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#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 ##भगवद गीता🙏🕉️
❤️जीवन की सीख - अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम्। देवान्देवयजो यान्ति मद्धक्ता यान्ति मामपि I।  बुद्धिवालोंका वह फल नाशवान परन्तु उन अल्प है तथा वे देवताओंको पूजनेवाले देवताओंको प्राप्त होते हैँ और मेरे भक्त चाहे जैसे हौ भजें अन्तमें वे ೯ m7 ೯7 ೯ Il ?3 // मुझको अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः | भावमजानन्तो ٩ ममाव्ययमनुत्तमम् I। बुद्धिहीन पुरुष मेरे अनुत्तम अविनाशी  परम परे   मुझ भावको न जानते हुए मन-इन्द्रियोंसे सच्चिदानन्दघन परमात्माको मनुष्यको भाँति जन्मकर व्यक्तिभावको प्राप्त हुआ मानते हैँ II २४ IIl नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः | मूढोउ्यं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम् ।। अपनी योगमायासे छिपा हुआ मैँ सबके प्रत्यक्ष नहीं होता, इसलिये यह अज्ञानी जनसमुदाय मुझ जन्मरहित अविनाशी परमेश्वरको नर्हीँ जानता अर्थातू जन्मने - मरनेवाला समझता है Il २५ Il मुझको श्रीमदभगवदगीता अध्याय 7 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम्। देवान्देवयजो यान्ति मद्धक्ता यान्ति मामपि I।  बुद्धिवालोंका वह फल नाशवान परन्तु उन अल्प है तथा वे देवताओंको पूजनेवाले देवताओंको प्राप्त होते हैँ और मेरे भक्त चाहे जैसे हौ भजें अन्तमें वे ೯ m7 ೯7 ೯ Il ?3 // मुझको अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः | भावमजानन्तो ٩ ममाव्ययमनुत्तमम् I। बुद्धिहीन पुरुष मेरे अनुत्तम अविनाशी  परम परे   मुझ भावको न जानते हुए मन-इन्द्रियोंसे सच्चिदानन्दघन परमात्माको मनुष्यको भाँति जन्मकर व्यक्तिभावको प्राप्त हुआ मानते हैँ II २४ IIl नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः | मूढोउ्यं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम् ।। अपनी योगमायासे छिपा हुआ मैँ सबके प्रत्यक्ष नहीं होता, इसलिये यह अज्ञानी जनसमुदाय मुझ जन्मरहित अविनाशी परमेश्वरको नर्हीँ जानता अर्थातू जन्मने - मरनेवाला समझता है Il २५ Il मुझको श्रीमदभगवदगीता अध्याय 7 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat