Pradeep Singh
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“वाणी का संयम मनुष्य के व्यक्तित्व का ऐसा आभूषण है, जो बिना किसी धन के भी सम्मान दिलाता है।”
श्रीमद्भगवद्गीता हमें सिखाती है कि हमारी वाणी सत्य, प्रिय और हितकारी होनी चाहिए। कभी-कभी एक छोटा-सा मधुर शब्द किसी के मन का बोझ हल्का कर देता है। 🙏🦚
📖 डिस्क्रिप्शन:
हमारे शब्द केवल ध्वनि नहीं हैं; वे भावनाएँ, विचार और संस्कार लेकर सामने वाले तक पहुँचते हैं। इसलिए बोलने से पहले यह विचार करना आवश्यक है कि हमारी बात सत्य है या नहीं, प्रिय है या नहीं और किसी के लिए हितकारी है या नहीं।
श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 17, श्लोक 15 में वाणी के तप का सुंदर वर्णन मिलता है—ऐसी वाणी जो अनावश्यक उद्वेग न पैदा करे, सत्य हो, प्रिय हो और हितकारी हो।
वाणी पर संयम → क्रोध पर नियंत्रण → रिश्तों में मधुरता → व्यक्तित्व में गरिमा।
📊 आपकी वाणी कैसी है? #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #hindu
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