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Dr R T Sharma - Author on ShareChat
Dr R T Sharma
818 views • 5 months ago
#समाजिक जागरूकता मिशन #✍️ जीवन में बदलाव #कड़वी मगर सच्ची बातें #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख
वो त्रीमूर्ति जिन्होंने इंसान को जगाया... बुद्ध ने दुख की जड़ को पहचाना... ओशो ने झूठी नैतिकता के पर्दे हटाए... अंबेडकर जी ने संविधान से सदियों की गुलामी को ... चुनौती तीनों भगवान नहीं थे... बल्कि मानव के कल्याण के उद्धारकर्ता थे. क्योंकि ये इंसान को झुकना नहीं... खुद के पैरों पर खड़ा होना सिखाते थे.. सोचने की आज़ादी देते थे... और सच का सामना करने की हिम्मत भी॰. इसीलिए इन्हें समझना आसान नहीं... पर जो समझ गया... वो कभी फिर झुका नहीं... वो त्रीमूर्ति जिन्होंने इंसान को जगाया... बुद्ध ने दुख की जड़ को पहचाना... ओशो ने झूठी नैतिकता के पर्दे हटाए... अंबेडकर जी ने संविधान से सदियों की गुलामी को ... चुनौती तीनों भगवान नहीं थे... बल्कि मानव के कल्याण के उद्धारकर्ता थे. क्योंकि ये इंसान को झुकना नहीं... खुद के पैरों पर खड़ा होना सिखाते थे.. सोचने की आज़ादी देते थे... और सच का सामना करने की हिम्मत भी॰. इसीलिए इन्हें समझना आसान नहीं... पर जो समझ गया... वो कभी फिर झुका नहीं...
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    Dr R T Sharma
    #समाजिक जागरूकता मिशन #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #मेरा अनुभव मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख
    यहां हर कोई खूंटे से बंधा है i में बिल्कुल  एक बूढ़ा व्यक्ति था, जो दुनिया  अकेला था। उसके पास सी बकरी एक छोटी थी, जो उसका एकमात्र साथी थी। दिन भर की थकान के बाद जब वह घर आता, तो वह बकरी ही थी जो अपनी भोली आँखों से उसे देखकर प्यार से मिमियाती थी। एक दिन, उस बूढ़े ने कांपते हाथों से बकरी आजाद कर दिया और भारी मन से कहा, । "जा १ हूं तेरी देखभाल नहीं कर पाऊंगा। री मेरी लाडो, अब तू आजाद है। मै अब कमजोर हो गया ` बकरी जंगल में चली गई मगर शाम होते ही अपने खूंटे पर लौट आई। हर रोज यही होने लगा। बकरी सुबह चली जाती मगर शाम को वापस लौट आती। बूढ़ा बीमार था और एक दिन मर गया। पर लोगों ने देखा कि वह बकरी अब भी उस घर के आँगन में , उसी जगह आकर बैठती , जहाँ वह खूंटा लगा था। वह खाना पीना भूल गई, बस उस जगह को निहारती रही जहाँ बूढ़े के खुरदरे हाथों का स्पर्श मिला करता था हम इंसानों का भी यही हाल है।। हम भी न जाने कितने खूंटो से बंधे है। हम चाह कर भी खूँटा नही छोड़ पाते। जहाँ रहते है। उस जगह से मोह हो जाता है। जिनके साथ रहते है उनसे मोह हो जाता है। उसे छोड़ने की हिम्मत हमसे नही हो पाती। फिर चाहे वह घर हो, पत्नी हो, पति हो, बच्चे हो, प्रेमी, प्रेमिका हो, दोस्त हो, माँ, बाप हो। हम इनके साथ एक अदृश्य खूंटे से बंधे रहते नहीं छूटता। है। जब तक सांस चलती है खूँटा  यहां हर कोई खूंटे से बंधा है i में बिल्कुल  एक बूढ़ा व्यक्ति था, जो दुनिया  अकेला था। उसके पास सी बकरी एक छोटी थी, जो उसका एकमात्र साथी थी। दिन भर की थकान के बाद जब वह घर आता, तो वह बकरी ही थी जो अपनी भोली आँखों से उसे देखकर प्यार से मिमियाती थी। एक दिन, उस बूढ़े ने कांपते हाथों से बकरी आजाद कर दिया और भारी मन से कहा, । "जा १ हूं तेरी देखभाल नहीं कर पाऊंगा। री मेरी लाडो, अब तू आजाद है। मै अब कमजोर हो गया ` बकरी जंगल में चली गई मगर शाम होते ही अपने खूंटे पर लौट आई। हर रोज यही होने लगा। बकरी सुबह चली जाती मगर शाम को वापस लौट आती। बूढ़ा बीमार था और