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"हरियाणा वाटिका" (लोहारू/हरियाणा) 🙏🏻 #literature #हिंदी साहित्य #साहित्य
literature - 0 विवेक शर्मा ने कहा कि शिक्षा के साथ ्साथ विद्यार्थियों का शारीरिक स्वास्थ्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्था इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेगी। अंत में सभी डॉक्टरों, अभिभावकों एवं सहयोगी स्टाफ का धन्यवाद किया गया। नवनीत गिल एम.ए (इतिहास,राजनीति शास्त्र), ೩.pತ; एम.एड एल.एल.बी। पूर्व प्राचार्य सीबीएसई विद्यालय (उत्तर प्रदेश) | हुकार मजबूरी की दीवार पर, लिखा   उम्मीद अल्फाज। तलाशता रहे अवसर जाने अनजाने देकर आवाज। बेशक हो, कोसों दूर, मगर चलने को कहे हुजूर। हौंसले का हाथ थाम, समझाये चल से शाम। सुब्हो বপাং होकर, न मिले छोड़कर व्यर्थ सभी गिले। बलबूते बढ़ना स्वयं के आगे, त्याग स्वप्नलोक के गोते। चमकेगा भांति दिनकर, बेबसी की आड़, गिराकर। बन शोला कभी शबनम, हे बंधु ! भुलाकर प्रत्येक गम। भले डरायें भयावह साये, चाहें, तेरा वक्त निकल जाये। भर हुंकार   सिंह की तरह, गिल बिन करे फ़ालतू जिरह। राष्ट्रीय सेवा योजना के साप्ताहिक 0 विवेक शर्मा ने कहा कि शिक्षा के साथ ्साथ विद्यार्थियों का शारीरिक स्वास्थ्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्था इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेगी। अंत में सभी डॉक्टरों, अभिभावकों एवं सहयोगी स्टाफ का धन्यवाद किया गया। नवनीत गिल एम.ए (इतिहास,राजनीति शास्त्र), ೩.pತ; एम.एड एल.एल.बी। पूर्व प्राचार्य सीबीएसई विद्यालय (उत्तर प्रदेश) | हुकार मजबूरी की दीवार पर, लिखा   उम्मीद अल्फाज। तलाशता रहे अवसर जाने अनजाने देकर आवाज। बेशक हो, कोसों दूर, मगर चलने को कहे हुजूर। हौंसले का हाथ थाम, समझाये चल से शाम। सुब्हो বপাং होकर, न मिले छोड़कर व्यर्थ सभी गिले। बलबूते बढ़ना स्वयं के आगे, त्याग स्वप्नलोक के गोते। चमकेगा भांति दिनकर, बेबसी की आड़, गिराकर। बन शोला कभी शबनम, हे बंधु ! भुलाकर प्रत्येक गम। भले डरायें भयावह साये, चाहें, तेरा वक्त निकल जाये। भर हुंकार   सिंह की तरह, गिल बिन करे फ़ालतू जिरह। राष्ट्रीय सेवा योजना के साप्ताहिक - ShareChat