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Bidesh Mishra - Author on ShareChat
Bidesh Mishra
767 views • 6 months ago
#📙वेदों का ज्ञान #jai shree ram jai shree ram jai shree ram jai shree ram jai shree ram #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏भगवान विष्णु की कथाएं📙
ऊँ श्री रामचरितमानस बालकाण्ड ऊँ जय श्री सीताराम दोहा पुनि पुनि रामहि चितव सिय #3 =$4 সক্তবনি न। हरत मनोहर मीन छबि प्रेम पिआसे नैन।।३२६ ।। भावार्थः सीताजी बार-बार रामजी को देखती हैं और सकुचा जाती हैं, पर उनका मन नहीं सकुचाता। प्रेम के प्यासे उनके नेत्र सुंदर मछलियों की छबि को हर <881|326 1| मासपारायण, ग्यारहवाँ विश्राम ऊँ श्री रामचरितमानस बालकाण्ड ऊँ जय श्री सीताराम दोहा पुनि पुनि रामहि चितव सिय #3 =$4 সক্তবনি न। हरत मनोहर मीन छबि प्रेम पिआसे नैन।।३२६ ।। भावार्थः सीताजी बार-बार रामजी को देखती हैं और सकुचा जाती हैं, पर उनका मन नहीं सकुचाता। प्रेम के प्यासे उनके नेत्र सुंदर मछलियों की छबि को हर <881|326 1| मासपारायण, ग्यारहवाँ विश्राम
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  • Mahesh Waghmare - Author on ShareChat
    Mahesh Waghmare
    #📙वेदों का ज्ञान #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌍भारतीय इतिहास📚 #📜 Whatsapp स्टेटस #😃 शानदार स्टेटस
    वेदों का ज्ञान, सनातन धर्म
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  • Bidesh Mishra - Author on ShareChat
    Bidesh Mishra
    #📙वेदों का ज्ञान #jai shree ram jai shree ram jai shree ram jai shree ram jai shree ram #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏भगवान विष्णु की कथाएं📙
    ऊँ श्री रामचरितमानस बालकाण्ड ऊँ जय श्री सीताराम बाल रबि दामिनि पीत मनोहर धोती। हरति पुनीत তীনী Il कल किंकिनि कटि सूत्र मनोहर। I5 fHH बिभूषन सुंदरII२ II भावार्थः पवित्र और मनोहर पीली धोती प्रातःकाल के सूर्य और बिजली की ज्योति को हरे लेती है। कटिसूत्र कमर में सुंदर किंकिणी और विशाल 81  में सुंदर आभूषण सुशोभित हैं Il२ II भुजाओं पीत जनेउ महाछबि देई। कर मुद्रिका चोरि चितु लेई।I सोहत ब्याह साज सब साजे। उर आयत उरभूषन <சII3 II भावार्थःपीला जनेऊ महान शोभा दे रहा है। हाथ की अँगूठी चित्त को चुरा लेती है। ब्याह के सब साज सजे हुए वे शोभा पा रहे हैं। चौड़ी छाती पर हृदय के सुंदर आभूषण सुशोभित हैं II३ II পক্নন पर पिअर उपरना काखासोती। दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोतीIl राधेकृष्ण ऊँ जयःश्री ऊँ श्री रामचरितमानस बालकाण्ड ऊँ जय श्री सीताराम बाल रबि दामिनि पीत मनोहर धोती। हरति पुनीत তীনী Il कल किंकिनि कटि सूत्र मनोहर। I5 fHH बिभूषन सुंदरII२ II भावार्थः पवित्र और मनोहर पीली धोती प्रातःकाल के सूर्य और बिजली की ज्योति को हरे लेती है। कटिसूत्र कमर में सुंदर किंकिणी और विशाल 81  में सुंदर आभूषण सुशोभित हैं Il२ II भुजाओं पीत जनेउ महाछबि देई। कर मुद्रिका चोरि चितु लेई।I सोहत ब्याह साज सब साजे। उर आयत उरभूषन <சII3 II भावार्थःपीला जनेऊ महान शोभा दे रहा है। हाथ की अँगूठी चित्त को चुरा लेती है। ब्याह के सब साज सजे हुए वे शोभा पा रहे हैं। चौड़ी छाती पर हृदय के सुंदर आभूषण सुशोभित हैं II३ II পক্নন पर पिअर उपरना काखासोती। दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोतीIl राधेकृष्ण ऊँ जयःश्री
