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#जाको धन, धरती हरी,
जाको धन, धरती हरी, - जाको धन, धरती हरी, ताहि न लीजै संग। ओ संग राखै ही बनै, तो करि राखु अपंग Il तो करि राखु अपंग , भीलि परतीति न कीजै। सौ सौगन्दें खाय, चित्त में एक न दीजै।l कह गिरिधर कविराय , कबहुँ विश्वास न वाको। रिपु समान परिहरिय, धन, धरती जाको Il ೯ जाको धन, धरती हरी, ताहि न लीजै संग। ओ संग राखै ही बनै, तो करि राखु अपंग Il तो करि राखु अपंग , भीलि परतीति न कीजै। सौ सौगन्दें खाय, चित्त में एक न दीजै।l कह गिरिधर कविराय , कबहुँ विश्वास न वाको। रिपु समान परिहरिय, धन, धरती जाको Il ೯ - ShareChat