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#श्रीमद भगवद गीता उपदेश 🙏🙏 #श्रीमद भगवद्गीता #🔱🕉श्रीमद भागवत पुराण 🙏🕉 #श्रीमद भगवदगीता श्लोक #गीता सार🙏
श्रीमद भगवद गीता उपदेश 🙏🙏 - द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि व्याप्तं त्वयैकेन दिशश्च सर्वाः 1 तवेदं- డ్లర్Tా డైగే  रूपमुग्रं प्रव्यथितं लोकत्रयं সম্ভাননূ l1 हैे महात्मन्! यह स्वर्ग और पृथ्वीके बीचका सम्पूर्ण आकाश तथा सव दिशाएँ एक आपसे ही परिपूर्ण हँ तथा आपके इस अलौकिक और भयंकर रूपको देखकर तोनों लोक अति व्यथाको সাদ ক্কাঁ ফ৯ ;ঁII ২০ 11  अमी हि त्वां सुरसङ्घा विशन्ति केचिद्घीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति ! स्वस्तीत्युक्त्वा महर्पिसिद्धसङ्घाः स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः I वे ही देवताओंके समूह आपमें प्रवेश करते हैँ और कुछ भयभीत होकर हाथ जोड़े आपके a और उच्चारण करते हॅ तथा महर्पि गुणोंका सिद्धोंके समुदाय ' कल्याण हो ' ऐसा कहकर उत्तम - स्तोत्रौद्वारा आपको स्तुति करते हैँ Il २१ II उत्तम रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या~ विश्वेउश्विनौ मरुतश्चोष्पपाश्च | गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा- वीक्षन्ते त्वां विस्पिताश्चैव सर्वे ।१ जो ग्यारह रुद्र और बारह आदित्य तथा आठ अश्विनीकुमार तथा मरुद्गण  साध्यगण, विश्वेदेव औसुर स्पितराग़्का सिमुदाय तथ्ष नगक्मव यक्ष 71817 और सिद्धोंके समुदाय हैं॰वे सब ही विस्मित होकर आपको देखते हैं Il २२ Il श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि व्याप्तं त्वयैकेन दिशश्च सर्वाः 1 तवेदं- డ్లర్Tా డైగే  रूपमुग्रं प्रव्यथितं लोकत्रयं সম্ভাননূ l1 हैे महात्मन्! यह स्वर्ग और पृथ्वीके बीचका सम्पूर्ण आकाश तथा सव दिशाएँ एक आपसे ही परिपूर्ण हँ तथा आपके इस अलौकिक और भयंकर रूपको देखकर तोनों लोक अति व्यथाको সাদ ক্কাঁ ফ৯ ;ঁII ২০ 11  अमी हि त्वां सुरसङ्घा विशन्ति केचिद्घीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति ! स्वस्तीत्युक्त्वा महर्पिसिद्धसङ्घाः स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः I वे ही देवताओंके समूह आपमें प्रवेश करते हैँ और कुछ भयभीत होकर हाथ जोड़े आपके a और उच्चारण करते हॅ तथा महर्पि गुणोंका सिद्धोंके समुदाय ' कल्याण हो ' ऐसा कहकर उत्तम - स्तोत्रौद्वारा आपको स्तुति करते हैँ Il २१ II उत्तम रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या~ विश्वेउश्विनौ मरुतश्चोष्पपाश्च | गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा- वीक्षन्ते त्वां विस्पिताश्चैव सर्वे ।१ जो ग्यारह रुद्र और बारह आदित्य तथा आठ अश्विनीकुमार तथा मरुद्गण  साध्यगण, विश्वेदेव औसुर स्पितराग़्का सिमुदाय तथ्ष नगक्मव यक्ष 71817 और सिद्धोंके समुदाय हैं॰वे सब ही विस्मित होकर आपको देखते हैं Il २२ Il श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat