Wallet Install
Home
Explore
Wallet
Video
Profile
Trends
English
Dr R T Sharma - Author on ShareChat
Dr R T Sharma
899 views • 1 months ago
#समाजिक जागरूकता मिशन #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #मेरा अनुभव मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख
यहां हर कोई खूंटे से बंधा है i में बिल्कुल  एक बूढ़ा व्यक्ति था, जो दुनिया  अकेला था। उसके पास सी बकरी एक छोटी थी, जो उसका एकमात्र साथी थी। दिन भर की थकान के बाद जब वह घर आता, तो वह बकरी ही थी जो अपनी भोली आँखों से उसे देखकर प्यार से मिमियाती थी। एक दिन, उस बूढ़े ने कांपते हाथों से बकरी आजाद कर दिया और भारी मन से कहा, । "जा १ हूं तेरी देखभाल नहीं कर पाऊंगा। री मेरी लाडो, अब तू आजाद है। मै अब कमजोर हो गया ` बकरी जंगल में चली गई मगर शाम होते ही अपने खूंटे पर लौट आई। हर रोज यही होने लगा। बकरी सुबह चली जाती मगर शाम को वापस लौट आती। बूढ़ा बीमार था और एक दिन मर गया। पर लोगों ने देखा कि वह बकरी अब भी उस घर के आँगन में , उसी जगह आकर बैठती , जहाँ वह खूंटा लगा था। वह खाना पीना भूल गई, बस उस जगह को निहारती रही जहाँ बूढ़े के खुरदरे हाथों का स्पर्श मिला करता था हम इंसानों का भी यही हाल है।। हम भी न जाने कितने खूंटो से बंधे है। हम चाह कर भी खूँटा नही छोड़ पाते। जहाँ रहते है। उस जगह से मोह हो जाता है। जिनके साथ रहते है उनसे मोह हो जाता है। उसे छोड़ने की हिम्मत हमसे नही हो पाती। फिर चाहे वह घर हो, पत्नी हो, पति हो, बच्चे हो, प्रेमी, प्रेमिका हो, दोस्त हो, माँ, बाप हो। हम इनके साथ एक अदृश्य खूंटे से बंधे रहते नहीं छूटता। है। जब तक सांस चलती है खूँटा  यहां हर कोई खूंटे से बंधा है i में बिल्कुल  एक बूढ़ा व्यक्ति था, जो दुनिया  अकेला था। उसके पास सी बकरी एक छोटी थी, जो उसका एकमात्र साथी थी। दिन भर की थकान के बाद जब वह घर आता, तो वह बकरी ही थी जो अपनी भोली आँखों से उसे देखकर प्यार से मिमियाती थी। एक दिन, उस बूढ़े ने कांपते हाथों से बकरी आजाद कर दिया और भारी मन से कहा, । "जा १ हूं तेरी देखभाल नहीं कर पाऊंगा। री मेरी लाडो, अब तू आजाद है। मै अब कमजोर हो गया ` बकरी जंगल में चली गई मगर शाम होते ही अपने खूंटे पर लौट आई। हर रोज यही होने लगा। बकरी सुबह चली जाती मगर शाम को वापस लौट आती। बूढ़ा बीमार था और एक दिन मर गया। पर लोगों ने देखा कि वह बकरी अब भी उस घर के आँगन में , उसी जगह आकर बैठती , जहाँ वह खूंटा लगा था। वह खाना पीना भूल गई, बस उस जगह को निहारती रही जहाँ बूढ़े के खुरदरे हाथों का स्पर्श मिला करता था हम इंसानों का भी यही हाल है।। हम भी न जाने कितने खूंटो से बंधे है। हम चाह कर भी खूँटा नही छोड़ पाते। जहाँ रहते है। उस जगह से मोह हो जाता है। जिनके साथ रहते है उनसे मोह हो जाता है। उसे छोड़ने की हिम्मत हमसे नही हो पाती। फिर चाहे वह घर हो, पत्नी हो, पति हो, बच्चे हो, प्रेमी, प्रेमिका हो, दोस्त हो, माँ, बाप हो। हम इनके साथ एक अदृश्य खूंटे से बंधे रहते नहीं छूटता। है। जब तक सांस चलती है खूँटा
9 shares

More like this

  • Dr R T Sharma - Author on ShareChat
    Dr R T Sharma
