❣️𝑲𝒖𝒎𝒂𝒓💞 𝑹𝒂𝒖𝒏𝒂𝒌💞 𝑲𝒂𝒔𝒉𝒚𝒂𝒑❣️
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#🌺 श्री गणेश
🕉️ शास्त्रों के अनुसार पुत्र कितने प्रकार के होते हैं? 🕉️
सनातन धर्म में 'पुत्र' का बहुत गहरा अर्थ है। शास्त्रों के अनुसार, 'पुत' का अर्थ है नरक और 'त्र' का अर्थ है बचाने वाला। अर्थात् जो श्राद्ध और कर्मों से माता-पिता तथा पितरों को नरक से बचाए, वही पुत्र है।
धर्मशास्त्रों (जैसे मनुस्मृति) में मुख्य रूप से 12 प्रकार के पुत्रों का वर्णन है। आइए जानते हैं इनके बारे में:
🟢 प्रथम 6 पुत्र (जो ऋण, पिण्ड, गोत्र और कुल के अधिकारी होते हैं):
१. औरस: अपनी धर्मपत्नी से उत्पन्न अपना प्रकृत पुत्र (सबसे श्रेष्ठ)।
२. क्षेत्रज: पति के अस्वस्थ या अक्षम होने पर, उसकी आज्ञा से पत्नी द्वारा उत्पन्न पुत्र।
३. दत्तक: गोद लिया हुआ पुत्र (जिसके बदले कोई धन न लिया गया हो)।
४. कृत्रिम: किसी श्रेष्ठ जन या मित्र द्वारा स्वेच्छा से दिया गया पुत्र।
५. गूढज: वह पुत्र जो घर में उत्पन्न हुआ हो, लेकिन जिसके वास्तविक स्रोत का ज्ञान न हो।
६. अपविद्ध: बाहर से स्वयं लाया गया और अपनाया गया पुत्र।
🔴 अन्य 6 पुत्र (जो केवल नामधारी होते हैं, इन्हें पिण्ड या गोत्र का अधिकार नहीं होता):
७. कानीन: कुँवारी कन्या से उत्पन्न पुत्र।
८. सहोढ़: गर्भिणी कन्या से विवाह के बाद उत्पन्न पुत्र।
९. क्रीत: मूल्य देकर (खरीदा गया) पुत्र।
१०. पौनर्भव: पुनर्विवाह से उत्पन्न या किसी स्त्री को दूसरे पति को सौंपने पर उत्पन्न पुत्र।
११. स्वयंदत्त: अकाल या विपत्ति के कारण जो स्वयं आकर खुद को किसी को सौंप दे।
१२. पार्शव (शौद्र): ब्राह्मण पिता और शूद्र माता से उत्पन्न पुत्र।
✨ कर्मों (पूर्व जन्म) के आधार पर 4 प्रकार के पुत्र ✨
शास्त्रों में कर्मों के हिसाब से भी पुत्र की ४ श्रेणियां बताई गई हैं:
💸 ऋणानुबंध पुत्र: यदि आपने पूर्व जन्म में किसी का कर्ज नहीं चुकाया है, तो वह इस जन्म में आपका पुत्र बनकर आएगा। वह तब तक आपका धन बर्बाद करेगा, जब तक उसका पिछला हिसाब बराबर नहीं हो जाता।
⚔️ शत्रु पुत्र: यदि पिछले जन्म में आपने किसी को बहुत कष्ट दिया है, तो वह शत्रु इस जन्म में पुत्र बनकर जन्म लेगा और आपको जीवन भर दुःख देगा।
😐 उदासीन पुत्र: ऐसा पुत्र माता-पिता से कोई लगाव नहीं रखता। विवाह होते ही वह अलग हो जाता है और उसे माता-पिता के सुख-दुःख से कोई वास्ता नहीं होता।
🙏 सेवक पुत्र (सबसे श्रेष्ठ): यदि आपने पिछले जन्म में निःस्वार्थ भाव से किसी की या गौ-माता की सेवा की है, तो वही पुण्य इस जन्म में 'सेवक पुत्र' के रूप में जन्म लेता है, जो जीवन भर आपकी नि:स्वार्थ सेवा करता है।
सार: हमारे जीवन में आने वाली संतान हमारे ही पूर्व जन्मों के कर्मों का फल होती है।
॥ जय सनातन धर्म ॥ ॥ हर हर महादेव ॥
।। ॐ नमः शिवाय ।।
।। हर हर महादेव ।।
. !! जय जय श्री महाकाल !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
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