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#ॐ नमः शिवाय
*🕉️ शिवभक्त औऱ #यमराज 🕉️*
`शिवभक्त यमराज के लिए भी सदैव पूजनीय है ।`
`यम एवं उनके गण सदा उनका सम्मान करते हैं ।`
`वे कभी यमदंड के अधिकारी नहीं होते ।`
*📜 प्रमाण –*
`१. स्कन्दपुराण , सूतसंहिता , यज्ञवैभवखण्ड अध्याय १८ ~`
`प्रथम प्रमाण श्लोक –`
*"त्रिपुण्ड भस्मना स्कन्धे ललाटे च तथा हृदि ।*
*यो दधाति महाप्रीत्या तं त्वं परिहर प्रभुम् ॥"*
`शब्दार्थ 👉🏻 जो मनुष्य कंधे , ललाट एवं हृदय पर भस्म का त्रिपुण्ड अत्यंत प्रीति से धारण करता है , हे प्रभु ! तुम उसे छोड़ दो ।`
`भावार्थ 👉🏻 भस्म तथा त्रिपुण्डधारी को यमदूत स्पर्श भी नहीं कर सकते ।`
`द्वितीय प्रमाण श्लोक –`
*"नित्यं लिङ्गे महादेवं साक्षात्संसारमोचकम्।*
*आराधयति यो मर्त्यस्तं त्वं परिहर प्रभुम् ॥"*
`शब्दार्थ 👉🏻 जो मनुष्य प्रतिदिन संसार से मुक्ति देने वाले साक्षात् महादेव लिंग की आराधना करता है , हे प्रभु ! उसे छोड़ दो ।`
`भावार्थ 👉🏻 नित्य शिवपूजक यमपाश से सदैव मुक्त रहता है ।`
`तृतीय प्रमाण श्लोक –`
*"रुद्राक्ष त्रीणि षड्वैकं परया श्रद्धया सह ।*
*दधाति नित्यं यो मर्त्यस्तं त्वं परिहर प्रभुम् ॥"*
`शब्दार्थ 👉🏻 जो मनुष्य परम् श्रद्धा के साथ ३, ६ अथवा अधिक रुद्राक्ष प्रतिदिन धारण करता है , हे प्रभु ! उसे छोड़ दो ।`
`भावार्थ 👉🏻 रुद्राक्षधारी भी यमदंड का अधिकारी नहीं होता ।`
`२. शिवमहापुराण , विद्येश्वरसंहिता अध्याय २५ –`
`यमराज का अपने गणों को आदेश ~`
*"ज्ञात्वा ज्ञात्वा तत्प्रभावं भस्मरुद्राक्षधारिणः ।*
*ते पूज्याः सर्वदास्माकं नो नेतव्याः कदाचन ॥"*
`शब्दार्थ 👉🏻 भस्म औऱ रुद्राक्ष धारण करने वालों के प्रभाव को भली-भांति जानकर , वे सदैव हमारे द्वारा पूजनीय हैं । उन्हें कभी भी यमलोक में नहीं लाना चाहिए ।`
`भावार्थ 👉🏻 शिवभक्त यमराज के लिए भी वंदनीय हैं ।`
*🔱 निष्कर्ष –*`त्रिपुण्ड , रुद्राक्ष , पंचाक्षर जप , एवं शिवलिंग पूजा अर्थात – यम से मुक्ति ।`
हर हर महादेव🙏🏻🚩
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