    #👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #✍️ जीवन में बदलाव #समाजिक जागरूकता मिशन #🙏 प्रेरणादायक विचार
    लोगों के लिए सीख, जीवन की सीख
    10
    10
  • Dr R T Sharma - Author on ShareChat
    Dr R T Sharma
    #समाजिक जागरूकता मिशन #मेरा अनुभव मेरे विचार #👍 डर के आगे जीत👌 #गौतम बुद्ध विचार
    ८८ जहाँ सियासत धार्मिक मसलों को शांत करें a देश महान होता है, जहां सियासत खुद धार्मिक मसलों को पैदा करें, समझो देश को गलत लोग चला रहे हैं। मार्टिन लूथर किंग ८८ जहाँ सियासत धार्मिक मसलों को शांत करें a देश महान होता है, जहां सियासत खुद धार्मिक मसलों को पैदा करें, समझो देश को गलत लोग चला रहे हैं। मार्टिन लूथर किंग
    9
    12
  • Dr R T Sharma - Author on ShareChat
    Dr R T Sharma
    #समाजिक जागरूकता मिशन #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरा अनुभव मेरे विचार #❤️जीवन की सीख
    जब बच्चों को अपने ही माता पिता दुश्मन लगने लगते है 3 31ಹri # मां बाप चाहते है बच्चा  ؟٢ लोगों से और बुरी संगति से सुरक्षित मगर १३ से २० साल की उम्र ऐसी होती है जहां बच्चों में हार्मोनल और मनोवैज्ञानिक बदलाव होते है। वह चाहता उसे कोई देखे , उसे महत्त्व दे, उसकी बात को सुने। उसे थोड़ी आजादी मिले , मगर माता पिता उसकी छटपटाहट देखकर बंदिशों का शिकंजा और ज्यादा कसने लगते है। तब बच्चों को अपने माता पिता ही सबसे लगने लगते है। ओल्ड ख्यालो के 43 লং বলংলন ল৯ন ক্িবন; ! ২ ল ন া্সা ল্ীাক্ अपनत्व और भावात्मक सहारा खोजने लगता है। और इसी चक्कर में फंस कर जीवन बर्बाद कर लेता है। बच्चों को समझना होगा कि #R माता पिता गलत नहीं है। भविष्य खराब होने कि फ़िक्र है। उन्हें तुम्हारी  का डर है। और आज के माहौल को देखकर उनका डर गलत नहीं है। जब बच्चों को अपने ही माता पिता दुश्मन लगने लगते है 3 31ಹri # मां बाप चाहते है बच्चा  ؟٢ लोगों से और बुरी संगति से सुरक्षित मगर १३ से २० साल की उम्र ऐसी होती है जहां बच्चों में हार्मोनल और मनोवैज्ञानिक बदलाव होते है। वह चाहता उसे कोई देखे , उसे महत्त्व दे, उसकी बात को सुने। उसे थोड़ी आजादी मिले , मगर माता पिता उसकी छटपटाहट देखकर बंदिशों का शिकंजा और ज्यादा कसने लगते है। तब बच्चों को अपने माता पिता ही सबसे लगने लगते है। ओल्ड ख्यालो के 43 লং বলংলন ল৯ন ক্িবন; ! ২ ল ন া্সা ল্ীাক্ अपनत्व और भावात्मक सहारा खोजने लगता है। और इसी चक्कर में फंस कर जीवन बर्बाद कर लेता है। बच्चों को समझना होगा कि #R माता पिता गलत नहीं है। भविष्य खराब होने कि फ़िक्र है। उन्हें तुम्हारी  का डर है। और आज के माहौल को देखकर उनका डर गलत नहीं है।
    8
    12
  • Dr R T Sharma - Author on ShareChat
    Dr R T Sharma
    #समाजिक जागरूकता मिशन #✍️ जीवन में बदलाव #🙏 प्रेरणादायक विचार #कड़वी मगर सच्ची बातें #❤️जीवन की सीख
    @kavitaaayein कविताएँ और साहित्य  00 महिलाओं के अंधविश्वासी होने की सबसे बडो वज़ह है हमारे सामाजिक ढाँचे का धर्म पर आधारित होना और अशिक्षा | रमणिका गप्ता @kavitaaayein कविताएँ और साहित्य  00 महिलाओं के अंधविश्वासी होने की सबसे बडो वज़ह है हमारे सामाजिक ढाँचे का धर्म पर आधारित होना और अशिक्षा | रमणिका गप्ता
    15
    19
Home
Explore
Wallet
Video