अमित कुमार
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नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। माँ का यह रूप तपस्या, शांत स्वभाव और अनंत ज्ञान का प्रतीक है। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र और स्तुति : 1. माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी श्वेत वस्त्र धारण करती हैं। उनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। "ब्रह्म" का अर्थ है तपस्या और "चारिणी" का अर्थ है आचरण करने वाली। 2. पूजा विधि (Step-by-Step) शुद्धिकरण: प्रातः काल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले या सफेद) पहनें। कलश पूजन: सबसे पहले कलश और उसमें स्थापित देवी-देवताओं का ध्यान करें। षोडशोपचार पूजन: माँ ब्रह्मचारिणी को अक्षत, चंदन, और फूल अर्पित करें। उन्हें चमेली का फूल अत्यंत प्रिय है। भोग: माँ को चीनी, मिश्री या पंचामृत का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इससे लंबी आयु और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। आरती: अंत में कर्पूर जलाकर माँ की आरती करें। 3. प्रभावशाली मंत्र और स्तुति ध्यान मंत्र "वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलुधरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥" स्तुति "या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥" जय माता दी 🙏 #🕉️सनातन धर्म🚩 #माता ब्रह्मचारिणी देवी #देवी ब्रह्मचारिणी #🙏 देवी ब्रह्मचारिणी🌸 #चैत्र नवरात्र
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