sn vyas
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#ॐ नमः शिवाय
*"अद्वैत दृष्टि से शिव रहस्य"*
`🪶 संदर्भ — शिव रहस्य महा इतिहास , विभिन्न उपनिषद एवं गीता के शास्त्रोक्त प्रमाणों द्वारा विश्लेषण ~`
*प्रसंग का मूल पाठ —*
`शिव रहस्य ७.३.१६ ~`
*विष्णुरुवाच —*
*""'मोक्षदाने न शक्तोऽहं सर्वथा मुनिपुङ्गव ।*
*शरणं व्रज देवेशं महादेवं महेश्वरम् ।*
*मोक्षप्रदाता भगवान् देवदेवोत्तमः शिवः"""*
`अर्थात 👉🏻 मैं मोक्ष देने में समर्थ नहीं । देवेश महादेव की शरण जाओ । मोक्षदाता केवल शिव हैं ।`
*""'मम वैकुण्ठलाभोऽपि प्राप्तः शङ्करपूजनात"*
*"स्वतन्त्रः फलदाता तु शिव एव न संशयः"""*
`१.` *"""एकं ब्रह्म"""*
`— अद्वैत का आधार`
`🎯 श्रुति प्रमाण —`
*"""एकमेवाद्वितीयं ब्रह्म"'"*
[ `छान्दोग्य उपनिषद ६.२.१` ]
`अर्थात 👉🏻 ब्रह्म एक ही है , दूसरा नहीं है ।`
*"""सदेव सोम्येदमग्र आसीदेकमेवाद्वितीयम्"''*
[ `छान्दोग्य उपनिषद ६.२.१` ]
`अर्थात 👉🏻 सृष्टि से पूर्व केवल एक ब्रह्म था ।`
*🔥 तात्पर्य —* `☆शिव , ☆विष्णु , ☆ब्रह्मा नाम-रूप हैं । तत्व एक ही चैतन्य ब्रह्म है ।`
`२`. *"""शिव"""* `शब्द का अर्थ — अद्वैत में`
`🎯 श्रुति प्रमाण —`
*"""शिव एव केवलो"""*
[ `कैवल्य उपनिषद १.७` ]
`अर्थात 👉🏻 केवल शिव ही हैं ।`
*"""शान्तं शिवमद्वैतं चतुर्थं मन्यते"""*
[ `माण्डूक्य उपनिषद ७` ]
`अर्थात 👉🏻 चतुर्थ/चौथा पाद — तुरीय — शान्त , शिव, अद्वैत है ।`
*🔥 तात्पर्य —* `"""शिव""" — ☆कल्याणकारी , ☆निर्गुण , ☆अद्वैत ब्रह्म हैं । लिंग — निराकार का प्रतीक है ।`
`३.` *"मोक्ष कोई देता नहीं है , अपितु यह तो स्वरूप का बोध है" —*
`🎯 श्रुति प्रमाण —`
*"""तमेव विदित्वातिमृत्युमेति नान्यः पन्था विद्यतेऽयनाय"""*
[ `श्वेताश्वतर उपनिषद ३.८` ]
`अर्थात 👉🏻 उस शिव को जानकर ही मृत्यु के पार जाया जाता है , द्वितीय कोई मार्ग नहीं ।`
*"""ब्रह्मविद् ब्रह्मैव भवति"""*
[ `मुण्डक उपनिषद ३.२.९` ]
`अर्थात 👉🏻 ब्रह्म को जाननेवाला ब्रह्म ही हो जाता है ।`
`🎯 गीता का प्रमाण —`
*"""मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः"""*
[ `गीता ९.२८` ]
`अर्थात 👉🏻 मुझमें चित्त लगाकर तू मुझको ही प्राप्त होगा ।`
*🔥 तात्पर्य —* `विष्णु ने कहा 👉🏻 """मैं नहीं दे सकता""' अर्थात — मोक्ष बाहर से नहीं मिलता है अपितु आत्मबोध से मिलता है । वही 👉🏻 """शिव बोध""' है ।`
`४.` *"सगुण से निर्गुण की ओर" —*
`🎯 श्रुति प्रमाण —`
*"""द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया"""*
[ `( मुण्डक उपनिषद ३.१.१ ) तथा ( श्वेताश्वतर उपनिषद ४.६ )` ]
`अर्थात 👉🏻 दो पक्षी एक वृक्ष पर । एक भोगता , दूसरा साक्षी ।`
`☝🏻 इसमें साक्षी ही शिव है ।`
`🎯 गीता का प्रमाण —`
*"""अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे"""*
