sn vyas
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#ब्राह्मण के लिए #सन्ध्या अति आवश्यक है.......... #विप्र वृक्ष हैं ये संध्याएँ उसकी जड हैं वेद उसकी शाखाएं हैं और सभी धर्म उसके पत्ते हैं अतएव प्रयत्न के साथ मूल अर्थात् संध्या की रक्षा करनी चाहिए क्योंकि मूल के कट जाने पर न तो वृक्ष रहता है और न शाखा........... #विप्रो वृक्षो मूलकायन्त्र संध्या ,वेदः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम् तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं, छिन्ने मूले नैव वृक्षो न शाखा। जिसने #सन्ध्या का ज्ञान नहीं किया तथा जिसने सन्ध्योपासन नहीं किया - वह जीते जी शूद्र के समान होता है और मृत्यु के अनन्तर कुत्ते की योनि में जन्म लेता है ...... #सन्ध्या येन न विज्ञाता सन्ध्या येनानुपासिता । जीवमानो भवेच्छूद्रो मृतः श्वा चैव जायते ।। #प्रातःसन्ध्यां सनक्षत्रां मध्याह्ने मध्यभासकराम् । ससूर्यां पश्चिमां सन्ध्यां तिस्त्रः सन्ध्या #उपासते ।। प्रातःकाल की संध्या आकाश में तारों के रहते - रहते -- मध्याह्न की संख्या सूर्य के मध्य आकाश में आने पर और सांयकाल की सन्ध्या के पश्चिम दिशा में आने करने का विधान है....... तारों के आकाश में विद्यमान रहते की जाने वाली प्रातः सन्ध्या उत्तम - तारों के लुप्त होने से लेकर #सूर्योदय के बीच की अवधि में की जाने वाली संन्ध्या मध्यम और सूर्य के उदय हो जाने पर की जाने वाली सन्ध्या अधम होती है ............ #सायंकाल में सूर्य के विद्यमान रहते की गई सायं सन्ध्या उत्तम - सूर्य के अस्त होने तथा तारों के उदय होने के पूर्व की सन्ध्या मध्यम और तारों के उदय के पश्चात् की गई सन्ध्या अधम कही गई है.......... सूर्य के उदय होने तथा अस्त होने के तीन - तीन घटी ( सवा घंटे ) बाद तक #सन्ध्योपासन कर लेनी चाहिए-- उसके बाद सन्ध्या करने पर प्रायश्चित करना पडता है......... #कालातिक्रमणे जाते चतुर्थार्घ्यं प्रदापयेत् । #अथवाष्टशतं देवीं जप्त्वादौ तां समाचरेत् ।। समय बीत जाने पर यदि सन्ध्या की जाये - तो तीन अर्ध्य अतिरिक्त चौथा अर्घ्य देना चाहिए अथवा सन्ध्या के आरम्भ में १०८ बार #गायत्रीमंत्र का जप करके सन्ध्या करनी चाहिए । #गृहे साधारणा प्रोक्ता गोष्ठे वै मध्यमा भवेत् । नदीतीरे चोत्तमा #स्याद्देवीगेहे तद्त्तमा ।। घर में कई गई सन्ध्या #साधारण कही गई है -- गोशाला में की गई संध्या मध्यम कोटी की होती है -- नदी के तट पर की गई संध्या उत्तम होती है और #देवमंदिर में की गई सन्ध्या उससे भी उत्तम कही गई है............ #ब्राह्मणों के लिए इन #गायत्री देवी के अतिरिक्त अन्य देवता नही है -- विष्णु तथा शिव की उपासना भी वैसी नित्य नहीं है - जैसी महादेवी गायत्री की वेदप्रतिपादित सन्ध्या नित्य है गायत्रीदेवी की आराधना सम्पूर्ण वेदों का सार - स्वरूप है । ब्रह्मा आदि देवता भी सन्ध्योपासन के समय उन गायत्री देवी का ध्यान और जप करते हैं - वेद उन गायत्री का नित्य जप करते हैं - अतएव वे #वेदोपास्या ' कही गई हैं.......... या सन्ध्या सैव गायत्री #सच्चिदानन्दरूपिणी। #भक्त्यां तां ब्राह्मणो नित्यं पूजयेच्च नमेत्ततः ।। जो संध्या हैं - वे ही सच्चिदानन्दस्वरूपिणी गायत्री हैं #ब्राह्मण को उन गायत्री का नित्य पूजन और नमन करना चाहिए ............ #न गायत्रीं #जपेद्विद्वाञ्जलमध्ये कथञ्चन। यतः साग्निमुखी प्रोक्तात्याहुः #केचिन्महर्षयः ।। #विद्वान व्यक्ति को चाहिए जल में स्थित रहकर गायत्रीमंत्र का जप कभी भी न करे क्योंकि वे #अग्निमुखी कही गई हैं - ऐसा महर्षियों ने कहा है.......... #भक्ति #भक्ति भावना #जय मां गायत्री🙏🙏 गायत्री मंत्र🌄 #🌺🙏 श्री गायत्री मंत्र 🌷🙏#🙏 मां सरस्वती ♥️🙏 #जय मां गायत्री
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