एक दिन मर गया। पर लोगों ने देखा कि वह बकरी अब भी उस घर के आँगन में , उसी जगह आकर बैठती , जहाँ वह खूंटा लगा था। वह खाना पीना भूल गई, बस उस जगह को निहारती रही जहाँ बूढ़े के खुरदरे हाथों का स्पर्श मिला करता था हम इंसानों का भी यही हाल है।। हम भी न जाने कितने खूंटो से बंधे है। हम चाह कर भी खूँटा नही छोड़ पाते। जहाँ रहते है। उस जगह से मोह हो जाता है। जिनके साथ रहते है उनसे मोह हो जाता है। उसे छोड़ने की हिम्मत हमसे नही हो पाती। फिर चाहे वह घर हो, पत्नी हो, पति हो, बच्चे हो, प्रेमी, प्रेमिका हो, दोस्त हो, माँ, बाप हो। हम इनके साथ एक अदृश्य खूंटे से बंधे रहते नहीं छूटता। है। जब तक सांस चलती है खूँटा
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  • Dr R T Sharma - Author on ShareChat
    Dr R T Sharma
    #समाजिक जागरूकता मिशन #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरा अनुभव मेरे विचार #❤️जीवन की सीख
    जब बच्चों को अपने ही माता पिता दुश्मन लगने लगते है 3 31ಹri # मां बाप चाहते है बच्चा  ؟٢ लोगों से और बुरी संगति से सुरक्षित मगर १३ से २० साल की उम्र ऐसी होती है जहां बच्चों में हार्मोनल और मनोवैज्ञानिक बदलाव होते है। वह चाहता उसे कोई देखे , उसे महत्त्व दे, उसकी बात को सुने। उसे थोड़ी आजादी मिले , मगर माता पिता उसकी छटपटाहट देखकर बंदिशों का शिकंजा और ज्यादा कसने लगते है। तब बच्चों को अपने माता पिता ही सबसे लगने लगते है। ओल्ड ख्यालो के 43 লং বলংলন ল৯ন ক্িবন; ! ২ ল ন া্সা ল্ীাক্ अपनत्व और भावात्मक सहारा खोजने लगता है। और इसी चक्कर में फंस कर जीवन बर्बाद कर लेता है। बच्चों को समझना होगा कि #R माता पिता गलत नहीं है। भविष्य खराब होने कि फ़िक्र है। उन्हें तुम्हारी  का डर है। और आज के माहौल को देखकर उनका डर गलत नहीं है। जब बच्चों को अपने ही माता पिता दुश्मन लगने लगते है 3 31ಹri # मां बाप चाहते है बच्चा  ؟٢ लोगों से और बुरी संगति से सुरक्षित मगर १३ से २० साल की उम्र ऐसी होती है जहां बच्चों में हार्मोनल और मनोवैज्ञानिक बदलाव होते है। वह चाहता उसे कोई देखे , उसे महत्त्व दे, उसकी बात को सुने। उसे थोड़ी आजादी मिले , मगर माता पिता उसकी छटपटाहट देखकर बंदिशों का शिकंजा और ज्यादा कसने लगते है। तब बच्चों को अपने माता पिता ही सबसे लगने लगते है। ओल्ड ख्यालो के 43 লং বলংলন ল৯ন ক্িবন; ! ২ ল ন া্সা ল্ীাক্ अपनत्व और भावात्मक सहारा खोजने लगता है। और इसी चक्कर में फंस कर जीवन बर्बाद कर लेता है। बच्चों को समझना होगा कि #R माता पिता गलत नहीं है। भविष्य खराब होने कि फ़िक्र है। उन्हें तुम्हारी  का डर है। और आज के माहौल को देखकर उनका डर गलत नहीं है।
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  • Dr R T Sharma - Author on ShareChat
    Dr R T Sharma
    #समाजिक जागरूकता मिशन #कड़वी मगर सच्ची बातें #मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार
    ब्राह्मणवाद एक ऐसा धर्म है, जिसको इंसान में इंसान नजर नहों आता , लेकिन कौवे में बाप ओर गाय मेंगां नजर সজ্জ সানী &. #सामाजिक _ संदेश #जागरूकता ब्राह्मणवाद एक ऐसा धर्म है, जिसको इंसान में इंसान नजर नहों आता , लेकिन कौवे में बाप ओर गाय मेंगां नजर সজ্জ সানী &. #सामाजिक _ संदेश #जागरूकता
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    Hope is life
    #नीला आसमान 🌌 #शिक्षा एवम् अन्य समाजिक जागरूकता अभियान #समाजिक जागरूकता मिशन #समाजिक आईना 🦅
    नीला आसमान, शिक्षा  एवम् अन्य समाजिक  जागरूकता अभियान
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