sn vyas
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🪷सुप्रभातम🪷
नृपः कामासक्तो गणयति न कार्यं न च हितं
यथेष्टं स्वच्छन्दः प्रविचरति मत्तो गज इव।
ततो मानध्मातः स पतति यदा शोकगहने
तदा भृत्ये दोषान्क्षिपति न निजं वेत्त्यविनयम्॥
(हितोपदेशः सुहृद्भेदः- १४२)
अर्थात् 👉🏻 विषय-भोगों में आसक्त राजा कार्य को और हितकारी वचनों को नहीं गिनता है और मतवाले हाथी की तरह अपनी इच्छानुसार जो अच्छा लगता है सो करता है; और फिर घमंड के मारे जब शोक में अर्थात् भारी विपत्ति में गिरता है तब सेवकों पर दोष पटकता है और अपने बुरे आचरण को नहीं जानता है।
🙏🌹🚩 जय श्री कृष्ण 🚩🌹🙏
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#☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌞सुप्रभात सन्देश
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