sn vyas
902 views 4 hours ago
🌞🌹🌞🌹🌞🌹🌞🌹🌞 🪷सुप्रभातम🪷 नृपः कामासक्तो गणयति न कार्यं न च हितं यथेष्टं स्वच्छन्दः प्रविचरति मत्तो गज इव। ततो मानध्मातः स पतति यदा शोकगहने तदा भृत्ये दोषान्क्षिपति न निजं वेत्त्यविनयम्॥ (हितोपदेशः सुहृद्भेदः- १४२) अर्थात् 👉🏻 विषय-भोगों में आसक्त राजा कार्य को और हितकारी वचनों को नहीं गिनता है और मतवाले हाथी की तरह अपनी इच्छानुसार जो अच्छा लगता है सो करता है; और फिर घमंड के मारे जब शोक में अर्थात् भारी विपत्ति में गिरता है तब सेवकों पर दोष पटकता है और अपने बुरे आचरण को नहीं जानता है। 🙏🌹🚩 जय श्री कृष्ण 🚩🌹🙏 🌞🌹🌞🌹🌞🌹🌞🌹🌞 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌞सुप्रभात सन्देश
30 shares

More like this