श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों को सजाते हैं और रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। बाल गोपाल की झांकियां और भजन इस पर्व को और भी खास बना देते हैं।
लेकिन क्या जन्माष्टमी केवल उत्सव और परंपरा तक सीमित है? श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म, धर्म और भक्ति से जुड़ा गहरा ज्ञान दिया। साथ ही गीता के अध्याय 15 के श्लोक 16-17 में क्षर और अक्षर पुरुष से अलग परम पुरुष का वर्णन मिलता है, जिसे उत्तम पुरुष कहा गया है।
गीता अध्याय 18 के श्लोक 66 में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि वह उनकी शरण में आएं। लेकिन इसी गीता के अध्याय 18 के श्लोक 62 में उस परमेश्वर की शरण में जाने की बात भी कही गई है, जिससे परम शांति और शाश्वत धाम की प्राप्ति होती है।
इसलिए जन्माष्टमी के अवसर पर केवल श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने के साथ-साथ उनके दिए ज्ञान को समझना भी जरूरी है। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान के अनुसार, श्रीकृष्ण जी ने जिस परम सत्ता की शरण लेने का संकेत दिया है, वही अविनाशी पूर्ण परमात्मा है।
शास्त्रों को समझकर की गई भक्ति ही मनुष्य को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति की ओर ले जा सकती है।
आइए, इस जन्माष्टमी पर उत्सव के साथ-साथ शास्त्रों में बताए वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान को भी जानने का प्रयास करें।
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