[ `गीता ८.१८` ]
`अर्थात 👉🏻 अव्यक्त से व्यक्त उत्पन्न होते हैं ।`
*🔥 तात्पर्य —*
`★विष्णु अर्थात— ☆सगुण पालनकर्ता । ★शिव अर्थात— ☆निर्गुण कारण । सगुण उपासना चित्त शुद्धि के लिए , औऱ अंतिम लक्ष्य निर्गुण ।`
`५.` *"सबका ईश्वर एक ही है" —*
`🎯 श्रुति प्रमाण —`
*"'"एको देवः सर्वभूतेषु गूढः"""*
[ `श्वेताश्वतर उपनिषद ६.११` ]
`अर्थात 👉🏻 एक ही देव समस्त भूतों में छिपा है ।`
*"""ईशानः सर्वविद्यानां भूतानां चेश्वरः शिवः"""*
[ `शिव रहस्य ७.२.१६` ]
`अर्थात 👉🏻 शिव ही समस्त विद्या एवं प्राणियों के ईश्वर हैं ।`
*⚖️ निष्कर्ष — बिना अतिरेक*
`☝🏻 १. तत्व एक ही है —`
*"""एकमेवाद्वितीयं ब्रह्म"""*
`— छान्दोग्य ६.२.१`
`👉🏻 शैव उसे "शिव" कहते हैं , वैष्णव "विष्णु" । नाम भिन्न किन्तु चैतन्य एक । इसीलिए विष्णु जी स्वयं कहते हैं—` *""मोक्षप्रदाता भगवान देवदेवोत्तमः शिवः"""*`— क्योंकि मोक्ष अर्थात 👉🏻 आत्मबोध । औऱ आत्मा का मूल स्वभाव ही शिव है अर्थात 👉🏻 ☆कल्याणकारी , ☆शान्त , ☆अद्वैत है ।`
`☝🏻 २. "शिव" शब्द का अद्वैत अर्थ —`
*"""शान्तं शिवमद्वैतं चतुर्थं"""*
`— माण्डूक्य उपनिषद ७`
*"""शिव एव केवलो"""*
`— कैवल्य उपनिषद १.७`
`☝🏻 यहाँ शिव कोई "व्यक्ति" नहीं है अपितु— ☆निर्गुण , ☆निराकार , ☆तुरीय ब्रह्म हैं । लिंग भी उसी निराकार का प्रतीक है ।`
`☝🏻 ३. मोक्ष— बाहर से नहीं , अपितु बोध से`
*"""तमेव विदित्वातिमृत्युमेति"""*
`— श्वेताश्वतर उपनिषद ३.८`
*"""ब्रह्मविद् ब्रह्मैव भवति"""*
`— मुण्डक ३.२.९`
`👉🏻 विष्णु का "मैं नहीं दे सकता" कहने का तात्पर्य यही है । मोक्ष दिया नहीं जाता है अपितु जाना जाता है ।`
`जब` *"""शिवोऽहम्"""* `का बोध हो जाए, वही मोक्ष ।`
`☝🏻 ४. सगुण से निर्गुण तक की यात्रा —`
*"""द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया"""*
`— मुण्डक उपनिषद ३.१.१`
`👉🏻 एक पक्षी भोक्ता — जीव — विष्णु तत्व एवं दूसरा साक्षी — शिव तत्व 👉🏻 सर्वप्रथम सगुण उपासना से चित्त को शुद्ध किया , तदोपरांत निर्गुण ज्ञान से मुक्ति ।`
`५. एक ही देव सर्वत्र —`
*""'एको देवः सर्वभूतेषु गूढ:"""*
`— श्वेताश्वतर उपनिषद ६.११`
*"""ईशानः सर्वविद्यानां... शिवः"""*
`— शिव रहस्य ७.२.१६`
*😊🪷 अब निष्कर्ष — सरल शब्दों में*
`☝🏻 १. तत्व — ब्रह्म एक ही है । उसे ही शैव "शिव" , वैष्णव "विष्णु" कहते हैं ।` *— छान्दोग्य उपनिषद ६.२.१*
`☝🏻 २. मार्ग — सगुण भक्ति से चित्त शुद्धि होती है एवं निर्गुण ज्ञान से सुनिश्चित मोक्ष की प्राप्ति ।`
*— मुण्डक उपनिषद ३.२.९*
`☝🏻 ३. प्रसंग का संदेश — विष्णु का ब्राह्मण को शिव के पास भेजना अर्थात — जीव को द्वैत से अद्वैत में ले जाना ।`
*😊 "शिवोऽहं"* `यही अंतिम बोध है ।`
*ॐ तत्सत्🙏🏻*
`ॐ नमः शिवाय🌼`
`हर हर महादेव🚩`
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