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1222 1222 1222 1222
अगर तू ज़िन्दगी की मेरे हमदम धार हो जाए
भटकती नाव मेरी ज़िंदगी की पार हो जाए
बहुत तरसा हूँ तेरी आरजू दिल मे बसाकर में
दुआ अब कोई तो मेरी कबूले यार हो जाये
जला ले प्यार के दीपक दिलों में वक्त के रहते
कहीं ऐसा न हो की ज़िन्दगी बेकार हो जाए
तुझी से जल्वे है दिन के , तुझी से हैं हसीं रातें
महकती हुई इक शब मेरी भी सरकार हो जाए
समन्दर रहमतो का है , समाया तेरे आँचल में
इनायत-ऐ-नज़र से सपने सब साकार हो जाए
बड़ी ही बेअदब है डोर जुल्फों की तेरे यारा
निकलना चाहूँ जो मैं झटसे ये औज़ार हो जाए
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
6/7/2018 #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️