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-BP Joshi - Author on ShareChat
-BP Joshi
528 views • 5 months ago
#प्रश्न विचारणीय है
ददाति प्रतिगृह्लाति गुह्यमाख्याति पृच्छति [ भोजयते चौव সীনিলঃতাম षड्विधं भुङ्क्ते H&f खाना , खिलाना , रहस्य लेना, देना, ) बताना और उन्हें सुनना ये सभी ६ प्रेम के लक्षण है। ददाति प्रतिगृह्लाति गुह्यमाख्याति पृच्छति [ भोजयते चौव সীনিলঃতাম षड्विधं भुङ्क्ते H&f खाना , खिलाना , रहस्य लेना, देना, ) बताना और उन्हें सुनना ये सभी ६ प्रेम के लक्षण है।
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    -BP Joshi
    #प्रश्न विचारणीय है from WhatsApp wa.me/918837528985?source=exsh
    जरूरत  से ज्यादा चालाकी और निश्छल व्यक्ति के साथ किया गया छल आपकी बर्बादी के सभी द्वार खोल देता है, फिर चाहे आप कितने भी बड़े शतरंज के धूर्त खिलाड़ी ही क्यों ना हो। जरूरत  से ज्यादा चालाकी और निश्छल व्यक्ति के साथ किया गया छल आपकी बर्बादी के सभी द्वार खोल देता है, फिर चाहे आप कितने भी बड़े शतरंज के धूर्त खिलाड़ी ही क्यों ना हो।
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  • -BP Joshi - Author on ShareChat
    -BP Joshi
    #प्रश्न विचारणीय है
    @ इंसान कहीं 83 कहीं न  3 ? ( उल्झा @ इंसान कहीं 83 कहीं न  3 ? ( उल्झा
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  • -BP Joshi - Author on ShareChat
    -BP Joshi
    #प्रश्न विचारणीय है
    किसी को छलोगे तो कभी नहीं ஈஞண் !! किसी को छलोगे तो कभी नहीं ஈஞண் !!
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  • -BP Joshi - Author on ShareChat
    -BP Joshi
    #प्रश्न विचारणीय है
    ये उम्र बढ़ने की जगह घट जाती तो বসা ন্রান থী.. जिंदगी मां की गोद में कट जाती तो क्या बात थी॰. Love you maa ये उम्र बढ़ने की जगह घट जाती तो বসা ন্রান থী.. जिंदगी मां की गोद में कट जाती तो क्या बात थी॰. Love you maa
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  • -BP Joshi - Author on ShareChat
    -BP Joshi
    #प्रश्न विचारणीय है
    30 कितने भी अच्छेक्यों नाही ऐसा कभी नहीं होगाः கி ತಳಾ rg21 &n अनमोल वचन 30 कितने भी अच्छेक्यों नाही ऐसा कभी नहीं होगाः கி ತಳಾ rg21 &n अनमोल वचन
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    -BP Joshi
    #प्रश्न विचारणीय है
    वरयते रूपं माता वित्तं पिता श्रुतम् | कन्या कुलमिच्छन्ति मिष्टान्नमितरे जनाः Il बान्धवाः भावार्थ (लड़की) वर के रूप को माता उसके 8, चाहती कन्या धन को, पिता उसके विद्या| ज्ञान को। बांधव (परिजन) उसके कुल (वंश) को चाहते हैं और (बाराती / समाज) तो केवल भोजन को अन्य लोग గే| चाहते वरयते रूपं माता वित्तं पिता श्रुतम् | कन्या कुलमिच्छन्ति मिष्टान्नमितरे जनाः Il बान्धवाः भावार्थ (लड़की) वर के रूप को माता उसके 8, चाहती कन्या धन को, पिता उसके विद्या| ज्ञान को। बांधव (परिजन) उसके कुल (वंश) को चाहते हैं और (बाराती / समाज) तो केवल भोजन को अन्य लोग గే| चाहते
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  • -BP Joshi - Author on ShareChat
    -BP Joshi
    #प्रश्न विचारणीय है
    विपत्ति से बढ़कर अनुभव सीखाने वाला कोई विद्यालय आज तक नहीं खुला! विपत्ति से बढ़कर अनुभव सीखाने वाला कोई विद्यालय आज तक नहीं खुला!
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  • -BP Joshi - Author on ShareChat
    -BP Joshi
    #प्रश्न विचारणीय है
    द्वेषः कस्य न दोषाय प्रीतिः कस्य न भूतये। दर्पः कस्य न पाताय नोन्नत्यै कस्य नम्रता । ] द्वेष करने से किसमे दोष नहीं आ जाता? प्रेम से किसकी उन्नति नहीं होती? अभिमान से किसका पतन नहीं हो सकता? और नम्रता से किसकी उन्नति नहीं हो सकती | द्वेषः कस्य न दोषाय प्रीतिः कस्य न भूतये। दर्पः कस्य न पाताय नोन्नत्यै कस्य नम्रता । ] द्वेष करने से किसमे दोष नहीं आ जाता? प्रेम से किसकी उन्नति नहीं होती? अभिमान से किसका पतन नहीं हो सकता? और नम्रता से किसकी उन्नति नहीं हो सकती |
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