः ही शांत और आनंदित हो गया। ​कहानी की सीख ​सोमदेव का सिर शर्म से झुक गया। उसने वृद्ध शिल्पी के पैर छू लिए और पूछा, "मैंने दिन-रात रंग भरे, लेकिन आपने बिना कोई रंग छुए मेरे चित्र को मुझसे भी अधिक सुंदर कैसे बना दिया?" ​रामनाथ जी ने मुस्कुराकर कहा: ​"बेटा, तुमने केवल बाहर रंग बिखेरे, जबकि मैंने सामने के दर्पण को साफ़ किया। हमारा मन भी इस दीवार की तरह है। जब तक मन में अहंकार, जल्दबाज़ी और घमंड की धूल जमी रहती है, तब तक ज्ञान के रंग भी धुंधले दिखते हैं। लेकिन जब मन साफ़ और शांत हो जाता है, तो वह सृष्टि की हर सुंदरता को उसके वास्तविक और दिव्य रूप में दर्शाने लगता है।" ​ज्ञान: जीवन में केवल अपनी कुशलताओं और ज्ञान को इकट्ठा करना (रंग भरना) ही सब कुछ नहीं है; अपने मन और विचारों को साफ़ (निर्मल) रखना उससे भी अधिक आवश्यक है। एक निर्मल मन ही जीवन के सच्चे सौंदर्य को प्रतिबिंबित कर सकता है। 🙏 जय गुरुदेव🙏 #युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचार✒️ #गायत्री परिवार मुंबई महाराष्ट्र #(अखिल विश्व – गायत्री परिवार) #गायत्री परिवार #🙏प्रातः वंदन
PI💞HA
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15 days ago
*समस्त मातृशक्ति भ्रातागणों एवं आपके प्रियजनों को मेरा सादर प्रणाम* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 *प्रज्ञा योग की सुगम साधना*:-06 🌥️🌥️🌥️🌥️🌥️🌥️🌥️ गायत्री मंत्र हमारे साथ- साथ बोलें- "ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।।" ---------------------- जप के साथ ध्यान करना चाहिए। जप और ध्यान का, दोनों का मिला समन्वय समझना चाहिए। ध्यान किसका करना चाहिए? सविता गायत्री का देवता है। प्रात:काल के समय पर। प्रात:काल सूरज आपने देखा है न। गायत्री का सूरज इसे ही मानना चाहिए। यूनिवर्सल है यह। गायत्री माता का जो चित्र आपने रखा है। वह तो आप हिंदू हैं तो रखा है और अगर आप मुसलमान हैं तो आप नहीं रखेंगे। इसलिए देवपूजा तो केवल हिंदूओं के लिए है और यह जो है, सविता का ध्यान, सविता का ध्यान सबके लिए है। यूनिवर्सल है। मुसलमान धर्म में, इसाई धर्म में, सब जगह भगवान का प्रतीक प्रकाश को माना गया है तो सविता प्रात:काल का निकलता हुआ सुनहरा सूर्य, उसका आप ध्यान करते जाइए। गायत्री का तीन माला- जप करने के साथ- साथ में एक और बात उसमें शामिल कीजिए कि सविता सवेरे का सूर्य पूर्व दिशा से निकलते हुए सूर्य के सामने आप छोटे बच्चे के तरीके से नंग बैठे हुए हैं और आपके मन में, आपके शरीर में और आपके अन्त:करण में, हृदय माना गया है, उसमें सविता की किरणें प्रवेश करती हैं तो आपकी अन्त:करण को भावनाओं से भर देती हैं। मस्तिष्क को ज्ञान से भर देती हैं। शरीर को बल से भर देती हैं या यह कहिए कि शरीर को श्रेष्ठ कर्म करने के लिए और बुद्धी को श्रेष्ठ चिंतन करने के लिए और भावनाओं में श्रेष्ठता भरने के लिए ये सविता कि किरणें हैं। ये अपना अनुग्रह और अपना अनुदान हमको दे रही है। जप करने के साथ- साथ में यह ध्यान करना आवश्यक है। जप करने से पहले देवपूजन चंदन, अक्षत और पुष्प, उसको मिलाकरके हमारा जीवन इस तरह का हो। फिर इसके बद में भगवान के अनुग्रह का भाव करना चाहिए। यह प्रतिज्ञा का भाव है। अनुग्रह का भाव है। भगवान ने इस रूप में, सूर्य में सविता के रूप में तीन अनुग्रह हमको दिए हैं। तीन क्षेत्रों में उनका प्रवेश हुआ है। इस तरह एक माला आत्मपरिष्कार के लिए, एक वातावरण के संशोधन करने के लिए और एक माला यह आपका प्रज्ञा- मिशन है इसकी सफलता के लिए। चलिए यह आपका जप हुआ। क्रमशः जारी *पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य* #गायत्री परिवार #(अखिल विश्व – गायत्री परिवार) #गायत्री परिवार मुंबई महाराष्ट्र #युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचार✒️ #🙏प्रातः वंदन