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#सोचने वाली बात #points to ponder #gita #ગીતા નો સાર
सोचने वाली बात - 11:26 13 Dr Abdul Gani. (You) [ಗ)   Message yourself भगवद्गीता- अध्याय १२, श्लोक ?3-?8 अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च | निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः gTHt Il सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे স্িম: |l अनुवादः जो भूतमात्र के प्रति द्वेष रहित, मित्रवत और करुणामय हैं; अहंकार और ममता से मुक्त हैं; सुख-दुःख में समान हैं, और क्षमाशील हैं, तथा जो सदा संतुष्ट , संयमी, दृढ़ निश्चयी हैं, और जिनका मन-बुद्धि अर्पित होता है= ऐसे भक्त मुझे मुझमें प्रिय होते हैं। 11:26 13 Dr Abdul Gani. (You) [ಗ)   Message yourself भगवद्गीता- अध्याय १२, श्लोक ?3-?8 अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च | निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः gTHt Il सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे স্িম: |l अनुवादः जो भूतमात्र के प्रति द्वेष रहित, मित्रवत और करुणामय हैं; अहंकार और ममता से मुक्त हैं; सुख-दुःख में समान हैं, और क्षमाशील हैं, तथा जो सदा संतुष्ट , संयमी, दृढ़ निश्चयी हैं, और जिनका मन-बुद्धि अर्पित होता है= ऐसे भक्त मुझे मुझमें प्रिय होते हैं। - ShareChat