-
847 views • 2 days ago
122 122 122 122
किया तुमने जो गर इशारा न होता
तेरे सजदे में दिल हमारा न होता
सदा रहते तन्हाइयों में यहाँ हम
तेरे प्यार का गर सहारा न होता
खयालो में उलझे ही रहते सदा हम
अगर तुमने हमको पुकारा न होता
समझ ही न पाते मुहब्बत तुम्हारी
मिला साथ जो ये तुम्हारा न होता
कदम दर कदम खाते ठोकर यहाँ पे
कहीं पर हमारा गुजारा न होता
बिखर जाते तिनको के जैसे गमो में
मिला इश्क में जो किनारा न होता
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
27/5/2017 #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️
2 likes
16 shares