PI💞HA
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आज की कहानी:-
*परखने का नजरिया*
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एक समय की बात है, एक प्रसिद्ध शिल्पकार अपने शिष्य के साथ घने जंगल के बीच से गुजर रहा था। रास्ते में शिल्पकार को एक बहुत ही अजीब, आधा टूटा हुआ और टेढ़ा-मेढ़ा पत्थर दिखाई दिया। वह पत्थर किसी काम का नहीं लग रहा था—न तो वह गोल था, न ही सीधा।
शिष्य ने उस पत्थर को देखते ही ठोकर मारी और कहा, "यह पत्थर कितना व्यर्थ है! रास्ते में बेकार पड़ा है और लोगों के पैरों में लग रहा है।"
शिल्पकार मुस्कुराया और रुका। उसने पत्थर को उठाकर ध्यान से देखा और अपनी झोली में रख लिया। शिष्य यह देखकर हैरान था कि उसके गुरुजी इस बदसूरत पत्थर का क्या करेंगे।
अगले कुछ हफ्तों तक शिल्पकार अपनी कार्यशाला में अकेला काम करता रहा। वह सुबह से शाम तक उस पत्थर पर छेनी और हथौड़े की बारीक चोटें करता। आखिरकार एक दिन उसने शिष्य को अंदर बुलाया।
जब शिष्य ने कमरे में प्रवेश किया, तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। सामने एक अत्यंत अद्भुत और अनोखी मूर्ति रखी थी, जिसे देखकर मन में शांति का अहसास होता था। उस मूर्ति में एक ऐसी तरलता और लयबद्धता थी जो किसी सामान्य पत्थर से बनी मूर्तियों में नहीं होती।
शिष्य ने चकित होकर पूछा, "गुरुदेव! आपने ऐसा चमत्कारिक पत्थर कहाँ से प्राप्त किया? मैंने आज तक ऐसी आकृति नहीं देखी!"
शिल्पकार ने नम्रता से उत्तर दिया, "यह वही टेढ़ा-मेढ़ा पत्थर है जिसे तुमने रास्ते में व्यर्थ समझकर ठोकर मारी थी। इस पत्थर में खामी नहीं थी, बस इसकी बनावट बाकी पत्थरों से अलग थी। सामान्य आँखें इसमें केवल एक बेढंग पत्थर देख रही थीं, लेकिन मैंने इसके अंदर छिपी हुई अनोखी मूर्ति को देखा। मैंने केवल इसके फालतू हिस्सों को तराशकर अलग कर दिया, और जो इसकी असल सुंदरता थी, वह बाहर आ गई।"
जीवन की सीख:
हम अक्सर लोगों, परिस्थितियों या स्वयं को केवल इसलिए बेकार या कमजोर मान लेते हैं क्योंकि वे समाज के तय मानकों और सांचों में फिट नहीं बैठते। प्रत्येक मनुष्य के भीतर एक अद्वितीय क्षमता और सुंदरता छिपी होती है। आवश्यकता बस इस बात की है कि हम किसी को परखने का नजरिया बदलें और धैर्यपूर्वक उसके भीतर की सर्वश्रेष्ठ संभावना को तराशें।
🙏 जय गुरुदेव🙏 #युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचार✒️ #गायत्री परिवार #गायत्री परिवार मुंबई महाराष्ट्र #(अखिल विश्व – गायत्री परिवार) #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
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