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    Bidesh Mishra
    #📙वेदों का ज्ञान #jai shree ram jai shree ram jai shree ram jai shree ram jai shree ram #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏भगवान विष्णु की कथाएं📙
    ऊँ श्री रामचरितमानस बालकाण्ड 3ঁ অয্র ৪ী মীনাহাম ए दारिका परिचारिका करि पालिबीं करुना नई। अपराधु छमिबो बोलि पठए बहुत हौं ढीट्यो कई।। पुनि भानुकुलभूषन সব্ধল সনমান নিখি সমধী किए। कहि जाति नहिं बिनती परस्पर प्रेम परिपूरन हिए।। 3|| भावार्थः ्इन लड़कियों को टहलनी मानकर, नई-्नई कीजिएगा। मैंने बड़ी ढिठाई की दया करके पालन भेजा, कि आपको 461 अपराध क्षमा बुला कीजिएगा। फिर सूर्यकुल के भूषण दशरथजी ने समधी जनकजी को सम्पूर्ण सम्मान का निधि कर दिया (इतना सम्मान किया कि॰वे सम्मान के भंडार ही हो गए)। उनकी परस्पर की विनय कही नहीं प्रेम से परिपूर्ण हैं II३ II के हृदय  जाती, दोनों ऊँ श्री रामचरितमानस बालकाण्ड 3ঁ অয্র ৪ী মীনাহাম ए दारिका परिचारिका करि पालिबीं करुना नई। अपराधु छमिबो बोलि पठए बहुत हौं ढीट्यो कई।। पुनि भानुकुलभूषन সব্ধল সনমান নিখি সমধী किए। कहि जाति नहिं बिनती परस्पर प्रेम परिपूरन हिए।। 3|| भावार्थः ्इन लड़कियों को टहलनी मानकर, नई-्नई कीजिएगा। मैंने बड़ी ढिठाई की दया करके पालन भेजा, कि आपको 461 अपराध क्षमा बुला कीजिएगा। फिर सूर्यकुल के भूषण दशरथजी ने समधी जनकजी को सम्पूर्ण सम्मान का निधि कर दिया (इतना सम्मान किया कि॰वे सम्मान के भंडार ही हो गए)। उनकी परस्पर की विनय कही नहीं प्रेम से परिपूर्ण हैं II३ II के हृदय  जाती, दोनों
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    #📙वेदों का ज्ञान #jai shree ram jai shree ram jai shree ram jai shree ram jai shree ram #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏भगवान विष्णु की कथाएं📙
    ऊँ श्री रामचरितमानस बालकाण्ड ऊँ जय श्री सीताराम दोहा पुनि पुनि रामहि चितव सिय सकुचति मनु सकुचै 71 हरत मनोहर मीन छबि प्रेम पिआसे नैन।।३२६ ।। भावार्थः सीताजी बार-बार रामजी को देखती हैं और सकुचा जाती हैं, पर उनका मन नहीं सकुचाता। प्रेम के प्यासे उनके नेत्र सुंदर मछलियों की छबि को हर z೯ ೯Il326 Il मासपारायण, ग्यारहवाँ विश्राम ऊँ श्री रामचरितमानस बालकाण्ड ऊँ जय श्री सीताराम दोहा पुनि पुनि रामहि चितव सिय सकुचति मनु सकुचै 71 हरत मनोहर मीन छबि प्रेम पिआसे नैन।।३२६ ।। भावार्थः सीताजी बार-बार रामजी को देखती हैं और सकुचा जाती हैं, पर उनका मन नहीं सकुचाता। प्रेम के प्यासे उनके नेत्र सुंदर मछलियों की छबि को हर z೯ ೯Il326 Il मासपारायण, ग्यारहवाँ विश्राम
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